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मानव तस्करी के जाल में फंसती आदिवासी युवतियां
नीरज सिन्हा/कोसांबी गांव
Updated Tue, 12 Nov 2013 01:34 PM IST
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अनीता की उम्र महज 14 साल है। सिर से पिता का साया कब उठा, याद नहीं। सितंबर महीने में कथित मानव तस्कर इस आदिवासी बाला को बहला-फुसला कर दिल्ली ले गए थे। दीया सेवा नामक गैर सरकारी संस्था ने दुश्वारियों से बचा तो लिया, लेकिन भविष्य क्या होगा, इस मासूम को नहीं पता।
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उन्हें तो बस इतना भर पता है कि दूसरे के खेतों में दिहाडी मजदूरी करेंगी तो खुद का, बूढी-लाचार मां बिरंग होरो और तीन छोटे भाई-बहनों का पेट भरेगा।
हम उनके गांव गए तो पता चला कि गांव से दूर एक खेत में वो काम करने गई हैं।
पगडंडियों से चलते हम उस खेत तक पहुंचे, जहां अनीता (बदला हुआ नाम) खेत में मजदूरी कर रही थीं।
दर्द भरी कहानी
अनीता झारखंड के खूंटी जिले के सुदूर कोसांबी गांव की हैं। उन्होंने पांचवी तक पढाई की है।
पिछले छह सितंबर को कथित मानव तस्कर अनीता के साथ इसी गांव की एक अन्य लडकी कुसुम (बदला हुआ नाम) को दिल्ली ले गए थे।
अनीता बताती हैं उन्हें प्लेसमेंट एजेंसी के हवाले कर दिया गया। इसके बाद उन्हें नोएडा में किसी के घर में दाई का काम करने भेज दिया गया।
चार अक्टूबर को झारखंड सीआईडी की टीम ने गैरसरकारी संगठन दीया सेवा संस्थान के साथ मिलकर इस युवती को मुक्त कराया।
कुसुम की दास्तां भी दर्द भरी हैं। उम्र 17 साल। आठवीं तक पढी हैं।
मां के निधन के बाद पढाई छोडनी पडी। पिता बीरबल बडाइक की काया ऐसी नहीं, जो परिश्रम कर सकें।
बडे भाई मजदूरी करते हैं, छोटा भाई गुनु पिता की देखभाल करता है। छोटा सा खपरैल का घर। अभाव में गुजरती जिंदगी। सुबह-शाम खाना पकाना, घर के बर्तन धोना और दिन भर खेतों में काम करना।
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फर्क इतना भर है कि कुसुम के अपने कुछ खेत हैं।
दिल्ली से जुडे तस्करी के तार
कुसुम के पिता बीरबल बडाइक बताते हैं कि उन्हें किसी ने बताया कि दीया सेवा संस्थान के बैद्यनाथ कुमार से मिलें, वो आपकी मदद करेंगे।
इसके बाद वे बैद्यनाथ से मिले। फिर उन्होंने सीआईडी के आईजी से मिलकर बेटी को बहला-फुसला कर ले जाने की लिखित शिकायत सौंपी।
बैद्यनाथ बताते हैं कि वो सीआईडी के आईजी अनुराग गुप्ता से मिले। दिल्ली से दोनों युवतियों को मुक्त कराने के लिए पुलिस टीम भेजने का अनुरोध किया।
तब आईजी ने पुलिस की एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजी। दिल्ली पुलिस की मदद से दोनों युवतियों को मुक्त कराया गया।
साहबेगंज की रहने वाली रीना (बदला हुआ नाम) भी 29 अक्तूबर को झारखंड लौट आई हैं। हाल ही में दिल्ली में रीना को गंभीर स्थिति में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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जिस घर में वो दाई का काम करती थीं, वहां उन्हें बुरे तरीके से प्रताडित किया गया था।
रीना समेत आठ बच्चियां दिल्ली से मुक्त कराकर झारखंड लाई गई हैं।
झारखंड लौटने पर रीना ने इतना भर कहा, "ताउम्र जख्मों को नहीं भूल पाऊंगी"।
मानव तस्करी के खिलाफ फैलते कारोबार के खिलाफ काम करने वाले बैद्यनाथ कुमार कहते हैं, "महानगरों से मुक्त कराए गए बच्चे-बच्चियों को नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए पर्याप्त मदद की जरूरत है।"
तस्करी का फैलता जाल
2001 से जून 2013 तक राज्य में मानव तस्करी के 254 मामले दर्ज किए गए हैं। ये रिपोर्ट झारखंड सीआईडी की है। अब तक 179 मामलों में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किए हैं। लेकिन अभी भी 66 मामले लंबित हैं।
यहां गौर करने लायक बात यह है कि अधिकतर मामलों में एक से ज्यादा बच्चों को बाहर ले जाने की प्राथमिकी दर्ज की गई है। साल दर साल दर्ज मामलों की संख्या बढ रही है।
साल 2001 में राज्य भर में मानव तस्करी के सिर्फ दो मामले दर्ज किए गए थे। वहीं 2012 में यह तस्करी के मामलों की संख्या बढकर 76 हो गई। इस साल जून के आखिर तक 48 मामले विभिन्न जिलों में दर्ज किए गए हैं।
मानव तस्करी के सबसे ज्यादा मामले जनजातीय बहुल इलाके रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, साहेबगंज में दर्ज किए गए हैं। झारखंड की सीआईडी रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अब तक 444 युवक-युवतियों को महानगरों से मुक्त कराया है।
दीया सेवा संस्थान का दावा है कि महानगरों से उसने 110 युवतियों और 15 युवकों को मुक्त कराया है। दूसरे गैर सरकारी संगठनों ने भी कई बच्चों को मुक्त कराया है।
क्या कर रही है सीआइडी?
अनुराग गुप्ता बताते हैं कि मानव व्यापार रोकने और कथित एजेंटों व प्लेसमेंट एजेंसियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
एक विशेष टीम गठित गई है, जो दर्ज मामलों के साथ गैर सरकारी संगठनों की सूचनाओं पर भी कार्रवाई करने में जुटी है।
आईजी के मुताबिक इसके परिणाम भी बेहतर मिल रहे हैं। हालांकि अंतरराज्यीय मामलों के कारण बचाव में कई कठिनाइयों का सामना करना पडता है।
सीआईडी झारखंड ने 10 सितंबर को डीसीपी क्राइम ब्रांच दिल्ली को 240 कथित एजेंट और प्लेसमेंट एजेंसियों की सूची भेजी है।
अपराध अनुसंधान विभाग को यह सूची गैर सरकारी संगठन दीया सेवा संस्थान ने दिल्ली जाकर की गई छानबीन के बाद सौंपी हैं।
इस बीच समाज कल्याण विभाग झारखंड सरकार के सचिव राजीव अरूण एक्का का कहना है कि वे मानव व्यापार को रोकने तथा मुक्त कराए गए बच्चों को मदद करने की पहल में जुटे हैं।
इसमें गैर सरकारी संस्थाओं की भी मदद ली जाएगी।