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जेटीईटी प्रवेश पत्र में गलतियां: फोटो व हस्ताक्षर गायब, अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, जैक से मिला आश्वासन
Mon, 26 Oct 2026 07:11 PM IST
राहुल कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, रांची।
अमर उजाला ब्यूरो, रांची।
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 26 Oct 2026 07:11 PM IST
सार
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीईटी) से पहले प्रवेश पत्र में सामने आई खामियों ने हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। किसी का विषय बदल गया है, तो किसी के प्रवेश पत्र से फोटो और हस्ताक्षर गायब हैं। अभ्यर्थियों का दावा है कि इन गड़बड़ियों से करीब 10 से 12 हजार उम्मीदवार प्रभावित हो सकते हैं।
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Jharkhand TET
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीईटी) के प्रवेश पत्र जारी होने के बाद अभ्यर्थियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। परीक्षा से ठीक पहले प्रवेश पत्र में विषय चयन की गड़बड़ी, गलत शिक्षक विषय दर्ज होने और फोटो व हस्ताक्षर गायब रहने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। इन त्रुटियों के कारण राज्यभर में लगभग 10 से 12 हजार अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। अपनी समस्याओं को लेकर सोमवार को विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची स्थित झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) कार्यालय पहुंचे। अभ्यर्थियों को चिंता है कि प्रवेश पत्र में दर्ज खामियों के कारण उनकी शिक्षक नियुक्ति की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
विकल्पों में बदलाव से बढ़ी परेशानी
अभ्यर्थियों के अनुसार, वर्ष 2024 और 2026 में आवेदन करते समय विषय चयन के लिए विज्ञान और सामाजिक अध्ययन (एसएसटी) के ही दो विकल्प दिए गए थे। कला संकाय के अभ्यर्थियों ने उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर एसएसटी चुना था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाद में संशोधन के दौरान विषय चयन में तीसरा विकल्प 'भाषा' जोड़ा गया, लेकिन इस बदलाव की स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं मिली। जिन अभ्यर्थियों को अपने पहले भरे गए फॉर्म में कोई त्रुटि नहीं लगी, उन्होंने संशोधन नहीं किया। अब प्रवेश पत्र मिलने के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि दर्ज विषय उनकी तैयारी से मेल नहीं खा रहा।
प्रवेश पत्र की त्रुटियां और सत्यापन का डर
प्रवेश पत्र में हिंदी, अंग्रेजी या अन्य भाषा विषयों के स्थान पर 'सोशल स्टडीज टीचर' अंकित कर दिया गया है। वहीं कई अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र से फोटो और हस्ताक्षर गायब हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बावजूद यह गड़बड़ी हुई है। अभ्यर्थियों को आशंका है कि यदि प्रवेश पत्र में दर्ज विषय और उनकी वास्तविक पात्रता के बीच अंतर रहा, तो परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी प्रमाण पत्र मिलने या भविष्य में शिक्षक नियुक्ति के दौरान दस्तावेज सत्यापन में अड़चन आ सकती है।
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जैक कार्यालय पर प्रदर्शन
अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बोकारो, हजारीबाग, लातेहार, दुमका, पाकुड़ और गुमला समेत कई जिलों के अभ्यर्थी सोमवार सुबह छह बजे से ही जैक कार्यालय के बाहर जमा थे। परीक्षा निकट होने के कारण वे प्रवेश पत्र में जल्द सुधार की मांग कर रहे थे। इस दौरान अभ्यर्थियों ने जैक सचिव एसडी तिग्गा के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि संतोषजनक जवाब देने के बजाय उन्हें पुलिस बुलाकर बाहर निकलवाने की धमकी दी गई। हालांकि, इस आरोप पर सचिव का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।
प्रतिनिधिमंडल को मिला लिखित आश्वासन
विरोध के बाद पांच महिला और पांच पुरुष अभ्यर्थियों के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से वार्ता की। प्रतिनिधिमंडल ने विकल्प बदलाव की जानकारी न मिलने, गलत विषय दर्ज होने और फोटो व हस्ताक्षर गायब होने का मुद्दा उठाया। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अभ्यर्थी फिलहाल जारी प्रवेश पत्र के आधार पर ही 1 नवंबर को परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सत्यापन के समय आवश्यक सुधार कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग पर अधिकारियों ने उन्हें लिखित आश्वासन और आवेदनों की प्राप्ति रसीद भी उपलब्ध कराई।
आधिकारिक विज्ञप्ति की मांग
अभ्यर्थी अब जैक से इस पूरे मामले पर आधिकारिक विज्ञप्ति जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिषद अपनी वेबसाइट पर विकल्पों में हुए बदलाव और सुधार प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दे। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि जिन परीक्षार्थियों ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर फॉर्म भरा था और सूचना के अभाव में संशोधन नहीं कर सके, उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए।
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विकल्पों में बदलाव से बढ़ी परेशानी
अभ्यर्थियों के अनुसार, वर्ष 2024 और 2026 में आवेदन करते समय विषय चयन के लिए विज्ञान और सामाजिक अध्ययन (एसएसटी) के ही दो विकल्प दिए गए थे। कला संकाय के अभ्यर्थियों ने उस समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर एसएसटी चुना था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बाद में संशोधन के दौरान विषय चयन में तीसरा विकल्प 'भाषा' जोड़ा गया, लेकिन इस बदलाव की स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं मिली। जिन अभ्यर्थियों को अपने पहले भरे गए फॉर्म में कोई त्रुटि नहीं लगी, उन्होंने संशोधन नहीं किया। अब प्रवेश पत्र मिलने के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि दर्ज विषय उनकी तैयारी से मेल नहीं खा रहा।
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प्रवेश पत्र की त्रुटियां और सत्यापन का डर
प्रवेश पत्र में हिंदी, अंग्रेजी या अन्य भाषा विषयों के स्थान पर 'सोशल स्टडीज टीचर' अंकित कर दिया गया है। वहीं कई अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र से फोटो और हस्ताक्षर गायब हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के बावजूद यह गड़बड़ी हुई है। अभ्यर्थियों को आशंका है कि यदि प्रवेश पत्र में दर्ज विषय और उनकी वास्तविक पात्रता के बीच अंतर रहा, तो परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी प्रमाण पत्र मिलने या भविष्य में शिक्षक नियुक्ति के दौरान दस्तावेज सत्यापन में अड़चन आ सकती है।
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जैक कार्यालय पर प्रदर्शन
अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बोकारो, हजारीबाग, लातेहार, दुमका, पाकुड़ और गुमला समेत कई जिलों के अभ्यर्थी सोमवार सुबह छह बजे से ही जैक कार्यालय के बाहर जमा थे। परीक्षा निकट होने के कारण वे प्रवेश पत्र में जल्द सुधार की मांग कर रहे थे। इस दौरान अभ्यर्थियों ने जैक सचिव एसडी तिग्गा के व्यवहार पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि संतोषजनक जवाब देने के बजाय उन्हें पुलिस बुलाकर बाहर निकलवाने की धमकी दी गई। हालांकि, इस आरोप पर सचिव का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।
प्रतिनिधिमंडल को मिला लिखित आश्वासन
विरोध के बाद पांच महिला और पांच पुरुष अभ्यर्थियों के दस सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से वार्ता की। प्रतिनिधिमंडल ने विकल्प बदलाव की जानकारी न मिलने, गलत विषय दर्ज होने और फोटो व हस्ताक्षर गायब होने का मुद्दा उठाया। बातचीत के दौरान अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि अभ्यर्थी फिलहाल जारी प्रवेश पत्र के आधार पर ही 1 नवंबर को परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सत्यापन के समय आवश्यक सुधार कर दिया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग पर अधिकारियों ने उन्हें लिखित आश्वासन और आवेदनों की प्राप्ति रसीद भी उपलब्ध कराई।
आधिकारिक विज्ञप्ति की मांग
अभ्यर्थी अब जैक से इस पूरे मामले पर आधिकारिक विज्ञप्ति जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिषद अपनी वेबसाइट पर विकल्पों में हुए बदलाव और सुधार प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दे। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि जिन परीक्षार्थियों ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर फॉर्म भरा था और सूचना के अभाव में संशोधन नहीं कर सके, उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए।