आईपीएस से राजनेता बने डॉ. अजय कुमार ने टाटानगर में किया था अपराधियों का सफाया
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अजय कुमार के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो पाएंगे कि उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) से शुरू की थी। झाविमो के टिकट पर जमशेदपुर से 2011 का लोकसभा चुनाव लड़कर वे संसद पहुंचे थे। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुए। भाजपा में शामिल हो जाने की अटकलों पर उन्होंने कहा था कि, 'बीजेपी का डीएनए मेरे डीएनए से मिलता नहीं है, इसलिए ऐसा कभी नहीं हो सकता।'
अजय कुमार 2010 से 2014 तक झाविमो में और फिर 2014 से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय हैं। 55 वर्षीय अजय कुमार का जन्म कर्नाटक के मैंगलोर शहर में हुआ था। अजय कुमार के पिता का नाम के.एस. भंडारी और मां का नाम वत्सला है। उनका मूल नाम अजय कुमार भंडारी था और उन्होंने हैदराबाद से स्कूली पढ़ाई पूरी की। 1985 में उन्होंने पुडुचेरी के जवाहर लाल इंस्टीट्यूट से डॉक्टरी की डिग्री हासिल की। 1986 में वे इंडियन पुलिस सर्विस (आईपीएस) के लिए चुने गए।
टाटा स्टील के एमडी के आग्रह पर लालू ने बनाया था जमशेदपुर का एसपी
जमशेदपुर में जब अपराध का ग्राफ काफी बढ़ गया था तब टाटा स्टील के एमडी जेजे ईरानी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से एक सक्षम पुलिस अधिकारी तैनात करने की गुजारिश की ताकि टाटानगर में अपराधियों पर लगाम लगाई जा सके। लालू ने ईरानी के आग्रह पर पटना के सिटी एसपी अजय कुमार को जमशेदपुर का एसपी बनाकर भेजा और बहुत कम समय में उन्होंने अपराध को नियंत्रित कर लिया।
जमशेदपुर में बेतहाशा बढ़े अपराध और अपराधियों पर नकेल कसने से अजय कुमार टाटानगर वासियों के स्टार बन गए। उनकी चर्चा आसपास के शहरों में भी होने लगी और लोग उनकी मिसालें देने लगे। ये अजय कुमार की लोकप्रियता का असर था कि 2011 में जमशेदपुर में लोकसभा उपचुनाव में वे डेढ़ लाख से ज्यादा वोटों से जीते। जमशेदपुर उनके जीवन में बहुत खास स्थान रखता है और जमशेदपुर वासियों के लिए अजय कुमार बहुत खास रहे हैं। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में वे कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जमशेदपुर से हार गए।
लेकिन कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को उनकी संभावनाओं का अहसास था। अजय कुमार कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता के रूप में शानदार और तार्किक ढंग से पार्टी की बात रखने वाले चेहरे के रूप में उभरे और पार्टी आलाकमान के विश्वासपात्र बनते गए। डॉक्टर से आईपीएस अधिकारी बने और उसके बाद राजनीति में पैर जमाने वाले डॉ. अजय कुमार के सामने दोहरी चुनौती है।
एक डॉक्टर के रूप में उन्हें पार्टी संगठन की सर्जरी करनी होगी और आईपीएस के रूप में विरोधी दलों के खिलाफ आक्रामक तेवर अख्तियार करना होगा। इसी यकीन के साथ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अजय कुमार को ये काम सौंपा है।