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आदेश की पालना करें, वरना हाजिर हो अधिकारी-हाईकोर्ट
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 02 Dec 2017 07:51 PM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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राजस्थान हाईकोर्ट ने व्याख्याता भर्ती-2013 में अदालती आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को मेरिट के अनुसार गृह जिले में नियुक्ति नहीं देने पर नाराजगी जताई है।
अदालत ने 18 दिसंबर तक आदेश की पालना नहीं करने पर शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेन्द्रकुमार की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का व्याख्याता भर्ती-2013 में चयन हुआ था। याचिकाकर्ता के मेरिट में अधिक अंक आने के बावजूद भी उसे गृह जिले में नियुक्ति नहीं दी गई।
इस पर हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2016 को याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन तय करते हुए उसे गृह जिले में नियुक्त करने के आदेश दिए थे। अदालती आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को गृह जिले में नियुक्त नहीं किया गया और याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन खारिज कर दिया। इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आदेश की पालना नहीं करने पर 18 दिसंबर को अधिकारियों को पेश होने के आदेश दिए हैं।
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अदालत ने 18 दिसंबर तक आदेश की पालना नहीं करने पर शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सुरेन्द्रकुमार की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का व्याख्याता भर्ती-2013 में चयन हुआ था। याचिकाकर्ता के मेरिट में अधिक अंक आने के बावजूद भी उसे गृह जिले में नियुक्ति नहीं दी गई।
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इस पर हाईकोर्ट ने 7 अक्टूबर 2016 को याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन तय करते हुए उसे गृह जिले में नियुक्त करने के आदेश दिए थे। अदालती आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को गृह जिले में नियुक्त नहीं किया गया और याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन खारिज कर दिया। इससे व्यथित होकर याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आदेश की पालना नहीं करने पर 18 दिसंबर को अधिकारियों को पेश होने के आदेश दिए हैं।
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