{"_id":"6abcb30a7a5ba95c2709579e","slug":"bokaro-shooting-tragedy-injured-youth-rohit-dies-after-bullet-stuck-in-neck-death-toll-rises-to-three-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"बोकारो गोलीकांड में घायल रोहित की मौत: गर्दन में फंसी गोली बनी जानलेवा, मृतकों की संख्या बढ़कर तीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बोकारो गोलीकांड में घायल रोहित की मौत: गर्दन में फंसी गोली बनी जानलेवा, मृतकों की संख्या बढ़कर तीन
Wed, 30 Sep 2026 12:59 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Wed, 30 Sep 2026 12:59 PM IST
सार
चंद्रपुरा डीवीसी कॉलोनी के पश्चिमपल्ली में 17 सितंबर को हुई गोलीबारी में घायल रोहित सिन्हा की 13 दिन बाद रांची के मेदांता अस्पताल में मौत हो गई। घटना में पहले ही उसके माता-पिता की मौत हो चुकी थी। अब पुलिस के सामने तीन लोगों की हत्या की गुत्थी सुलझाने की चुनौती है, जबकि रोहित से पूछताछ की उम्मीद भी उसकी मौत के साथ खत्म हो गई।
विज्ञापन
सांकेतिक फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बोकारो में चंद्रपुरा डीवीसी कॉलोनी के पश्चिमपल्ली में हुए चर्चित गोलीकांड में गंभीर रूप से घायल रोहित सिन्हा की बुधवार तड़के रांची के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस सनसनीखेज हत्याकांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। वारदात के दिन ही रोहित के पिता नरेश सिन्हा और मां रेणु देवी की मौके पर ही मौत हो गई थी। पिछले 13 दिनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे रोहित की मौत के बाद अब इस पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है।
चार से अधिक गोलियां लगी थीं
गोलीबारी की इस घटना में रोहित को चार से अधिक गोलियां लगी थीं। रांची के मेदांता अस्पताल में चिकित्सकों ने शल्य चिकित्सा के दौरान उसके सिर, कमर और जांघ में फंसी गोलियों को तो बाहर निकाल लिया था, लेकिन गर्दन में फंसी गोली को नहीं निकाला जा सका। गंभीर हालत में उसका लगातार इलाज चल रहा था। इसके बाद बुधवार को उसने अंतिम सांस ली। 17 सितंबर की देर शाम हुई इस घटना के तुरंत बाद रोहित को प्राथमिक इलाज के लिए चंद्रपुरा अस्पताल ले जाया गया था। वहां से उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे बोकारो जनरल अस्पताल भेजा गया। इसके बाद अगले दिन बेहतर इलाज के लिए रांची के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
13 दिन बाद भी हत्यारों का सुराग नहीं
चंद्रपुरा डीवीसी कॉलोनी स्थित पश्चिमपल्ली के क्वार्टर संख्या एच/एम-14 में 17 सितंबर की देर शाम अज्ञात हमलावरों ने घर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। हमलावरों ने नरेश सिन्हा और उनकी पत्नी रेणु देवी को मौत के घाट उतार दिया था। वारदात के 13 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस हमलावरों की पहचान करने और हत्या के कारणों का पर्दाफाश करने में नाकाम रही है। पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) मामले की तहकीकात में जुटी हुई है और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, कागजात और विभिन्न सुरागों की गहराई से छानबीन कर रही है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- झारखंड बंद: पतरातू में किसानों-विस्थापितों का प्रदर्शन, मुख्य सड़क जाम कर उठाई अधिकार और सम्मान की मांग
बयान मिलने की उम्मीद भी टूटी
हत्याकांड की जांच में जुटी पुलिस को उम्मीद थी कि रोहित के होश में आने और उसका बयान दर्ज कराने के बाद घटना से जुड़े अहम सुराग हासिल हो सकेंगे। अब रोहित की मौत के बाद पुलिस की यह अंतिम उम्मीद भी समाप्त हो गई है। ऐसे में पुलिस के सामने इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की चुनौती और ज्यादा बढ़ गई है। अब पुलिस पूरी तरह से घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों, तकनीकी जांच और फॉरेंसिक सुरागों के भरोसे ही मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। मृतक रोहित के शव का पोस्टमार्टम रांची में कराया जाएगा।
विज्ञापन
चार से अधिक गोलियां लगी थीं
गोलीबारी की इस घटना में रोहित को चार से अधिक गोलियां लगी थीं। रांची के मेदांता अस्पताल में चिकित्सकों ने शल्य चिकित्सा के दौरान उसके सिर, कमर और जांघ में फंसी गोलियों को तो बाहर निकाल लिया था, लेकिन गर्दन में फंसी गोली को नहीं निकाला जा सका। गंभीर हालत में उसका लगातार इलाज चल रहा था। इसके बाद बुधवार को उसने अंतिम सांस ली। 17 सितंबर की देर शाम हुई इस घटना के तुरंत बाद रोहित को प्राथमिक इलाज के लिए चंद्रपुरा अस्पताल ले जाया गया था। वहां से उसकी नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे बोकारो जनरल अस्पताल भेजा गया। इसके बाद अगले दिन बेहतर इलाज के लिए रांची के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
13 दिन बाद भी हत्यारों का सुराग नहीं
चंद्रपुरा डीवीसी कॉलोनी स्थित पश्चिमपल्ली के क्वार्टर संख्या एच/एम-14 में 17 सितंबर की देर शाम अज्ञात हमलावरों ने घर में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। हमलावरों ने नरेश सिन्हा और उनकी पत्नी रेणु देवी को मौत के घाट उतार दिया था। वारदात के 13 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस हमलावरों की पहचान करने और हत्या के कारणों का पर्दाफाश करने में नाकाम रही है। पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) मामले की तहकीकात में जुटी हुई है और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, कागजात और विभिन्न सुरागों की गहराई से छानबीन कर रही है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- झारखंड बंद: पतरातू में किसानों-विस्थापितों का प्रदर्शन, मुख्य सड़क जाम कर उठाई अधिकार और सम्मान की मांग
बयान मिलने की उम्मीद भी टूटी
हत्याकांड की जांच में जुटी पुलिस को उम्मीद थी कि रोहित के होश में आने और उसका बयान दर्ज कराने के बाद घटना से जुड़े अहम सुराग हासिल हो सकेंगे। अब रोहित की मौत के बाद पुलिस की यह अंतिम उम्मीद भी समाप्त हो गई है। ऐसे में पुलिस के सामने इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने की चुनौती और ज्यादा बढ़ गई है। अब पुलिस पूरी तरह से घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों, तकनीकी जांच और फॉरेंसिक सुरागों के भरोसे ही मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। मृतक रोहित के शव का पोस्टमार्टम रांची में कराया जाएगा।