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एसएमएस मेडिकल कॉलेज : रोटेशन से एचओडी नहीं लगाने पर अवमानना नोटिस
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Wed, 17 May 2017 07:24 PM IST
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राजस्थान हाईकोर्ट ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज में अदालती आदेश के बावजूद रोटेशन से विभागाध्यक्ष नियुक्त नहीं करने पर मुख्य सचिव ओपी मीना और प्रमुख मेडिकल शिक्षा सचिव रोली सिंह सहित एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को अवमानना नोटिस जारी किए हैं।
न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश डॉ.अनिल शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि गत वर्ष 31 मार्च को हाईकोर्ट ने विभागाध्यक्ष पद पर रोटेशन से वरिष्ठ प्रोफेसर को नियुक्त करने के संबंध में नीति बनाने के आदेश दिए थे। जिसकी पालना में 22 जून 2016 को राज्य सरकार ने परिपत्र जारी कर विभागाध्यक्ष के तौर पर दो साल की अवधि तय की। जिसे तत्कालीन विभागाध्यक्षों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने याचिकाएं निस्तारित करते हुए परिपत्र को भविष्य से लागू करना तय किया। वहीं सरकार ने पुन: परिपत्र जारी कर कार्य कर रहे विभागाध्यक्षों से ठीक कनिष्ठ को एचओडी नियुक्त करने का प्रावधान किया। याचिका में कहा गया कि इसके बाद गत 17 मार्च को सरकार ने फिर एक परिपत्र जारी कर पुन: 22 जून के परिपत्र की स्थिति बहाल कर दी। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश डॉ.अनिल शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि गत वर्ष 31 मार्च को हाईकोर्ट ने विभागाध्यक्ष पद पर रोटेशन से वरिष्ठ प्रोफेसर को नियुक्त करने के संबंध में नीति बनाने के आदेश दिए थे। जिसकी पालना में 22 जून 2016 को राज्य सरकार ने परिपत्र जारी कर विभागाध्यक्ष के तौर पर दो साल की अवधि तय की। जिसे तत्कालीन विभागाध्यक्षों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने याचिकाएं निस्तारित करते हुए परिपत्र को भविष्य से लागू करना तय किया। वहीं सरकार ने पुन: परिपत्र जारी कर कार्य कर रहे विभागाध्यक्षों से ठीक कनिष्ठ को एचओडी नियुक्त करने का प्रावधान किया। याचिका में कहा गया कि इसके बाद गत 17 मार्च को सरकार ने फिर एक परिपत्र जारी कर पुन: 22 जून के परिपत्र की स्थिति बहाल कर दी। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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