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बिन आंखों के पूरा किया टीम इंडिया के कप्तान और IAS का सफर

Thu, 18 Feb 2016 09:51 AM IST
Updated Thu, 18 Feb 2016 09:51 AM IST
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blind team india captain rajesh singh's journey

दृष्टिहीन भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन फिर आईएएस और अब लेखक बन चुके राजेश ने बचपन में आंखों की रोशनी खोने के बाद भी अपने सारे सपने को सच कर दिखाया। बुधवार को उन्होंने अपने संघर्षों पर लिखी किताब ‘आई : पुटिंग द आई इन आईएएस’ का विमोचन लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन से कराया।

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कार्यक्रम के दौरान लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने राजेश को बधाई देते हुए कहा कि वह समाज के लिए प्रेरणा के श्रोत हैं। उन्होंने कहा जब किसी के अंदर भगवान कमियां देता है तो उसे वह दूसरी ताकत भी देता है। राजेश को भगवान ने जिद नाम की वही ताकत दी है जिससे वह आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं।
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राजेश कुमार ने बताया कि उन्हें यह किताब लिखने में आठ महीने लगे। हालांकि किताब लिखने का ख्याल उनके मन में स्नातक के दौरान ही था, लेकिन इससे पहले वह कुछ बनना चाहते थे। राजेश ने बताया कि वह यह किताब ऐसे लोगों तक पहुुंचाना चाहते हैं जो उनके जैसी समस्या से जूझ रहे हैं।
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किताब लिखकर बताई संघर्ष की दास्तान

blind team india captain rajesh singh's journey

इस किताब में राजेश के संघर्ष की पूरी कहानी है। किताब में राकेश सिन्हा नामक चरित्र है जिसकी पूरी कहानी राजेश सिंह से मिलती है। राजेश वर्तमान में झारखंड सरकार में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात हैं।

क्रिकेट प्रेमी राजेश बताते हैं की 1990 में जब वह छह साल के थे तब क्रिकेट बॉल से चोट लगने के कारण उनके आंखों की रोशनी चली गई। लेकिन उनके क्रिकेट प्रेम और जिद के चलते उन्होंने वर्ष 1998, 2002 और 2006 में दृष्टिहीन भारतीय क्रिकेट टीम का प्रतिनिधित्व किया।

बिहार निवासी राजेश के मुताबिक उन्होंने 2006 में जेएनयू से इतिहास में एमए किया है। इसी वर्ष आईएएस की परीक्षा भी पास की। हालांकि उन्हें नियुक्ति के लिए पांच साल लड़ाई लड़नी पड़ी। 2011 में उन्हें आईएएस की ट्रेनिंग के लिए भेजा गया।

राजेश सिंह कहते हैं कि जेएनयू विचारों को जानने और समझने की एक बेहतरीन जगह है, लेकिन विचार अगर समाज और देशहित में नहीं है तो वह निंदनीय है, ऐसा नहीं होना चाहिए।

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