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Hindi News ›   Crime ›   Terrorist incidents in Pakistan since 2012

पाक जमीन पर नापाक वारदातें, बारूद के ढेर पर खड़ा मुल्क

Thu, 31 Mar 2016 03:47 PM IST
टीम डिजिटस/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटस/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 31 Mar 2016 03:47 PM IST
सार

  • आतंक की पनाहगाह में आतंकी कोहराम!
  • बेगुनाहों के खून से रक्तरंजित होती धरती
  • आंकड़ों में बारूद के ढेर पर खड़ा मुल्क
  • पाक जमीन पर कैसे थमेंगी नापाक वारदातें?

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Terrorist incidents in Pakistan since 2012
अब तो चेत जाओ

विस्तार

पाकिस्तान में आतंकी हमलों ने बिन मौसम बरसात जैसी शक्ल अख्तियार की है। ज्यादा पीछे नहीं जाएं और बीते पांच साल के आंकड़ों में ही देखें तो पाकिस्तान 330 दफे आतंकी हमलों का शिकार हुआ है। ये स्थिति किसी भी मुल्क के लिए दुखद है। इस स्थिति के लिए भारत समेत दुनिया के तमाम देश पाकिस्तान को आगाह करते रहे हैं कि आतंक की पनाहगाह न बने। लेकिन पूरी दुनिया जानती है कि आज पाकिस्तान बारूद के ढेर पर खड़ा है। आए दिन कोई न कोई आतंकी संगठन पूरे देश के तंत्र को न सिर्फ आंख दिखाता है बल्कि शरीफ और सेना को ये अहसास करा देता है कि उनके कानून-कायदों से उनका कोई वास्ता नहीं है, वो जब चाहें, आतंक का नंगा नाच करने के लिए आजाद हैं। 
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पिछले इतिहास को देखते हुए ये बात कहना कि 'अब तो चेत जाओ पाकिस्तान', बेमानी लगती है। फिर भी इतिहास बेहतर भविष्य के लिए आगाह करता है। इसलिए जितना हो सके बेहतरी को लिए उम्मीद करना करना चाहिए और चैन-अमन के लिए पूरी ताकत झोंक देना चाहिए। 
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दुनिया में आतंकी हमलों के आंकड़े अलग हैं। लेकिन गूगल पर खंगालने पर मिलता है कि हमेशा से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हां में हां मिलाने वाले पाकिस्तान को आतंकी बारूद ने इतना छलनी किया है कि जान और माल का नुकसान तो हुआ ही है, मुफलिसी के भंवर में भी मुल्क इन्हीं हालातों के चलते जा धंसा है। यही वजह है कि कभी अमेरिका तो कभी चीन अपने हितों के लिए बिगड़ैंल बच्चे को गोद लेने को आतुर रहते हैं। आतंकी वारदातों की हालिया वारदातें आंकड़ों में इस प्रकार हैं। आगे की स्लाइड में देखें।
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आतंकी हमलों से कैसे निपटेगा पाकिस्तान?

Terrorist incidents in Pakistan since 2012
जनवरी से अब तक 7 बड़े हमलों ने किया छलनी
साल 2012 - 212 आतंकी हमले
साल 2013 - 74 आतंकी हमले
साल 2014 - 17 आतंकी हमले
साल 2015 - 20 आतंकी हमले
साल 2016 - 7 आतंकी हमले

ये आंकड़े पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में और विकिपीडिया पर आसानी से उपलब्ध हैं।

बात इसी साल की करें तो जनवरी से अब तक 7 बड़े हमले इस मुल्क को छलनी कर चुके हैं।

इसी साल 9 जनवरी को कोलदान और ग्वादर बंदरगाह के बीच आतंकियों की बिछाई लैंडमाइन की जद में तटरक्षकों का वाहन आ गया और धमाके से उसके परखच्चे उड़ गए। इस धमाके में तटरक्षक बल के 2 जवान मारे गए जबकि 3 घायल हुए थे। हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी ने ली थी।

बीती 13 जनवरी को पाकिस्तान के शहर क्वेटा के पास पोलियो सेंटर में हुए बम धमाके में 15 लोग मारे गए और कई घायल हुए।

बीती 20 जनवरी को बाचा खान विश्वविद्यालय में 20 लोग बंदूकधारी आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए।

सख्त कदम उठाने के लिए अब किसका इंतजार?

Terrorist incidents in Pakistan since 2012
बेगुनाहों के खून से रक्तरंजित पाक जमीन

6 फरवरी को पाकिस्तान का एक सरहदी सैन्य दस्ता आत्मघाती हमले का शिकार हो गया जिसमें 9 लोग मारे गए और कई घायल हुए।

इसी महीने की बात करें तो हाल ही में लाहौर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में हुआ आतंकी हमला महीने का तीसरा हमला है। इससे पहले 7 मार्च को चारसड्डा जिले में अंजाम दिए गए आत्मघाती धमाके में पुलिस के 3 सिपाहियों समेत 10 लोग मारे गए जबकि 14 अन्य घायल हो गए।

16 मार्च को पेशावर में सरकारी कर्मचारियों को ले जा रही बस में धमाका हुआ। 17 लोग मारे गए जबकि 53 लोग घायल हो गए। 

और अब महीने की 27 तारीख पाक बाशिदों के लिए मनहूस साबित हुई। ईसाई समुदाय के लोग ईस्टर मना रहे थे तभी लाहौर के गुलशन-ए-इकबाल पार्क में आत्मघाती हमले में 72 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे। घायलों की तादात ढाई सौ के आंकड़े को पार कर गई है। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जमातुल अहरार ने ली।

इन हमलों से कौन कितना छलनी हुआ ये बहस का एक मुद्दा हो सकता है लेकिन सब जानते हैं बेगुनाहों के खून को महज निजी कट्टरपंथ के चलते बहाया जाना ठीक नहीं है। सवाल यही है कि आतंक के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए पाकिस्तान को अब किसका इंतजार है?

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