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Jharkhand: 'तकनीक के जरिए हर दरवाजे तक न्याय पहुंचाने की कोशिश', झारखंड में बोले सीजेआई चंद्रचूड़

Wed, 24 May 2023 08:09 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: Jeet Kumar Updated Wed, 24 May 2023 08:09 PM IST
सार

सीजेआई ने कहा कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से, हम हर घर में न्याय करने की कोशिश कर रहे हैं। ई-अदालतों के तीसरे चरण के तहत, भारत सरकार द्वारा 7,000 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं।

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CJI DY Chandrachud said Trying to take justice to every door through technology
सीजेआई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन के उद्घाटन के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायपालिका तकनीक के इस्तेमाल से हर घर तक न्याय पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। भवन का उद्घाटन बुधवार को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने किया।

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मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ पहले भी कई बार अपने संबोधन में तकनीक की बात कर चुके हैं। उन्होंने न्यायिक कार्यवाही के सीधे प्रसारण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि स्थानीय भाषाओं में आदेशों का अनुवाद करके देश के गांवों तक न्याय पहुंचाया जा सकता है।
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सीजेआई ने कहा कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से, हम हर घर में न्याय करने की कोशिश कर रहे हैं। ई-अदालतों के तीसरे चरण के तहत, भारत सरकार द्वारा 7,000 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। प्रौद्योगिकी के माध्यम से, न्यायिक कार्य को आम जीवन से जोड़ा जा सकता है।
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न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका 6.4 लाख गांवों में न्याय ले सकती है, जब अदालत का काम संविधान में उल्लिखित भाषाओं में किया जाता है। उन्होंने कहा कि 6,000 अदालती आदेशों का हिंदी में अनुवाद किया गया।

आगे उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मेरी यात्रा ने न्याय और अन्याय की छवि को परिभाषित करने में मदद की है। छोटे-मोटे अपराधों के लिए लोग अशिक्षा के कारण जेल में बंद हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि निर्दोषता की धारणा न्यायिक प्रणाली का आधार है। गरीब विचाराधीन कैदी को जमानत देने में देरी से लोगों का विश्वास हिलता है।


अदालतों में उचित बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कई अदालतें ऐसी हैं जहां महिलाओं के लिए शौचालय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब भी आदिवासियों के पास भूमि संबंधी उचित दस्तावेज नहीं हैं, जिन्हें ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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