फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   IAS-IPS are becoming political leaders

नेता बनने के धुन में आईएएस-आईपीएस

Sun, 09 Mar 2014 08:56 PM IST
नीरज सिन्हा/रांची से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
नीरज सिन्हा/रांची से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए Updated Sun, 09 Mar 2014 08:56 PM IST
विज्ञापन
IAS-IPS are becoming political leaders

झारखंड में भी भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अब नेता बनना भाने लगा है। ये अधिकारी नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों में शामिल भी हो रहे हैं।

विज्ञापन


हाल ही में तीन आईपीएस अधिकारियों के चुनावी राजनीति में सक्रिय होने के बाद राज्य की राजनीति में क़यास लगाए जा रहे हैं कि अगली बारी किसकी है। हालांकि इन अधिकारियों के उम्मीदवारी की घोषणा अभी  बाक़ी है।
विज्ञापन


आईपीएस अधिकारियों के अलावा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का राजनीतिक दलों में शामिल होने का सिलसिला भी जारी है।

आइपीएस

IAS-IPS are becoming political leaders

सोमवार को आईएएस विनोद किसपोट्टा कांग्रेस में शामिल हो गए। राजनीति में आने के लिए उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृति ली है। पिछले महीने सेवानिवृत आईएएस अधिकारी मुख़्तयार सिंह भाजपा में शामिल हुए हैं।

आईएएस विमल कीर्ति सिंह के स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने पर भी अटकलों का दौर जारी है। वैसे अभी तक उनकी ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है। अमिताभ चौधरी राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने नौकरी छोड़ दी है। पिछले हफ़्ते वे पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा में शामिल हुए हैं।

वे रांची लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे हैं। इस बीच पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी अरूण उरांव ने भी नौकरी छोड़ने का आवेदन राज्य सरकार को दे दिया है। हाल तक वे झारखंड में आईजी के पद पर थे।

उनके पिता बंदी उरांव, ससुर कार्तिक उरांव व सास सुमति उरांव भी झारखंड में आदिवासियों के बड़े नेता रहे हैं। पत्नी गीताश्री उरांव वर्तमान में झारखंड सरकार में मंत्री हैं।

भाजपा में दिलचस्पी

IAS-IPS are becoming political leaders

अरूण उरांव भाजपा के टिकट पर लोहरदग्गा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहते हैं। पिता, सास-ससुर और पत्नी कांग्रेस से जुड़े रहे हैं तो अरूण उरांव भाजपा से चुनाव क्यों लड़ना चाहते हैं? इस सवाल पर अरूण कहते हैं कि ये उनका व्यक्तिगत फ़ैसला है और अपनी विचारधारा है।

वे बताते हैं कि घर के लोगों को भी इस फ़ैसले पर आपत्ति नहीं है। सार्वजनिक जीवन में कितना समन्वय बना पाएंगे, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मेरे पिता बंदी उरांव भी आईपीएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए थे। राजनीति में उन्होंने काफ़ी लोकप्रियता भी हासिल की।"

अरूण उरांव ने माना कि उन्हें भी इस बात पर भरोसा है कि वे राजनीति मे रहकर जवाबदेह भूमिका निभा सकेंगे। नौकरशाही की राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी पर वे कहते हैं, "प्रोफ़ेशनल्स को राजनीति में आना चाहिए।"

विज्ञापन

अपना- अपना एजेंडा

IAS-IPS are becoming political leaders

इनसे पहले पूर्व डीजीपी भी चुनावी मैदान में आ गए हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक रहे बीडी राम भाजपा में शामिल हो चुके हैं। वे लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

राजनीति में प्रवेश के सवाल पर वे कहते हैं, "देखिए, नौकरीशाही के भीतर राजनीति की ख़ामियों की बातें होती हैं। वे समझते हैं कि राजनीति में भागीदार बनकर चीज़ों को बदलने की कोशिशें करनी चाहिए।"

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक रजत कुमार गुप्ता कहते हैं, "राजनीतिक दलों में नेतृत्व कमज़ोर होने का नतीजा है कि आला अधिकारी पद और छवि के बूते पार्टियों में ऊंची जगह पा रहे हैं। अंतत: यह राजनीतिक दलों को कमज़ोर करता है।"

वे आगे कहते हैं, "इनसे क्या झारखंड की राजनीति में कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे, इस सवाल पर गुप्ता कहते हैं, क़त्तई नहीं, सबका अपना- अपना एजेंडा है।"

राजनीति में अधिकारी

IAS-IPS are becoming political leaders

आजसू पार्टी के वरिष्ठ विधायक पूर्व मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी का मानना है कि चुनाव के ज़रिए राजनीति में प्रवेश यह ज़ाहिर करता है कि अधिकारी मौक़ा देखकर ये राह चुनते हैं। वर्षों तक तपे-तपाए जनप्रतिनिधि का वे विकल्प नहीं बन सकते। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत कहते हैं कि लंबे समय तक नौकरी करने या रिटायरमेंट के बाद अधिकारियों का राजनीति में आना सुनियोजित होता है।

नौकरशाहों का राजनीति में प्रवेश के मुद्दे पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय का कहना है कि सरकारी सेवकों के राजनीति में प्रवेश का मतलब है कि उन्हें भी लोकतांत्रिक ताक़तों का अहसास है। झारखंड में सबसे पहले साल 2004 में डॉ रामेश्वर उरांव भारतीय पुलिस सेवा की नौकरी छोड़कर लोहरदग्गा से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते थे। 2009 में वे चुनाव हार गए।

साल 2009 में ही कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर आईएएस अधिकारी सभापति कुशवाहा चुनाव लड़े थे, लेकिन वे भी हार गए थे। इसके बाद भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे डॉ अजय कुमार झारखंड विकास मोर्चा के टिकट पर 2010 में जमशेदपुर लोकसभा उपचुनाव जीता।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed