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आसाराम मामला : कोर्ट परिसर में वकीलों के साथ हुई धक्का-मुक्की को लेकर सीआई तलब
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Mon, 08 Jan 2018 06:48 PM IST
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यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसे आसाराम मामले की सुनवाई जेल में करवाने को लेकर पुलिस की ओर से दायर याचिका पर आज राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।
जस्टिस जीके व्यास और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान दो दिन पहले हुए कोर्ट परिसर में हंगामे एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ धक्का-मुक्की को लेकर बताया गया। जिस पर कोर्ट ने सुनवाई को दो बजे रखते हुए सीआई मदन बेनीवाल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया। दो बजे सीआई कोर्ट के समक्ष पेश हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का कार्य है। हाईकोर्ट के आदेशों की पालना की जाए, लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता की गरिमा का भी ख्याल रखा जाना चाहिए था।
सरकार की ओर से एएजी शिवकुमार व्यास ने पक्ष रखते हुए बताया कि पेशी के दौरान समर्थक हंगामा करते हैं। ऐसे में सुनवाई जेल में शिफ्ट की जाए। इस पर अधिवक्ता महेश बोडा ने विरोध जताते हुए कहा कि सुनवाई अंतिम चरण में है ऐसे में फिलहाल जेल में शिफ्ट नहीं की जाए। आसाराम सहित सभी आरोपियों को समर्थक को समझाने के लिए बोल देंगे।
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जस्टिस जीके व्यास और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान दो दिन पहले हुए कोर्ट परिसर में हंगामे एवं वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ धक्का-मुक्की को लेकर बताया गया। जिस पर कोर्ट ने सुनवाई को दो बजे रखते हुए सीआई मदन बेनीवाल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया। दो बजे सीआई कोर्ट के समक्ष पेश हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का कार्य है। हाईकोर्ट के आदेशों की पालना की जाए, लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता की गरिमा का भी ख्याल रखा जाना चाहिए था।
सरकार की ओर से एएजी शिवकुमार व्यास ने पक्ष रखते हुए बताया कि पेशी के दौरान समर्थक हंगामा करते हैं। ऐसे में सुनवाई जेल में शिफ्ट की जाए। इस पर अधिवक्ता महेश बोडा ने विरोध जताते हुए कहा कि सुनवाई अंतिम चरण में है ऐसे में फिलहाल जेल में शिफ्ट नहीं की जाए। आसाराम सहित सभी आरोपियों को समर्थक को समझाने के लिए बोल देंगे।
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तीन दिन में मांगा स्पष्टीकरण
कोर्ट परिसर में हुई धक्का-मुक्की
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान हाईकोर्ट जस्टिस व्यास ने सीआई मदन बेनीवाल को स्पष्टीकरण पेश करने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि सीआई ने कहा कि मुझे नहीं मालूम था कि वे वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, मैं तो ड्यूटी कर रहा था, समर्थक परेशान कर रहे थे और उनको बाहर निकाल रहा था। वही कुछ वरिष्ठ अधिवक्ताओ ने सीआई की कार्यशैली को लेकर विरोध जताते हुए कहा कि ऐसा जानबूझकर किया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले को लेकर सीआई को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। अब अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।
हाईकोर्ट ने मामले को लेकर सीआई को तीन दिन में स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। अब अगली सुनवाई 17 जनवरी को होगी।