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झारखंड: हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म का मामला, झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को दिए सख्त निर्देश

Mon, 05 Oct 2026 05:50 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 05 Oct 2026 05:50 PM IST
सार

हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में महिला से दुष्कर्म की डालसा रिपोर्ट में पुष्टि हुई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को महिला की सुरक्षा और सुविधाओं का ध्यान रखने का निर्देश दिया। मामले में तीन पुलिसकर्मी निलंबित हैं और केंद्र से बांग्लादेश वापसी पर जवाब मांगा है।

 

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Jharkhand High Court issues strict directives to the government regarding the Hazaribagh detention center case
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय में सोमवार को हजारीबाग स्थित डिटेंशन सेंटर में रह रही एक महिला के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। उच्च न्यायालय ने मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि डिटेंशन सेंटर में रहने के दौरान पीड़ित महिला को तुरंत सभी आवश्यक सुविधाएं और उचित व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएं। राज्य सरकार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, मामले की गहन जांच जारी है और घटना के सिलसिले में तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इससे पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), हजारीबाग ने मामले से संबंधित अपनी जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश की थी।

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डालसा रिपोर्ट की पुष्टि और राज्य सरकार का कदम
डालसा हजारीबाग द्वारा अदालत में दाखिल सीलबंद रिपोर्ट में डिटेंशन सेंटर के भीतर महिला के साथ दुष्कर्म होने की घटना की स्पष्ट पुष्टि की गई है। रिपोर्ट सामने आने के तत्काल बाद राज्य सरकार ने अदालत में विस्तृत शपथ पत्र दाखिल किया। सरकार ने अपने लिखित जवाब के जरिये एफआईआर दर्ज करने, तीन पुलिसकर्मियों के निलंबन और मामले की चल रही जांच प्रक्रिया का पूरा विवरण उच्च न्यायालय के समक्ष रखा।
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उच्च न्यायालय ने पीड़ित महिला की वर्तमान स्थिति, उसकी शारीरिक व मानसिक जरूरतों को प्राथमिकता पर रखने का आदेश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट कहा कि डिटेंशन सेंटर में महिला की सुरक्षा और मूलभूत आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके साथ ही अदालत ने अब तक प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई का भी पूरा ब्योरा तलब किया।
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महिला को बांग्लादेश भेजने पर फंसा पेच
सुनवाई के दौरान पीड़ित महिला को बांग्लादेश वापस भेजने से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय पत्राचार का मामला भी प्रमुखता से सामने आया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि महिला को बांग्लादेश वापस भेजा जाना तय था। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राज्य सरकार वर्ष 2023 से लगातार केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को आधिकारिक पत्र भेज रही है। हालांकि, केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से अब तक इस विषय पर कोई स्पष्ट उत्तर प्राप्त नहीं हो सका है।

मामले की सुनवाई के दौरान पहले सत्र में संबंधित विभाग के सचिव स्वयं उच्च न्यायालय में उपस्थित हुए। उन्होंने अदालत को जानकारी दी कि वर्ष 2021 में भी महिला के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश सरकार से संपर्क स्थापित किया गया था, परंतु वहां से कोई सकारात्मक या स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। इस बिंदु को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, ताकि देश वापसी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

दो सत्रों में हुई सुनवाई और अदालत के निर्देश
सोमवार को इस संवेदनशील मामले की सुनवाई दो अलग-अलग सत्रों में हुई। प्रथम सत्र के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रख रहे महाधिवक्ता रोहित राय ने सरकार से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त करने के लिए अदालत से कुछ समय देने की याचना की। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए दूसरे सत्र में सुनवाई निर्धारित की। दूसरे सत्र में राज्य सरकार ने दाखिल शपथ पत्र के माध्यम से अब तक की गई संपूर्ण कार्रवाई की जानकारी पेश की।


अदालत में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता अंकित अपूर्वा ने राज्य तथा केंद्र सरकार के मध्य महिला को वापस भेजने से जुड़े पत्राचार को अदालत के समक्ष रेखांकित किया। उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं पर अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करें। अदालत इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और केंद्र सरकार के जवाब पर लगातार निगरानी रखेगी।

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