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Jharkhand: कांग्रेस विधायक आलमगीर आलम को राहत नहीं, कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
Sat, 21 Jun 2025 12:15 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sat, 21 Jun 2025 12:15 AM IST
सार
झारखंड हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। वे 15 मई 2024 से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं। उन पर टेंडर घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है।
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कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री आलमगीर आलम
- फोटो : PTI
विस्तार
झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री आलमगीर आलम द्वारा दायर जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह याचिका प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा टेंडर घोटाले में गिरफ्तारी के बाद दाखिल की गई थी।
पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलम, जो पाकुड़ से चार बार विधायक रह चुके हैं, 15 मई 2024 से हिरासत में हैं। उन पर ईडी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मनचाही कंपनियों को ठेके दिलवाए और इसके बदले कमीशन लिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने की, जिन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
करोड़ों की नकदी बरामदगी से जुड़े हैं गंभीर आरोप
जांच की शुरुआत ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी से हुई, जिन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पकड़ा था। इसके बाद ईडी ने दिल्ली, रांची, पटना और जमशेदपुर में राम और अन्य अभियंताओं के ठिकानों पर छापेमारी की।
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ईडी ने आलम के निजी सचिव संजीव लाल और उनके सेवक जहांगीर आलम के आवासों पर भी छापे मारे। जहांगीर के घर से ₹32 करोड़ नकद बरामद किए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह रकम आलमगीर आलम से जुड़ी है और इसे कर्मचारियों के घरों में छुपाकर रखा गया था।
जांच के बाद ईडी ने आलम को पूछताछ के लिए बुलाया और फिर हिरासत में ले लिया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। अब झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका पर दिए जाने वाले निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलम, जो पाकुड़ से चार बार विधायक रह चुके हैं, 15 मई 2024 से हिरासत में हैं। उन पर ईडी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मनचाही कंपनियों को ठेके दिलवाए और इसके बदले कमीशन लिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की एकल पीठ ने की, जिन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।
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करोड़ों की नकदी बरामदगी से जुड़े हैं गंभीर आरोप
जांच की शुरुआत ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की गिरफ्तारी से हुई, जिन्हें ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पकड़ा था। इसके बाद ईडी ने दिल्ली, रांची, पटना और जमशेदपुर में राम और अन्य अभियंताओं के ठिकानों पर छापेमारी की।
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ईडी ने आलम के निजी सचिव संजीव लाल और उनके सेवक जहांगीर आलम के आवासों पर भी छापे मारे। जहांगीर के घर से ₹32 करोड़ नकद बरामद किए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि यह रकम आलमगीर आलम से जुड़ी है और इसे कर्मचारियों के घरों में छुपाकर रखा गया था।
जांच के बाद ईडी ने आलम को पूछताछ के लिए बुलाया और फिर हिरासत में ले लिया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। अब झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका पर दिए जाने वाले निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी हैं।