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एनआईटी में एक और खुदकुशी, छात्रा ने लगाई फांसी

Mon, 18 Feb 2013 03:47 PM IST
जमशेदपुर/इंटरनेट डेस्क
जमशेदपुर/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 18 Feb 2013 03:47 PM IST
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girl commit suicide in nit

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर की छात्रा नमिता कुमारी ने हॉस्टल के कमरे में दुपट्टे से लटककर आत्महत्या कर ली। नमिता इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की द्वितीय वर्ष की छात्रा थीं। आत्महत्या का कारण पता नहीं चल पाया है।

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नमिता अम्बेडकर गर्ल्स हॉस्टल के रूम नंबर 203 (फर्स्ट फ्लोर) में रहती थी। घटना रविवार को उस समय हुई जब एनआईटी परिसर में सालाना समारोह उत्कर्ष-2013 का समापन होने वाला था। एनआईटी के प्रवक्ता मलय नीरज ने बताया कि नमिता ने शनिवार को उत्कर्ष में भाग लिया था। रविवार सुबह भी उसने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, लेकिन दोपहर में खाना खाने के बाद वह कमरे से नहीं निकली।  
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इस पर शाम को जब आठ बजे नमिता की रूम मेट स्वाति और पिंकी उसे कमरे में ढूंढने पहुंची तो दरवाजा अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने शोर मचाया। शोर सुन कर वार्डेन डॉ. प्रभा चंद्रा पहुंची, उन्होंने मैस ब्वॉय और कुछ स्टूडेंट्स की सहायता से दरवाजे को तुड़वाया तो अंदर नमिता पंखे से लटकी हुई मिली। इसकी जानकारी संस्थान के निदेशक प्रो. रामबाबू कोडाली को दी गई। इस आत्महत्या का कारण प्रेम संबंध होने की आशंका भी जतायी जा रही है।
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संस्थान से रात लगभग 8.30 बजे नमिता को टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नमिता हजारीबाग की रहने वाली थी। उसके पिता कुलपति लाल दास व परिजनों को फोन पर सूचना दे दी गई है। वह जमशेदपुर के लिए रवाना हो चुके हैं। नमिता के स्थानीय अभिभावक उसके चाचा-चाची टीएमएच पहुंचे और निदेशक रामबाबू कोदाली सहित अन्य अधिकारियों से बातचीत की।

प्रबंधन द्वारा एनआईटी में विद्यार्थियों को इस घटना के बारे में देर रात तक नहीं बताया गया ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति सेबचा जा सके। हालांकि धीरे-धीरे यह सूचना विद्यार्थियों को मिलने लगी। 'उत्कर्ष' के दूसरे दिन रॉक कंसर्ट में यूफोरिया के  पलाश सेन अपना कार्यक्रम पेश करने वाले थे। घटना के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

पहले भी हुई हैं मौतें
गौरतलब है कि संस्थान में इस तरह की घटनायें पहले भी हो चुकी हैं। साल 2009 में संस्थान के सालाना समारोह के दौरान कैम्पस में लगाए गए फव्वारे में एक छात्र ने छलांग लगा दी थी। उसे बचाने के दौरान दो छात्रों की मौत हो गई थी। वहीं, साल 2010 में खरकई नदी के चेक डैम के पास डूबने से तीन छात्रों की मौत हो गयी थी। 2011 में यहीं के करातू चौधरी ने अपने छात्रावास में आत्महत्या कर ली थी।


हाईकोर्ट ने मांगा है जवाब
एनआईटी में स्टूडेंट्स की आत्महत्या से संबंधित मामलों में झारखंड हाईकोर्ट ने मानव संसाधन मंत्रालय से 26 फरवरी तक जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने 30 जनवरी को कहा था कि आत्महत्या का कारण चाहे जो भी हो, लेकिन यह गंभीर मामला है। विद्यार्थी आत्महत्या क्यों कर रहे हैं, इसकी विशेषज्ञों से जांच कराई जानी चाहिए। क्या तकनीकी संस्थानों के नियंत्रण को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कोई नियम बनाये हैं या दिशा निर्देश दिये हैं? मंत्रालय को इस बिंदु पर जवाब देने के लिये कहा गया है।

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