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पैनल ने नकारी 'पद्मावती', कहाः आपत्तियों की भरमार, रिलीज होने के लायक ही नहीं
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 30 Dec 2017 03:50 PM IST
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Padmavati
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'पद्मावती' फिल्म विवाद को सुलझाने के लिए जिस एक्सपर्ट पैनल को इसे दिखाया गया, उसी ने फिल्म को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सूत्रों के अनुसार पैनल ने बोर्ड को कह दिया है कि ये फिल्म रिलीज होने लायक ही नहीं है। इसमें ढेरों आपत्तियां हैं।
सूत्रों के अनुसार पैनल ने सीबीएफसी को अपनी मौखिक आपत्तियां फिल्म देखने के बाद ही रिकॉर्ड करवा दी थी और अब इन आपत्तियों को लिखित में भेजने की तैयारी की जा रही है। ये आपत्तियां जल्द ही सीबीएफसी को मिल जाएंगी।
पैनल के सदस्यों का कहना है कि हमसे कहा गया था कि आपको फिल्म से संबंधित कोई बात नहीं कहनी है, लेकिन मीडिया में आया है कि बोर्ड ने फिल्म का नाम व घूमर गाने में बदलाव कर फिल्म को U/A सर्टिफिकेट जारी करने की बात की है। जबकि हमारी लिखित आपत्तियां अभी तक बोर्ड के पास नहीं पहुंची हैं। इधर, मौखिक आपत्तियों को भी बोर्ड ने दूर करवाने के कोई प्रयास नहीं किए हैं।
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सूत्रों के अनुसार पैनल ने सीबीएफसी को अपनी मौखिक आपत्तियां फिल्म देखने के बाद ही रिकॉर्ड करवा दी थी और अब इन आपत्तियों को लिखित में भेजने की तैयारी की जा रही है। ये आपत्तियां जल्द ही सीबीएफसी को मिल जाएंगी।
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पैनल के सदस्यों का कहना है कि हमसे कहा गया था कि आपको फिल्म से संबंधित कोई बात नहीं कहनी है, लेकिन मीडिया में आया है कि बोर्ड ने फिल्म का नाम व घूमर गाने में बदलाव कर फिल्म को U/A सर्टिफिकेट जारी करने की बात की है। जबकि हमारी लिखित आपत्तियां अभी तक बोर्ड के पास नहीं पहुंची हैं। इधर, मौखिक आपत्तियों को भी बोर्ड ने दूर करवाने के कोई प्रयास नहीं किए हैं।
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समुदाय हो सकते हैं आहत
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पैनल के सदस्य इग्नू के इतिहास के विभागाध्यक्ष कपिल कुमार ने कहा कि हमने खुले दिमाग से और इतिहास की नजरों से फिल्म को देखा। हमें लगा कि इतिहास और कल्पना दो अलग अलग चीजें हैं। इतिहास पर बनने वाली फिल्म में कल्पना का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब फिल्म का नाम, पात्रों के नाम और स्थान के नाम और घटनाएं ऐतिहासिक हैं तो स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर कुछ भी दिखाया जाना उचित नहीं है। बल्कि इसे मैं खिलवाड़ ही कहूंगा, क्योंकि नई पीढ़ी फिल्म को ही इतिहास मानने लगेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास के साथ हमेशा तोड़ मरोड़ होती रही है। क्रिएटिविटी की एक सीमा होती है और इसके नाम पर दो समुदायों को आमने सामने नहीं किया जा सकता है। इस इतिहास की फिल्म को जायसी पर आधारित बताया गया है और केवल फारसी स्त्रोतों का ही अध्ययन किया गया है। जबकि इतिहास पर बनने वाली फिल्म पर सभी भाषाओं के स्त्रोतों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब फिल्म का नाम, पात्रों के नाम और स्थान के नाम और घटनाएं ऐतिहासिक हैं तो स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के नाम पर कुछ भी दिखाया जाना उचित नहीं है। बल्कि इसे मैं खिलवाड़ ही कहूंगा, क्योंकि नई पीढ़ी फिल्म को ही इतिहास मानने लगेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास के साथ हमेशा तोड़ मरोड़ होती रही है। क्रिएटिविटी की एक सीमा होती है और इसके नाम पर दो समुदायों को आमने सामने नहीं किया जा सकता है। इस इतिहास की फिल्म को जायसी पर आधारित बताया गया है और केवल फारसी स्त्रोतों का ही अध्ययन किया गया है। जबकि इतिहास पर बनने वाली फिल्म पर सभी भाषाओं के स्त्रोतों का अध्ययन किया जाना चाहिए।