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वृद्धजन कल्याण अधिनियम के तहत बहू से नहीं लिया जा सकता गुजारा भत्ता-हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 20 Nov 2017 07:43 PM IST
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- फोटो : Demo pic
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि माता-पिता एवं वृद्धजन कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत बहू से मासिक गुजारा-भत्ता नहीं लिया जा सकता है। इसके साथ ही अदालत ने धौलपुर एसडीएम के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एसडीएम ने बहू को चार हजार रुपए मासिक अपनी सास को गुजारा भत्ता देने के आदेश दिए थे।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश रेखा कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता महेन्द्रकुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पति की मौत होने के बाद उसे अनुकंपा नियुक्ति के तौर पर रोडवेज में परिचालक पद दिया गया।
याचिकाकर्ता की सास ने एसडीएम कोर्ट में परिवाद पेश कर माता-पिता एवं वृद्धजन कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गुजारा भत्ता मांगा। जिसे स्वीकार करते हुए एसडीएम ने 13 मार्च 2015 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को चार हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता सास को अदा करने को कहा।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश रेखा कुमारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता महेन्द्रकुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पति की मौत होने के बाद उसे अनुकंपा नियुक्ति के तौर पर रोडवेज में परिचालक पद दिया गया।
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याचिकाकर्ता की सास ने एसडीएम कोर्ट में परिवाद पेश कर माता-पिता एवं वृद्धजन कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गुजारा भत्ता मांगा। जिसे स्वीकार करते हुए एसडीएम ने 13 मार्च 2015 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को चार हजार रुपए मासिक गुजारा भत्ता सास को अदा करने को कहा।
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केवल इनसे भरण पोषण पाने के हकदार
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याचिका में कहा गया कि माता-पिता एवं वृद्धजन कल्याण अधिनियम, 2007 की धारा चार के तहत माता-पिता केवल अपनी संतान या वयस्क पोते-पोती से भरण पोषण पाने के हकदार हैं। इसके अलावा निसंतानता की स्थिति में उस निकटतम रिश्तेदार से भत्ता मिलेगा, जिसे उनकी संपत्ति जाएगी। ऐसे में एसडीएम अदालत का आदेश गलत है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने एसडीएम अदालत का आदेश रद्द करते हुए कहा है कि अधिनियम के तहत बहू गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं है।