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Jharkhand: 31 साल बाद HC ने तीन लोगों की रिहाई का दिया आदेश, 200 रुपये के लिए हत्या के मामले में थे दोषी

Fri, 13 Dec 2024 10:53 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 13 Dec 2024 10:53 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने तीन दशक बाद तीन दोषियों को रिहा करने का आदेश जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, इन सभी को 200 रुपये के लिए हत्या करने के मामले में सजा मिली थी। वहीं इस मामले में एक अन्य दोषी लखन पंडित की अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो गई थी।

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Jharkhand HC orders release of 3 convicts sentenced for murder over Rs 200 after 31 years
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को देवघर जिले में 200 रुपये के लिए हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए तीन दोषियों को तीन दशक से अधिक समय बाद रिहा करने का आदेश दिया है। बता दें कि किशुन पंडित, जमादार पंडित और लखी पंडित की तरफ से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने उन्हें जमानत बांड से मुक्त करने का निर्देश दिया और 31 साल की मुकदमेबाजी के बाद मामले से मुक्त कर दिया। जबकि एक अन्य दोषी लखन पंडित की अपील के लंबित रहने के दौरान मृत्यु हो गई थी।
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200 रुपये की मामूली राशि को लेकर हुआ था विवाद
यह मामला 3 दिसंबर 1993 का है, जब जसीडीह थाना क्षेत्र में 200 रुपये की मामूली राशि को लेकर विवाद हुआ था। इस दौरान लखन ने नुनु लाल महतो से खेती के लिए यह राशि उधार ली थी, लेकिन उचित समय के भीतर ऋण चुकाने में विफल रहा। जब महतो ने कर्ज चुकाने के लिए उससे संपर्क किया, तो तनाव बढ़ गया जिसके बाद महतो पर आरोपियों ने कथित तौर पर हमला किया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।
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2000 में नवगठित झारखंड हाईकोर्ट में ट्रांसफर हुआ था केस
इस वारदात के बारे में बताया जाता है कि महतो के बेटे भैरव ने इस पूरी घटना को देखा था। इसके बाद, अभियुक्तों - किशुन पंडित, जमादार पंडित और लखी पंडित - को 6 जून, 1997 को देवघर की सत्र अदालत ने गिरफ्तार कर लिया और दोषी करार दिया। उनकी दोषसिद्धि के बावजूद, मामले को पटना उच्च न्यायालय में अपील किया गया, जिसने अभियुक्तों को जमानत दे दी। वहीं बाद में राज्य के विभाजन के बाद, 2000 में मामले को नवगठित झारखंड उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
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तीन दशकों से अधिक समय तक कानूनी अधर में लटका रहा केस
तब से, यह मामला तीन दशकों से अधिक समय तक कानूनी अधर में लटका रहा। पिछले कई वर्षों में, कार्यवाही में कई देरी हुई, दोषियों को काफी समय तक कानूनी वकील की तरफ से प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। आखिरकार अपीलकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया, जिसके कारण झारखंड उच्च न्यायालय के समक्ष मामले की नए सिरे से सुनवाई हुई। इस अपील पर सुनवाई के बाद अदालत ने दोषियों को उनके जमानत बांड से मुक्त करने का निर्देश दिया, और आजीवन कारावास की सजा को उनके की तरफ से पहले से हिरासत में बिताई गई अवधि में बदल दिया।
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