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डॉक्टरों ने किया कमाल, अनूठा अॉपरेशन कर हाथ काटे बिना निकाला कैंसर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 29 Jul 2017 06:29 PM IST
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मरीज का एक्स रे रिपोर्ट आॅपरेशन से पहले और बाद का
- फोटो : amar ujala
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डॉक्टर्स ने मरीज के कैंसर ग्रसित हाथ को काटने की नौबत ही नहीं आने दी। यही नहीं, अनूठा अॉपरेशन कर उसी हाथ को काम करने योग्य भी बना दिया। अॉपरेशन सफल होने के बाद मरीज की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
राजस्थान के जयपुर स्थित के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह के डॉक्टर्स ने एक बार फिर से कमाल कर दिया है। जानकारी के अनुसार धौलपुर निवासी मरीज शैलेन्द्र उम्र 30 की कोहनी की हड्डी में सितंबर 2016 में एक रोड एक्सीडेंट में फ्रैक्चर हुआ था जिसका स्क्रू डालकर आॅपरेशन किया गया। आॅपेरशन के बावजूद भी मरीज की कोहनी के जोड़ में सूजन रहने लगी तथा यह दर्द के साथ दिनों दिन और भी बढ़ती चली गई।
ज्यादा परेशान होने के बाद मरीज शैलेन्द्र ने एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक व हड्डी रोग विभाग में यूनिट हैड डॉ. डी.एस. मीणा को दिखाया, तो उन्होनें एक्स रे करवाकर देखने पर मरीज के हाथ में हड्डी का ट्यूमर होने की आशंका जताई तथा स्क्रू निकालकर बायोप्सी जांच करवाने की सलाह दी। मरीज की बायोप्सी रिपोर्ट में सामने आया कि उसके हाथों में तेजी से फैलने वाले अग्रेसिव जॉइन्ट सैल ट्यूमर आॅफ डिस्टल ह्यूमरस है।
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ओपीडी हैड डॉ.मीणा ने मरीज को सलाह दी कि ट्यूमर बड़ा होने के कारण कोहनी की हड्डी को काटकर पूरा जोड़ ही बदलना पड़ेगा। मरीज की हड्डी में डिफेक्ट करीबन 8 सेंटीमीटर तक होना बताया गया है जिसके कारण मरीज को डॉक्टर्स ने टोटल एल्बो रिप्लेसमेंट विद मॉड्यूलर ट्यूमर एंडो प्रोस्थेसिस सर्जरी कराने की सलाह दी।
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राजस्थान के जयपुर स्थित के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मानसिंह के डॉक्टर्स ने एक बार फिर से कमाल कर दिया है। जानकारी के अनुसार धौलपुर निवासी मरीज शैलेन्द्र उम्र 30 की कोहनी की हड्डी में सितंबर 2016 में एक रोड एक्सीडेंट में फ्रैक्चर हुआ था जिसका स्क्रू डालकर आॅपरेशन किया गया। आॅपेरशन के बावजूद भी मरीज की कोहनी के जोड़ में सूजन रहने लगी तथा यह दर्द के साथ दिनों दिन और भी बढ़ती चली गई।
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ज्यादा परेशान होने के बाद मरीज शैलेन्द्र ने एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक व हड्डी रोग विभाग में यूनिट हैड डॉ. डी.एस. मीणा को दिखाया, तो उन्होनें एक्स रे करवाकर देखने पर मरीज के हाथ में हड्डी का ट्यूमर होने की आशंका जताई तथा स्क्रू निकालकर बायोप्सी जांच करवाने की सलाह दी। मरीज की बायोप्सी रिपोर्ट में सामने आया कि उसके हाथों में तेजी से फैलने वाले अग्रेसिव जॉइन्ट सैल ट्यूमर आॅफ डिस्टल ह्यूमरस है।
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ओपीडी हैड डॉ.मीणा ने मरीज को सलाह दी कि ट्यूमर बड़ा होने के कारण कोहनी की हड्डी को काटकर पूरा जोड़ ही बदलना पड़ेगा। मरीज की हड्डी में डिफेक्ट करीबन 8 सेंटीमीटर तक होना बताया गया है जिसके कारण मरीज को डॉक्टर्स ने टोटल एल्बो रिप्लेसमेंट विद मॉड्यूलर ट्यूमर एंडो प्रोस्थेसिस सर्जरी कराने की सलाह दी।
बड़ा अॉपरेशन था, जो पांच घंटे में हुआ पूरा
कामयाब आॅपरेशन के बाद मरीज शैलेन्द्र
- फोटो : amar ujala
चिकित्सा के क्षेत्र में इस तरह की सर्जरी पहली आर्थोपैडिक सर्जरी है और एसएमस के डॉक्टरों ने डॉक्टरों ने महज 5 घंटे में इसे पूरा कर लिया। वहीं मरीज को केवल दो यूनिट ब्लड चढ़ाने की ही आवश्यकता पड़ी। जबकि ऐसी सर्जरी में मरीज का काफी खून बह जाता है जिसमें ब्लड की ज्यादा आवश्यकता होती है।
सर्जरी करने वाली टीम में रहे डॉ.राजकुमार हर्षवाल ने बताया कि इस सर्जरी के बाद अब मरीज की कोहनी फिर से पहले की ही तरह काम करने लगी और उसकी कोहनी में प्रोस्थेसिस टाईटेनियम लगाया गया है, ताकि आॅपरेशन के बाद भविष्य में मरीज की रिकवरी देखने के लिए एमआरआई करवाई जा सके।
फिलहाल मरीज की हालत खतरे से बाहर है और उसकी स्थिति सामान्य है। डॉक्टरों के अनुसार अब मरीज का हाथ 90 प्रतिशत तक काम करने लायक हो गया है।
'यह बोन ट्यूमर की दुर्लभ साइट है तथा इस तरह के कैंसर में कोहनी को फ्यूज किया जाता है या कोहनी के ऊपर से हाथ काट दिया जाता है। हमने मरीज़ की यह सर्जरी कर उसके पूरी बाजू को न केवल बचाया है बल्कि उसे काम करने लायक भी बनाया है। यह राज्य में प्रथम है '।
डॉ.राजकुमार हर्षवाल, सह आचार्य (अस्थि रोग विभाग) सवाई मानसिंह अस्पताल
सर्जरी करने वाली टीम में रहे डॉ.राजकुमार हर्षवाल ने बताया कि इस सर्जरी के बाद अब मरीज की कोहनी फिर से पहले की ही तरह काम करने लगी और उसकी कोहनी में प्रोस्थेसिस टाईटेनियम लगाया गया है, ताकि आॅपरेशन के बाद भविष्य में मरीज की रिकवरी देखने के लिए एमआरआई करवाई जा सके।
फिलहाल मरीज की हालत खतरे से बाहर है और उसकी स्थिति सामान्य है। डॉक्टरों के अनुसार अब मरीज का हाथ 90 प्रतिशत तक काम करने लायक हो गया है।
'यह बोन ट्यूमर की दुर्लभ साइट है तथा इस तरह के कैंसर में कोहनी को फ्यूज किया जाता है या कोहनी के ऊपर से हाथ काट दिया जाता है। हमने मरीज़ की यह सर्जरी कर उसके पूरी बाजू को न केवल बचाया है बल्कि उसे काम करने लायक भी बनाया है। यह राज्य में प्रथम है '।
डॉ.राजकुमार हर्षवाल, सह आचार्य (अस्थि रोग विभाग) सवाई मानसिंह अस्पताल