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आईएस आतंकियों के अनाथ बच्चों से ऐसे पेश आ रही इराकी सेना
amarujal.com, Presented By: आसिफ़ इक़बाल
Updated Mon, 17 Jul 2017 02:15 PM IST
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आईएस आतंकी का अनाथ बच्चा
- फोटो : DailyMail
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वैसे तो आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट इराक के मोसुल से पूरी तरह से खत्म हो चुका है, लेकिन कुछ चीजें ऐसी छोड़ गया है, जो इराकी सेनाओं के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। मोसुल में मारे गए आईएस आतंकवादियों के बच्चे भुखमरी के शिकार होकर दम तोड़ रहे हैं।
इनमें से ज्यादातर बच्चों के माता-पिता आत्मघाती हमलावर थे। जंग खत्म होने के बाद इराकी सेना के जवानों को ऐसे बच्चे मिल रहे हैं, जो फेंके गए कच्चे मांस और कूड़ा-करकट खाकर अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं।
पिछले हफ्ते इराकी सेना ने आतंकी संगठन आईएस को मोसुल से उखाड़ फेंका था। कई महीनों तक चली इस भीषण जंग में शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गया है। इस तबाही में हजारों लोगों की जानें गईं, अब आलम यह है कि यहां के अनाथ हुए बच्चों की जिंदगी पर संकट खड़ा हो गया है।
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न तो इनकी देखभाल के लिए कोई है और न ही इनके खाने-पीने का कोई इंतजाम है। नतीजा यह है कि इन्हें फेंके गए कच्चे मांस और कूड़े में फेंके गए खाने को खाकर अपना पेट भरना पड़ रहा है। इराकी सेना जब शहर में सर्च अभियान चला रही थी, उसी दौरान उन्हें एक चार-पांच साल का बच्चा मिला जो मांस के चीथड़े खा रहा था।
इराकी सेना के मुताबिक बच्चे के बदन में एक भी कपड़ा नहीं था और वो बेहद कमजोर था। उसके पेट को देखकर लग रहा था कि उसने कई दिन से कुछ नहीं खाया। उसकी हालत बेहद चिंताजनक थी। बच्चे को जवानों ने तुरंत कंबल में ढंककर बिस्किट खिलाए और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
गौर करने वाली बात यह है कि आईएस के संगठन में दुनियाभर से आए आतंकी शामिल थे। इराकी सेना को एक ऐसी बच्ची मिली जो रूसी भाषा बोल रही थी। माना जा रहा है कि यह बच्ची रूस से मोसुल आकर आतंकी बने किसी शख्स की है। यह बच्ची हवाई हमलों में तबाह हुए एक भवन के नीचे मिली।
इराकी सेना जब गश्त पर थी, तो उन्हें मलबे से किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। यह बच्ची कई दिनों से मिट्टी खाकर जिंदा थी। सेना के जवानों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जब बच्ची से उसके माता-पिता के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसके माता-पिता जंग में 'शहीद' हो गए हैं।
बच्ची रूसी भाषा बोल और समझ रही थी। सेना के एक जवान के मुताबिक जो बच्चे मिल रहे हैं, उनके जीवन के लिए बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं।
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इनमें से ज्यादातर बच्चों के माता-पिता आत्मघाती हमलावर थे। जंग खत्म होने के बाद इराकी सेना के जवानों को ऐसे बच्चे मिल रहे हैं, जो फेंके गए कच्चे मांस और कूड़ा-करकट खाकर अपने आप को जिंदा रखे हुए हैं।
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पिछले हफ्ते इराकी सेना ने आतंकी संगठन आईएस को मोसुल से उखाड़ फेंका था। कई महीनों तक चली इस भीषण जंग में शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गया है। इस तबाही में हजारों लोगों की जानें गईं, अब आलम यह है कि यहां के अनाथ हुए बच्चों की जिंदगी पर संकट खड़ा हो गया है।
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न तो इनकी देखभाल के लिए कोई है और न ही इनके खाने-पीने का कोई इंतजाम है। नतीजा यह है कि इन्हें फेंके गए कच्चे मांस और कूड़े में फेंके गए खाने को खाकर अपना पेट भरना पड़ रहा है। इराकी सेना जब शहर में सर्च अभियान चला रही थी, उसी दौरान उन्हें एक चार-पांच साल का बच्चा मिला जो मांस के चीथड़े खा रहा था।
इराकी सेना के मुताबिक बच्चे के बदन में एक भी कपड़ा नहीं था और वो बेहद कमजोर था। उसके पेट को देखकर लग रहा था कि उसने कई दिन से कुछ नहीं खाया। उसकी हालत बेहद चिंताजनक थी। बच्चे को जवानों ने तुरंत कंबल में ढंककर बिस्किट खिलाए और तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
गौर करने वाली बात यह है कि आईएस के संगठन में दुनियाभर से आए आतंकी शामिल थे। इराकी सेना को एक ऐसी बच्ची मिली जो रूसी भाषा बोल रही थी। माना जा रहा है कि यह बच्ची रूस से मोसुल आकर आतंकी बने किसी शख्स की है। यह बच्ची हवाई हमलों में तबाह हुए एक भवन के नीचे मिली।
इराकी सेना जब गश्त पर थी, तो उन्हें मलबे से किसी बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। यह बच्ची कई दिनों से मिट्टी खाकर जिंदा थी। सेना के जवानों ने उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जब बच्ची से उसके माता-पिता के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसके माता-पिता जंग में 'शहीद' हो गए हैं।
बच्ची रूसी भाषा बोल और समझ रही थी। सेना के एक जवान के मुताबिक जो बच्चे मिल रहे हैं, उनके जीवन के लिए बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं।