फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Jharkhand may witness 5pc rise in aerosol pollution in 2023 Study

Aerosol Pollution: 2023 तक एयरोसोल प्रदूषण में हो सकती है बढ़ोतरी, दिल-फेफड़े की समस्याएं भी बढ़ सकती हैं

Sat, 12 Nov 2022 03:59 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 12 Nov 2022 03:59 PM IST
सार

एक स्टडी रिपोर्ट में पाया गया है कि झारखंड में अगले साल तक एयरोसोल प्रदूषण में पांच फीसदी की वृद्धि हो सकती है। इससे अस्थमा, फेफड़े और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं।

विज्ञापन
Jharkhand may witness 5pc rise in aerosol pollution in 2023 Study
वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

झारखंड में अगले सात तक एयरोसोल (धूल-मिट्टी के अलावा कार्बन के छोटे-छोटे कम) प्रदूषण में पांच फीसदी की वृद्धि होने की संभावना है। इससे इससे दृश्यता (एओडी) के स्तर में गिरावट आ सकती है। परिणामस्वरूप नागरिकों के लिए कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एक रिसर्च ऑर्गनाइजेशन की स्टडी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। 

विज्ञापन

'अत्यधिक संवेदनशील' रेड जोन में पहुंच सकता है प्रदूषण
इस तरह के प्रदूषण से राज्य के 'अत्यधिक संवेदनशील' रेड जोन में पहुंचने की संभावना है। स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, थर्मल पावर प्लांट से उत्सर्जन में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5 और पीएम 10), समुद्री नमक, सल्फेट, ब्लैक और ऑर्गेनिक कार्बन युक्त उच्च एयरोसोल की मात्रा का मुख्य योगदान था। 
विज्ञापन


2023 तक एयरोसोल प्रदूषण में पांच फीसदी वृद्धि की संभावना
रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरोसोल प्रदूषण के बढ़ने से अस्थमा, फेफड़े और हृदय संबंधी बीमारियां बढ़ सकती हैं। कोलकाता स्थित बोस इंस्टीट्यूट के पर्यावरण विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिजीत चटर्जी ने बताया कि इससे बच्चे, महिलाएं और बुजर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। चटर्जी ने यह भी बताया कि 2023 तक एयरोसोल प्रदूषण में पांच फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ क्या है?
एयरोसोल ऑप्टिकल डेप्थ (एओडी), वातावरण में मौजूद एरोसोल का एक मात्रात्मक अनुमान है और इसे पीएम 2.5 के प्रॉक्सी माप के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि झारखंड अभी रेड जोन में आता है। इसके देखते हुए उपग्रह-आधारित आंकड़ों का अध्ययन करके लंबे समय तक शोध किया गया। यह शोध (भारत में राज्य स्तर पर एयरोसोल प्रदूषण) अभिजित चटर्जी और उनके ही संस्थान की रिसर्च स्कॉलर मोनामी द्वारा किया गया था।   


0 अधिकतम दृश्यता के साथ पूरी तरह साप आकाश का संकेतक है, जबकि 1 बहुत धुंधले वातावरण को इंगित करता है। 0.3 से कम एओडी ग्रीन जोन (सुरक्षित), 0.3 से 0.4 ब्लू जोन (कम सुरक्षित), 0.4 से 0.5 ऑरेंज जोन (असुरक्षित) है, जबकि 0.5से ज्यादा रेड जोन (अत्यधिक असुरक्षित) के अंतर्गत आता है। स्टडी में 0.4 तक एओडी परिमाण को एयरोसोल प्रदूषण के लिहाज से सुरक्षित माना गया है। इस सीमा से ऊपर के राज्यों को असुरक्षित माना गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed