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JEE Main 2017: जेईई टॉपर कल्पित मोबाइल-सोशल मीडिया से रहे दूर
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Thu, 27 Apr 2017 07:49 PM IST
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जेईई मेन एग्जाम टॉपर कल्पित वीरवाल
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करत—करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान, रस्सी आवत जात से सिल पर पड़त निसान। आज हम ये दोहा इसलिए याद दिला रहे हैं, क्योंकि जेईई मेन—2017 में इतिहास रचने वाले उदयपुर के कल्पित वीरवाल का भी यही मानना है।
एक साधारण से मेल नर्स पुष्करलाल वीरवाल और शिक्षिका पुष्पा वीरवाल के बेटे कल्पित वीरवाल ने खास बातचीत के दौरान बताया कि आज उन्हें 360/360 अंक हासिल कर जो भी सफलता मिली है, उसके लिए सबसे पहले माता—पिता का धन्यवाद देते हैं। कल्पित का कहना है कि उनके समर्पण और बेटे पर उनका विश्वास उन्हें जीत के करीब लेकर गया। इसके बाद उन्होंने हर वो बात फोलो की जो अक्सर स्कूलों में शिक्षकों की जुबां से हर स्टूडेंट के लिए निकलती है।
कल्पित जेईई एडवांस में अच्छे नंबर हासिल करके आईआईटी बॉम्बे कम्प्यूटर साइंस में प्रवेश लेना चाहते हैं। इससे पहले कल्पित ने दसवीं कक्षा में भी 10/10 सीजीपीए हासिल किया है।
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कल्पित ने फिजिक्स, मैथ्स और कैमिस्ट्री तीनों सब्जेक्ट में 120 में से 120 नंबर प्राप्त किए हैं। कल्पित ने एनटीएसई के प्रथम चरण में भी राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया था।
बचपन से ही अच्छी बातों के प्रति जागरूक रहने वाले कल्पित ने बताया कि उन्होंने किसी भी दिन, चाहे वो किसी भी कक्षा की परीक्षा हो उसकी तैयारी नियमित तौर पर की। चाहे उन्हें इसके लिए रोजाना एक घंटा मिला तो एक घंटे पढ़ा और ज्यादा समय मिला तो ज्यादा घंटे पढ़ाई की।
हालांकि, औसतन रोजान छह घंटे की पढ़ाई को उन्होंने किसी भी मुकाम को हासिल करने के लिए पर्याप्त बताया। कल्पित ने अपने रोल मॉडल के रूप में अपने बड़े भाई हार्दिक का अनुसरण किया। हार्दिक वर्तमान में एम्स में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं।
कल्पित वीरवाल आज के दौर में तेजी से बढ़ रहे महंगे मोबाइल रखने और सोशल साइट्स जैसे शौक से दूर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी टेक्नोलोजी का प्रयोग तब तक ही करना चाहिए जितनी उसकी आपको जरूरत है।
पिता के साथ क्रिकेट और बैडमिंटन खेलने का शौक रखने वाले कल्पित परीक्षा में अपना अलग मुकाम हासिल करने के लिए सेल्फ स्टडी को महत्व देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुजनों के बताए अनुसार नोट्स को पूरी समझ से अध्ययन करना जरूरी है।
एमडीएस पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले कल्पित ने डॉ.शैलेन्द्र सोमानी, प्रिसिंपल निधि माहेश्वरी, रवि रंजन, उपेन्द्र सिंह, नितिन सोहाने और जम्बू जैन सर का विशेष तौर पर धन्यवाद दिया है। कल्पित नीति आयोग में भी स्कूल को रिप्रजेंट कर चुके हैं।
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एक साधारण से मेल नर्स पुष्करलाल वीरवाल और शिक्षिका पुष्पा वीरवाल के बेटे कल्पित वीरवाल ने खास बातचीत के दौरान बताया कि आज उन्हें 360/360 अंक हासिल कर जो भी सफलता मिली है, उसके लिए सबसे पहले माता—पिता का धन्यवाद देते हैं। कल्पित का कहना है कि उनके समर्पण और बेटे पर उनका विश्वास उन्हें जीत के करीब लेकर गया। इसके बाद उन्होंने हर वो बात फोलो की जो अक्सर स्कूलों में शिक्षकों की जुबां से हर स्टूडेंट के लिए निकलती है।
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कल्पित जेईई एडवांस में अच्छे नंबर हासिल करके आईआईटी बॉम्बे कम्प्यूटर साइंस में प्रवेश लेना चाहते हैं। इससे पहले कल्पित ने दसवीं कक्षा में भी 10/10 सीजीपीए हासिल किया है।
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कल्पित ने फिजिक्स, मैथ्स और कैमिस्ट्री तीनों सब्जेक्ट में 120 में से 120 नंबर प्राप्त किए हैं। कल्पित ने एनटीएसई के प्रथम चरण में भी राज्य में पहला स्थान प्राप्त किया था।
बचपन से ही अच्छी बातों के प्रति जागरूक रहने वाले कल्पित ने बताया कि उन्होंने किसी भी दिन, चाहे वो किसी भी कक्षा की परीक्षा हो उसकी तैयारी नियमित तौर पर की। चाहे उन्हें इसके लिए रोजाना एक घंटा मिला तो एक घंटे पढ़ा और ज्यादा समय मिला तो ज्यादा घंटे पढ़ाई की।
हालांकि, औसतन रोजान छह घंटे की पढ़ाई को उन्होंने किसी भी मुकाम को हासिल करने के लिए पर्याप्त बताया। कल्पित ने अपने रोल मॉडल के रूप में अपने बड़े भाई हार्दिक का अनुसरण किया। हार्दिक वर्तमान में एम्स में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं।
कल्पित वीरवाल आज के दौर में तेजी से बढ़ रहे महंगे मोबाइल रखने और सोशल साइट्स जैसे शौक से दूर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी टेक्नोलोजी का प्रयोग तब तक ही करना चाहिए जितनी उसकी आपको जरूरत है।
पिता के साथ क्रिकेट और बैडमिंटन खेलने का शौक रखने वाले कल्पित परीक्षा में अपना अलग मुकाम हासिल करने के लिए सेल्फ स्टडी को महत्व देते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि गुरुजनों के बताए अनुसार नोट्स को पूरी समझ से अध्ययन करना जरूरी है।
एमडीएस पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले कल्पित ने डॉ.शैलेन्द्र सोमानी, प्रिसिंपल निधि माहेश्वरी, रवि रंजन, उपेन्द्र सिंह, नितिन सोहाने और जम्बू जैन सर का विशेष तौर पर धन्यवाद दिया है। कल्पित नीति आयोग में भी स्कूल को रिप्रजेंट कर चुके हैं।