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झारखंड में हाथियों का आतंक: 35 के झुंड ने घेरा इलाका, चापाकल उखाड़ा और घर-अंगनबाड़ी को तोड़ा
Sun, 01 Nov 2026 07:00 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Sun, 01 Nov 2026 07:00 PM IST
सार
हजारीबाग के जंगलों से निकले 35 जंगली हाथियों के झुंड ने दारू प्रखंड के पिपचो और चिरुवां इलाके में दहशत फैला दी है। आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण डर के साये में रात गुजार रहे हैं।
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हाथी। फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हजारीबाग के जंगलों से बाहर निकले 35 जंगली हाथियों के विशाल झुंड ने आबादी वाले क्षेत्रों में दहशत फैला दी है। बगोदर और टाटीझरिया के रास्ते दारूडीह और पिपचो के जंगलों से होकर यह झुंड दारू प्रखंड के पिपचो और चिरुवां इलाकों में पहुंच गया है।
इस झुंड की मौजूदगी के कारण आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण खौफ में रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को डर है कि हाथियों का यह विशाल समूह किसी भी समय सीधे रिहाइशी बस्तियों में प्रवेश कर भारी तबा तबाही मचा सकता है।
एक हाथी ने मचाया उत्पात
हाथियों के इस बड़े झुंड के पहुंचने से ठीक पहले, 31 अक्तूबर की रात समूह से बिछड़े एक अकेले हाथी ने पिपचो और चिरुवां गांवों में जमकर तबाही मचाई। इस हाथी ने पिपचो गांव में स्थित देवी मंडप परिसर में लगे चापाकल को जड़ से उखाड़ दिया। इसके अलावा, हाथी ने स्थानीय निवासी महेश राम के घर और पास के आंगनबाड़ी केंद्र के मुख्य दरवाजे को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
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विद्यालय परिसर को पहुंचाया नुकसान
उपद्रवी हाथी ने चिरुवां गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बड़वार इरगा को भी निशाना बनाया। अगले दिन सुबह जब विद्यालय प्रशासन ने कार्यालय का ताला खोला, तो चारों तरफ नुकसान की तस्वीरें सामने आईं। हाथी ने विद्यालय के कार्यालय और विभिन्न कक्षाओं की खिड़कियों को तोड़ दिया था। कमरों के अंदर रखा शैक्षणिक और अन्य आवश्यक सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त पाया गया।
ये भी पढे़ं-बिहार: बेल्ट्रॉन कर्मियों का प्रदर्शन, राज्यकर्मी का दर्जा मांग रहे कर्मचारी; पुलिस ने रोका तो हंगामा
क्षेत्र में वन विभाग का दस्ता तैनात
इलाके में मंडरा रहे 35 हाथियों के झुंड को सुरक्षित तरीके से रिहाइशी इलाकों से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग की दो टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है। वनपाल मुकेश कुमार के अनुसार, विभाग की पहली प्राथमिकता हाथियों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए घने जंगलों की तरफ मोड़ना है, ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। ग्रामीणों ने मांग की है कि संवेदनशील गांवों में लगातार गश्त की जाए।
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इस झुंड की मौजूदगी के कारण आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण खौफ में रात गुजारने को मजबूर हैं। ग्रामीणों को डर है कि हाथियों का यह विशाल समूह किसी भी समय सीधे रिहाइशी बस्तियों में प्रवेश कर भारी तबा तबाही मचा सकता है।
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एक हाथी ने मचाया उत्पात
हाथियों के इस बड़े झुंड के पहुंचने से ठीक पहले, 31 अक्तूबर की रात समूह से बिछड़े एक अकेले हाथी ने पिपचो और चिरुवां गांवों में जमकर तबाही मचाई। इस हाथी ने पिपचो गांव में स्थित देवी मंडप परिसर में लगे चापाकल को जड़ से उखाड़ दिया। इसके अलावा, हाथी ने स्थानीय निवासी महेश राम के घर और पास के आंगनबाड़ी केंद्र के मुख्य दरवाजे को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।
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विद्यालय परिसर को पहुंचाया नुकसान
उपद्रवी हाथी ने चिरुवां गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय बड़वार इरगा को भी निशाना बनाया। अगले दिन सुबह जब विद्यालय प्रशासन ने कार्यालय का ताला खोला, तो चारों तरफ नुकसान की तस्वीरें सामने आईं। हाथी ने विद्यालय के कार्यालय और विभिन्न कक्षाओं की खिड़कियों को तोड़ दिया था। कमरों के अंदर रखा शैक्षणिक और अन्य आवश्यक सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त पाया गया।
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क्षेत्र में वन विभाग का दस्ता तैनात
इलाके में मंडरा रहे 35 हाथियों के झुंड को सुरक्षित तरीके से रिहाइशी इलाकों से दूर खदेड़ने के लिए वन विभाग की दो टीमों ने मोर्चा संभाल लिया है। वनपाल मुकेश कुमार के अनुसार, विभाग की पहली प्राथमिकता हाथियों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए घने जंगलों की तरफ मोड़ना है, ताकि किसी प्रकार की जनहानि न हो। ग्रामीणों ने मांग की है कि संवेदनशील गांवों में लगातार गश्त की जाए।