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कर्ण सिंह की गायकी ने समां बांधा
Jammu
Updated Thu, 10 Jan 2013 05:30 AM IST
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जम्मू। सांसद और पूर्व सदर ए रियासत डा. कर्ण सिंह को गाते हुए गिने चुने लोगों ने ही सुना होगा। लेकिन बुधवार को उनकी गायकी ने अमर महल म्यूजियम में समां बांध दिया। उन्होेंने मल्लिका पुखराज, फैज अहमद फैज की गजलों के अलावा डोगरी गीतों और शास्त्रीय संगीत राग भोपाली को शानदार ढंग से गाकर अच्छों अच्छों को हैरत में डाल दिया। डा. कर्ण सिंह ने महारानी यशो राज्य लक्ष्मी की 75वीं जयंती के अवसर पर अमल महल म्यूजियम में गायकी से सबको हैरान कर दिया।
डा. सिंह ने कहा कि उनके पिता महाराजा हरि सिंह के शासनकाल में सुप्रसिद्ध गजल गायिका रही मल्लिका पुखराज उनके दरबार की मुलाजिम हुआ करती थी। उनकी गजलें आज भी उन्हें बेहद पसंद है। इसके बाद उन्होंने मल्लिक पुखराज की गजल बेजुबानी जुबान हो जाए... से सबको तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा फैज की गजल तुम आएं यहां पर... को बेहतरीन तरीके से गाकर अपनी गायकी का जादू बिखेर दिया। डोगरी गीतों से भी उन्होंने वाहवाही लूटी। उपस्थित लोग पूर्व सदर ए रियासत से वनस मोर वनस मोर की डिमांड करने लगे।
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डा. सिंह ने कहा कि उनके पिता महाराजा हरि सिंह के शासनकाल में सुप्रसिद्ध गजल गायिका रही मल्लिका पुखराज उनके दरबार की मुलाजिम हुआ करती थी। उनकी गजलें आज भी उन्हें बेहद पसंद है। इसके बाद उन्होंने मल्लिक पुखराज की गजल बेजुबानी जुबान हो जाए... से सबको तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा फैज की गजल तुम आएं यहां पर... को बेहतरीन तरीके से गाकर अपनी गायकी का जादू बिखेर दिया। डोगरी गीतों से भी उन्होंने वाहवाही लूटी। उपस्थित लोग पूर्व सदर ए रियासत से वनस मोर वनस मोर की डिमांड करने लगे।
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