विधानसभा अध्यक्ष के गांव का किसान जीते जी तरसता रहा, मरने के बाद प्रशासन ने 200 किलो चावल पहुंचाया

टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Thu, 07 Dec 2017 06:44 PM IST
किसान बुद्दु उरावं के शव के साथ परिजन
किसान बुद्दु उरावं के शव के साथ परिजन
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झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष दिनेश उरांव के गांव के एक किसान ने सरकारी उदासीनता से दुखी होकर खुदकुशी कर ली। बुद्दु उरांव अपने खेत में करीब 200 मन धान जल जाने से हताश था। उसके जीते जी प्रशासन उसकी कोई मदद नहीं कर पाया, हालांकि उसके मर जाने के बाद प्रशासन ने 200 किलो चावल उसके घर पहुंचाया। 
ये घटना हुई है झारखंड में गुमला जिले के सिसई थाना स्थित मुरगू नकटीटोली कामता गांव की है। खबरों के मुताबिक 55 साल के बुद्दु उरांव के खलिहाल में चार दिसंबर को आग लग गई और आग में करीब 280 मन धान जल गया था। इस धान की कीमत करीब दो लाख रुपये थी। काफी मशक्कत के बाद पैसे जमाकर उसने खेती में पैसे लगाए थे। खून पसीने की मेहनत जलकर खाक हो जाने से बुद्दु हताश हो गया था। 

बुद्दु उरांव के सामने पैसों की तंगी पैदा हो गई थी। उसने सरकार से मुआवजे की मांग की थी, लेकिन प्रशासन ने उसकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया। परिवार चलाने की चिंता ने उसे इतना परेशान कर दिया कि उसने कुएं में कूदकर अपनी जान ली।  

बुद्दु किसान की खुदकुशी के बाद अनेक सियासी दलों के नेता उसके गांव पहुंचने लगे। नेता ने किसान की मौत पर चिंता प्रकट कर रस्म अदायगी भी की। विधानसभा स्पीकर दिनेश उरांव भी गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मिले और 10 हजार रुपए की सहायता राशि दी। 

स्पीकर दिनेश उराव ने कहा कि, 'धान जलना एक दुर्घटना है। झारखंड विधानसभा के आगामी सत्र में धान जलने की दुर्घटना का मुद्दा उठाऊंगा, जिससे आपदा के तहत पीड़ित को मुआवजा मिल सके।'

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