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यहां 10 पैसे में चाय-समोसा, 50 पैसे में भरपेट खाना
इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 05 Aug 2013 11:27 AM IST
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मिल सकता है। तब से लोग यह सोचने लगे हैं कि क्या वाकई किसी जगह इतना सस्ता
खाना मिल सकता है।
हम आपको बता रहे हैं ऐसी जगह के बारे में जहां आज की 10 पैसे की चाय और 10 पैसे में समोसे मिलते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां 50 सालों से दाम नहीं बढ़े हैं।
आलू चॉप 10 पैसे में। समोसा 10 पैसे में। ऐसे ही प्याजी, चाय या नमकीन सबकी कीमत 10-10 पैसे। यहां तक कि दाल, चावल, सब्जी, पापड़, अचार यानी भरपेट भोजन सिर्फ 50 पैसे में।
यह है झारखंड की हेवी इंजीनयिरिंग कॉपरेरेशन यानी एचईसी की कैंटीन का रेट चार्ट। जहां कर्मचारियों को घर से खाना लाना मना है।
एचईसी की स्थापना के दौरान ही फैक्ट्री में कैंटीन की व्यवस्था की गई। तब से आज तक महंगाई ने भले दुनिया को परेशान कर रखा हो, लेकिन कैंटीन इससे बेअसर ही रखी गई।
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सिर्फ एक बार भोजन के रेट बढ़ने को छोड़कर। फैक्ट्री के कर्मचारियों को कैंटीन से खरीदारी के लिए 50 पैसे के कूपन दिए जाते हैं। इन्हीं कूपनों की संख्या के आधार पर प्रबंधन उनके मासिक वेतन से रकम काट लेता है।
दो हजार के लिए व्यवस्था
फैक्ट्री में करीब दो हजार लोग काम करते हैं। और इनके खाने की व्यवस्था 30 खानसामों के हाथ में है। ये हर दिन सुबह से ही जुट जाते हैं, ताकि इतने लोगों की व्यवस्था कर सकें।
दोपहर को 12 बजे से ढाई बजे तक खाने का समय होता है। कैंटीन में कर्मचारियों को घर से टिफिन लाने की इजाजत नहीं है।
हम आपको बता रहे हैं ऐसी जगह के बारे में जहां आज की 10 पैसे की चाय और 10 पैसे में समोसे मिलते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यहां 50 सालों से दाम नहीं बढ़े हैं।
आलू चॉप 10 पैसे में। समोसा 10 पैसे में। ऐसे ही प्याजी, चाय या नमकीन सबकी कीमत 10-10 पैसे। यहां तक कि दाल, चावल, सब्जी, पापड़, अचार यानी भरपेट भोजन सिर्फ 50 पैसे में।
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यह है झारखंड की हेवी इंजीनयिरिंग कॉपरेरेशन यानी एचईसी की कैंटीन का रेट चार्ट। जहां कर्मचारियों को घर से खाना लाना मना है।
एचईसी की स्थापना के दौरान ही फैक्ट्री में कैंटीन की व्यवस्था की गई। तब से आज तक महंगाई ने भले दुनिया को परेशान कर रखा हो, लेकिन कैंटीन इससे बेअसर ही रखी गई।
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सिर्फ एक बार भोजन के रेट बढ़ने को छोड़कर। फैक्ट्री के कर्मचारियों को कैंटीन से खरीदारी के लिए 50 पैसे के कूपन दिए जाते हैं। इन्हीं कूपनों की संख्या के आधार पर प्रबंधन उनके मासिक वेतन से रकम काट लेता है।
दो हजार के लिए व्यवस्था
फैक्ट्री में करीब दो हजार लोग काम करते हैं। और इनके खाने की व्यवस्था 30 खानसामों के हाथ में है। ये हर दिन सुबह से ही जुट जाते हैं, ताकि इतने लोगों की व्यवस्था कर सकें।
दोपहर को 12 बजे से ढाई बजे तक खाने का समय होता है। कैंटीन में कर्मचारियों को घर से टिफिन लाने की इजाजत नहीं है।