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अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज का केंद्र और झारखंड सरकार पर बड़ा आरोप, जानें क्या है मामला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Updated Mon, 15 Jan 2018 06:35 PM IST
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ज्यां द्रेज
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योजना आयोग के सदस्य रह चुके अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने केंद्र और झारखंड सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। द्रेज ने कहा है कि, 'आधार' सीडिंग का लक्ष्य पूरा करने के लिए राज्यों के अधिकारी महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बने लोगों के जॉब कार्ड और राशन कार्ड को रद्द कर रहे हैं। द्रेज ने इसे गैरकानूनी बताया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि आधार कार्ड को आधार बनाकर लोगों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने से मना नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद राज्य सरकार के अधिकारी आम लोगों से उनका अधिकार छीन रही है। लोगों को सरकारी दुकान से राशन नहीं मिल रहा, मनरेगा में मजदूरी करने वालों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। यहां तक की ऐसे लोग की भी बड़ी तादाद है जिन्हें पेंशन तक नहीं मिल पा रहा।
ज्यां द्रेज ने सोमवार को रांची के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोसल सर्विस (XISS) में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। द्रेज ने मीडिया को बताया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान झारखंड में कम से कम चार लोगों की भूख से मौत हुई है। इसमें संतोषी कुमारी, रूपलाल मरांडी, प्रेमनी कुंवर और इतवारिया देवी के नाम शामिल हैं। द्रेज ने इन मौतों के लिए झारखंड सरकार और आधार नंबर जारी करनेवाली संस्था यूआईडीएआई की लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। द्रेज का दावा है कि इन मामलों में यह साबित हो चुका है कि यह मौतें 'आधार' सीडिंग नहीं होने की वजह से राशन नहीं मिलने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अभाव में हुई हैं।
ज्यां द्रेज ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में 'आधार' को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी वजह से पिछड़े वर्ग की बड़ी आबादी भोजन और पेंशन के अधिकार से वंचित हो रही है। झारखंड सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। यूआईडीएआई भी अधिकारियों की लापरवाही पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इसकी वजह से समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
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ज्यां द्रेज ने सोमवार को रांची के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोसल सर्विस (XISS) में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। द्रेज ने मीडिया को बताया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान झारखंड में कम से कम चार लोगों की भूख से मौत हुई है। इसमें संतोषी कुमारी, रूपलाल मरांडी, प्रेमनी कुंवर और इतवारिया देवी के नाम शामिल हैं। द्रेज ने इन मौतों के लिए झारखंड सरकार और आधार नंबर जारी करनेवाली संस्था यूआईडीएआई की लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। द्रेज का दावा है कि इन मामलों में यह साबित हो चुका है कि यह मौतें 'आधार' सीडिंग नहीं होने की वजह से राशन नहीं मिलने और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अभाव में हुई हैं।
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ज्यां द्रेज ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में 'आधार' को अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी वजह से पिछड़े वर्ग की बड़ी आबादी भोजन और पेंशन के अधिकार से वंचित हो रही है। झारखंड सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही। यूआईडीएआई भी अधिकारियों की लापरवाही पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इसकी वजह से समस्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
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जमीनी तहकीकात से हुआ साफ, नहीं हुआ फर्जीवाड़ा
हालांकि सरकार सभी योजनाओं को 'आधार' से जोड़ने के अभियान को बड़ी सफलता बता रही है। ज्यां द्रेज ने एक प्रेस रिलीज जारी किया। जिसके मुताबिक ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने स्वीकार किया है कि मनरेगा के तहत जारी जॉब कार्ड को 100 फीसदी आधार से जोड़ने के लक्ष्य हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर जॉब कार्ड रद्द कर दिए गए। द्रेज ने कहा कि अप्रैल 2017 में केंद्र सरकार ने दावा किया कि आधार से जोड़ने के कारण करीब एक करोड़ ‘फर्जी जॉब कार्ड’ पकड़े गए और उन्हें रद्द कर दिया गया।
हालांकि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि 12.6 फीसदी कार्ड रद्द ‘फर्जी’ या ‘डुप्लीकेट’ थे। इसमें जॉब कार्ड की संख्या 1 फीसदी थी। रिलीज के मुताबिक 22 दिसंबर 2017 को झारखंड सरकार ने दावा किया कि आधार की वजह से 11 लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए और उन्हें रद्द कर दिया गया। लेकिन लातेहार और खूंटी में इसका सत्यापन किया गया तो पाया गया कि रद्द किए गए ज्यादतर राशन कार्ड फर्जी नहीं थे। बड़ी संख्या में ऐसे राशन कार्ड मिले जो परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड से लिंक नहीं थे।
इसी तरह पेंशन के मामले में भी ज्यां द्रेज ने आंकड़ों के आधार पर कई बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में दावा किया कि आधार की मदद से 2 लाख ऐसे लोगों का खुलासा हुआ है जो फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे थे। खूंटी में करीब 100 लोगों का सत्यापन किया गया तो पाया गया कि कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है। अधिकांश लोगों ने अपनी पेंशन को आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया था।
द्रेज ने बताया कि अक्तूबर 2016 में खूंटी में जिला प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत उन लोगों को मिलने वाली पेंशन का भुगतान बंद कर दिया जिन्होंने अपने खाते को आधार से लिंक नहीं करवाया था। बाद में कुछ लोगों ने पेंशन को आधार से लिंक करवा लिया, तो उनकी पेंशन शुरू हो गई। लेकिन जो लोग ऐसा करने में नाकाम रहे वे पेंशन के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं।
हालांकि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि 12.6 फीसदी कार्ड रद्द ‘फर्जी’ या ‘डुप्लीकेट’ थे। इसमें जॉब कार्ड की संख्या 1 फीसदी थी। रिलीज के मुताबिक 22 दिसंबर 2017 को झारखंड सरकार ने दावा किया कि आधार की वजह से 11 लाख फर्जी राशन कार्ड पकड़े गए और उन्हें रद्द कर दिया गया। लेकिन लातेहार और खूंटी में इसका सत्यापन किया गया तो पाया गया कि रद्द किए गए ज्यादतर राशन कार्ड फर्जी नहीं थे। बड़ी संख्या में ऐसे राशन कार्ड मिले जो परिवार के अन्य सदस्यों के आधार कार्ड से लिंक नहीं थे।
इसी तरह पेंशन के मामले में भी ज्यां द्रेज ने आंकड़ों के आधार पर कई बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में दावा किया कि आधार की मदद से 2 लाख ऐसे लोगों का खुलासा हुआ है जो फर्जी तरीके से पेंशन ले रहे थे। खूंटी में करीब 100 लोगों का सत्यापन किया गया तो पाया गया कि कोई फर्जीवाड़ा नहीं हुआ है। अधिकांश लोगों ने अपनी पेंशन को आधार कार्ड से लिंक नहीं कराया था।
द्रेज ने बताया कि अक्तूबर 2016 में खूंटी में जिला प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत उन लोगों को मिलने वाली पेंशन का भुगतान बंद कर दिया जिन्होंने अपने खाते को आधार से लिंक नहीं करवाया था। बाद में कुछ लोगों ने पेंशन को आधार से लिंक करवा लिया, तो उनकी पेंशन शुरू हो गई। लेकिन जो लोग ऐसा करने में नाकाम रहे वे पेंशन के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं।