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सरकार ने अपात्र को बनाया वक्फ बोर्ड चैयरमेन और सदस्य, हाईकोर्ट ने दिया ये फैसला
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Tue, 05 Dec 2017 01:09 PM IST
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अदालत।
- फोटो : amar ujala
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राजस्थान हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के चैयरमेन के तौर पर अबु बकर नकवी और दो सदस्यों अफरोद जैदी व नीदा खान का सदस्य के तौर पर किए गए मनोनयन को रद्द कर दिया है।अदालत ने इन्हें इन पदों के लिए अपात्र माना है।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सैय्यद नजीर हसन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने 9 मार्च 2016 को अबुबकर नकवी, अफरोद जैदी और नीदा खान को वक्फ बोर्ड में सदस्य बनाया। वहीं बाद में नकवी को बोर्ड का चैयरमेन मनोनीत किया गया। जबकि वे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत तीनों व्यक्ति तय पात्रता नहीं रखते हैं।
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न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सैय्यद नजीर हसन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने 9 मार्च 2016 को अबुबकर नकवी, अफरोद जैदी और नीदा खान को वक्फ बोर्ड में सदस्य बनाया। वहीं बाद में नकवी को बोर्ड का चैयरमेन मनोनीत किया गया। जबकि वे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत तीनों व्यक्ति तय पात्रता नहीं रखते हैं।
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इस तरह है अयोग्य
court
अधिनियम की धारा 14 में बोर्ड के पदाधिकारियों के लिए पात्रता तय है। अधिनियम के अनुसार सदस्यों के लिए मुस्लिम स्कॉलर होना जरूरी है। जबकि दोनों सदस्य मुस्लिम स्कॉलर की पात्रता नहीं रखते हैं। अबु बकर की ओर से नियुक्ति के लिए भेजे गए अपने बायोडाटा में कहा गया कि वह कई सालों से भाजपा का कार्यकर्ता है और उसने मुख्यमंत्री के लिए काम किया है। इससे पहले वे स्कूल में पीटीआई के पद पर कार्यरत थे।
नकवी का चयन समाज सेवा, वित्त, राजस्व, कृषि या टाउन प्लानर की विशेषज्ञता रखने के वर्ग में किया गया है। जबकि बायोडेटा के अनुसार वे सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ता ही रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि सेवा नियमों के तहत कर्मचारी किसी राजनीतिक दल की गतिविधियों से जुडा हुआ नहीं हो सकता। ऐसे में तीनों पदाधिकारियों को पात्रता नहीं होने के बावजूद भी बोर्ड में नियुक्त किया गया है। याचिका में गुहार की गई कि तीनों की सदस्यता को रद्द किया जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने तीनों की नियुक्ति के संबंध में जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया है।
नकवी का चयन समाज सेवा, वित्त, राजस्व, कृषि या टाउन प्लानर की विशेषज्ञता रखने के वर्ग में किया गया है। जबकि बायोडेटा के अनुसार वे सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ता ही रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि सेवा नियमों के तहत कर्मचारी किसी राजनीतिक दल की गतिविधियों से जुडा हुआ नहीं हो सकता। ऐसे में तीनों पदाधिकारियों को पात्रता नहीं होने के बावजूद भी बोर्ड में नियुक्त किया गया है। याचिका में गुहार की गई कि तीनों की सदस्यता को रद्द किया जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने तीनों की नियुक्ति के संबंध में जारी अधिसूचना को रद्द कर दिया है।