फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   तीन दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रही जम्मू कश्मीर पुलिस

तीन दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रही जम्मू कश्मीर पुलिस

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 08:38 PM IST
विज्ञापन
अजय मीनिया
विज्ञापन
जम्मू। यूं तो आतंकवाद इस समय देश के कई कौनों में पांव पसार चुका है। जिससे अलग अलग प्रदेश और राज्यों की पुलिस और अन्य फोर्स लड़ रही हैं। लेकिन आतंकवाद की लड़ाई की सबसे ज्यादा कीमत जम्मू कश्मीर पुलिस ने चुकाई है। तीन दशकों से आतंकवाद की लड़ाई लड़ने वाली जम्मू कश्मीर पुलिस इकलौती पुलिस है। जो फ्रंटफुट पर आकर आतंकवाद से लड़ रही है। यहीं नहीं, जम्मू कश्मीर पुलिस देश की एक मात्र ऐसी फोर्स है, यहां पर आतंकवाद से लड़ने वाला विशेष दस्ता सबसे पहले तैयार हुआ था। यह दस्ता आज तक काम कर रहा है। जानकारी के अनुसार 1989 में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पनपा था। तब से ही पुलिस आतंकवाद से लड़ रही है। हालांकि शुरूआत में दूसरी फोर्स लड़ती थी। लेकिन 1994 में पुलिस को फ्रंटफुट पर आकर लड़ने के लिए कहा था। अब तक आतंकवाद की लड़ाई में पुलिस ने अपने 1059 पुलिस अफसर और जवान शहीद हो चुके हैं। 508 एसपीओ भी अपनी जान दे चुके हैं। कुल 1059 कर्मियों में 152 पुलिस अफसरों ने भी अपनी जान देश के लिए कुर्बान की है।
विज्ञापन
सबसे बहादुरी सम्मान पाने वाली पुलिस मौजूदा वर्ष के पुलिस बहादुरी सम्मान में जम्मू कश्मीर पुलिस को कुल मिले अवार्ड में से 90 फीसदी अवार्ड मिले हैं। पुलिस को 81 गैलेंटरी अवार्ड मिले हैं। जबकि सीआरपीएफ को 51 अवार्ड मिले थे। पिछले तीन सालों से हर बड़े आपरेशन में जम्मू कश्मीर पुलिस ने हिस्सा लिया है और आतंकियों की कमर तोड़ी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस प्रवक्ता मनोज शिरी का कहना है कि आतंकवाद के हर मोर्चे पर पुलिस आगे आकर लड़ती है। पुलिस के जवानों ने कभी पीठ नहीं दिखाई। गोली सीने में लेकर जीता है यह जेके पुलिस का अफसर जम्मू कश्मीर पुलिस के हम जांबाज सिपाही निराले, पर्वत सी हिम्मत रखते हैं और फौलाद के जितना है दमखम। यह पंक्तियां जम्मू कश्मीर पुलिस की अधिकारिक मोबाइल कालर ट्यून है। जो जम्मू कश्मीर पुलिस की वीरता का बााखान करती है। जम्मू कश्मीर पुलिस के एसएसपी युगल मन्हास देश के इकलौते ऐसे पुलिस अफसर हैं, जिनके सीने में गोली दफन है। आतंकियों ने उनके परिवार पर हमला कर दिया था। इसमें गोली उनके सीने में लगी। पिछले 15 सालों से वह गोली को लेकर नौकरी कर रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि गोली निकली तो उनकी जान भी जा सकती है। लिहाजा वह गोली के साथ जी रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed