फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Kashmiri couple giving children free education

कश्मीरी दंपति तालीम के साथ बच्चों को पढ़ा रहे देशभक्ति का पाठ

Wed, 23 Nov 2016 12:05 PM IST
रवि वर्मा, अमर उजाला/राजोरी
रवि वर्मा, अमर उजाला/राजोरी Updated Wed, 23 Nov 2016 12:05 PM IST
विज्ञापन
Kashmiri couple giving children free education
कश्मीर के दंपति बच्चों को देते हैं मुफ्त शिक्षा - फोटो : Amar Ujala
कश्मीर घाटी में जहां एक तरफ युवा कानून को अपने हाथ में लेकर सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एक दंपति ऐसा भी है जो घाटी छोड़ बुद्धल तहसील के पिछड़े गांव समोट में बच्चों को मुफ्त तालीम दे रहा है। जरूरतमंद बच्चे यहां न सिर्फ पढ़ते हैं, बल्कि उनमें देशभक्ति का जज्बा भी कूट-कूट कर भरा जाता है। 
विज्ञापन


महिला जुलमाइरा के सिर से मां और बाप का साया बचपन में ही उठ गया था। परवरिश से लेकर पढ़ाई और नौकरी तक का सफर संघर्षपूर्ण रहा। अब उसकी ख्वाहिश जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा देते रहने की है।  
विज्ञापन


कश्मीर घाटी के अनंतनाग जिले कीरहने वाली जुलमाइरा खान और उनके पति फरीद खान ने बंगलूरू से एमबीए की पढ़ाई की है। अपनी पढ़ाई के दौरान ही दोनों ने विवाह किया। जुलमाइरा ने बताया कि उनके पति के कुछ परिवार वाले इस गांव में रहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

अब तक स्कूल में 40 बच्चों ने लिया दाखिला

Kashmiri couple giving children free education
क्लास में बैठ बच्चे - फोटो : Amar Ujala
 विवाह के बाद वे यहां घूमने आए तो जरूरतमंद बच्चों को अच्छी तालीम से महरूम पाया। 10 से 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को एबीसीडी तक नहीं आती।

इनमें प्रतिभा की कोई कमी तो नहीं है, लेकिन उनके भीतर छिपी प्रतिभा को बाहर लाने वाले की जरूरत महसूस हुई। वर्ष 2015 में ही पति-पत्नी दोनों समोट आ गए और वहां एक स्कूल खोल लिया। अब तक स्कूल में 40 बच्चे दाखिल किए गए हैं।

सभी बच्चे आतंकवाद से पीड़ित और बीपीएल परिवारों के हैं। इनमें चार बच्चे अनाथ हैं। केवल आठ बच्चों से 200 रुपये प्रति माह फीस ले रहे हैं। अन्य बच्चों को अपने खर्चे पर पढ़ा रहे हैं। 

दो बार चोरी हो गया तिरंगा

Kashmiri couple giving children free education
झंडा - फोटो : Demo Pic.
जुलमाइरा ने बताया कि एमबीए की पढ़ाई करने के बाद दोनों ने कुछ समय के लिए किसी कंपनी में नौकरी की थी और वही पैसा अब वह स्कूल को चलाने में खर्च कर रही हैं। जुलमाइरा ने बताया कि बचपन से मां और बाप को खोकर अकेली हो गई। गरीब, बेसहारा और अनाथ बच्चों को देखकर वह खुद को मुमकिन मदद करने से रोक नहीं पाती। अब उसके जीवन का लक्ष्य ही शिक्षा का अलख जगाते रहना है। 

इलाके के कई स्कूलों में राष्ट्रगान नहीं होता, लेकिन इस स्कूल में प्रार्थना सभा के बाद राष्ट्रगान और भारत माता के जयघोष होते हैं। जलमाइरा ने बताया कि कई स्कूलों में राष्ट्रगान नहीं होता। यहां पर स्कूल की रूटीन में देशभक्ति के जज्बा बढ़ाने को खास महत्व दिया जाता है।

स्कूल की इमारत पर तिरंगा फहराता रहता है। दो बार तिरंगा चोरी भी हुआ, लेकिन उसे फिर शान से स्थापित कर दिया गया। जलमाइरा का मानना है कि बच्चों के अंदर अपने देश के प्रति सम्मान की भावना का होना बेहद जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed