{"_id":"9b920fb8d30528887c24cada1ee1fe98","slug":"patients-needstelemedicine-treatment-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीजों को टेलीमेडिसिन चिकित्सा की दरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीजों को टेलीमेडिसिन चिकित्सा की दरकार
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Mon, 22 Sep 2014 02:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू संभाग में लोगों को अस्पतालों में टेलीमेडिसिन चिकित्सा सुविधा की पिछले एक दश्ाक से दरकार है। जीएमसी सहित पुंछ और कठुआ जिला अस्पतालों में वर्षों पहले इस सुविधा को शुरू किया गया था। इस सुविधा में देश के विख्यात अस्पतालों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मरीजों को इलाज देने की दिशा में काम किया जाता है।
विज्ञापन
कुछ देर चली इस सुविधा को दोबारा बहाल करने के लिए कुछ खास नहीं किया गया। इस सुविधा के लिए जिला अस्पतालों में लाए गए लाखों रुपये के उपकरण धूल चाट रहे हैं। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल जीएमसी में टेलीमेडिसिन सुविधा को फार्माकोलाजी विभाग में शिफ्ट किया गया लेकिन इस व्यवस्था को अभी तक दोबारा शुरू होने का इंतजार है।
विज्ञापन
जिला अस्पताल कठुआ में संसाधन तो उपलब्ध हैं, मगर उन्हें चलाने के लिए स्टाफ ही नहीं है। जिला अस्पताल पुंछ में भी वर्षों से बंद पड़ी टेलीमेडिसिन की किसी ने सुध नहीं ली है। करीब एक दशक पहले टेलीमेडिसिन सुविधा शुरू की गई थी। जीएमसी में यह सुविधा वर्ष 2004 से 2006 के अंत तक नियमित रूप से चलती रही।
विज्ञापन
इसमें एम्स और फोर्टिस जैसे विख्यात अस्पतालों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर कई मरीजों को लाभ दिया गया। उस समय हर सप्ताह कैंसर और आरथो के 2-3 मरीजों की चिकित्सा पर चर्चा होती थी लेकिन बीस लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट में इंजीनियर के अभाव में दिसंबर 2006 में यह सुविधा बंद हो गई।
वर्ष 2008 के शुरू में इस सुविधा को दोबारा शुरू करने की दिशा में जीएमसी में एडवांस सिस्टम को स्थापित करके सकिम सोरा में इसका मुख्य सरवर लगाया, मगर अब तक मरीजों को टेलीमेडिसिन से कोई लाभ नहीं मिल पाया है। जिला अस्पताल कठुआ में इस सुविधा को 2006-07 के बीच स्थापित किया गया लेकिन कुछ देर चलने के बाद यह नवंबर 2009 में बंद हो गई।
इसके बाद सिस्टम को अपडेट तो किया गया, मगर स्टाफ के अभाव में इसके दोबारा चालू न होने से मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रोजेक्ट अंतरिक्ष के तहत केंद्र सरकार की ओर से पुंछ जिले में भी 14 दिसंबर, 2003 में स्थापित की गई टेलीमेडिसिन सुविधा सिर्फ दिखावे के लिए रह गई।