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Hindi News ›   Crime ›   rape victim blaimed that district police commissioner raped her in his office

रेप पीड़िता का आरोप, शिकायत दर्ज करने की बजाय कमीश्नर ने किया दुष्कर्म

Tue, 08 Nov 2016 03:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 08 Nov 2016 03:21 PM IST
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rape victim blaimed that district police commissioner raped her in his office
डेमो पिक

अफगानिस्तान के जेरह में रेप का शिकार हुई लड़की को एक बार फिर से घिनौने अपराध का सामना करना पड़ा। पीड़िता के मुताबिक, वो शिकायत करने के लिए पुलिस के पास गई, तो  पुलिस कमिश्नर ने उसके साथ रेप की घटना को अंजाम दिया। मीडिया खबरों के मुताबिक पीड़िता की उम्र 18 साल है। इससे पहले पीड़िता के साथ नॉर्थ अफगानिस्तान के बल्ख में दो आरोपियों ने गनप्वाइंट पर रेप किया था। 

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हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक पीड़िता अपने पिता के साथ शिकायत के लिए कमीश्नर के ऑफिस पहुंची। पीड़िता ने बताया कि पिता को बाहर रहने के लिए कहा गया और इस बीच कमीश्नर ने अपने ऑफिस में ही उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं दोनों बाप-बेटी को मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दी गई।

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पीड़िता बोली खुद को जला डालूंगी

rape victim blaimed that district police commissioner raped her in his office
रेप - फोटो : DEMO Pics

पिता ने कहा, मेरी बेटी ने खुद को जला डालने की धमकी दी है, क्योंकि वह अपने साथ हुए दर्दनाक हादसे से काफी परेशान है और वह लोगों से नजर भी नहीं मिला पा रही है। मीडिया में खबरें आने के बाद अफगानिस्तान के अर्टानी जनरल ने गंभीर जांच का भरोसा दिया है।

दो बार रेप का शिकार हुई पीड़िता काफी डरी हुई है और उसने कहा कि वह तब तक काबुल से घर नहीं लौटेगी जब तक कमीश्नर को ड्यूटी से हटा नहीं दिया जाता। हालांकि, आरोपों में घिरे अधिकारी ने अपनी सफाई में कहा कि मैं एक सच्चा पुलिस अधिकारी हूं और वह मेरी बेटी की उम्र की है।

10 में से 8 महिलाओं का होता है रेप

rape victim blaimed that district police commissioner raped her in his office
रेप - फोटो : DEMO Pics

बताया जाता है कि अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ अपराध की समस्याएं आम हो गई हैं। एक रिसर्च में सामने आया कि 10 में से 8 महिलाएं रेप, यौन शोषण, घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं, लेकिन पूरे साल में कुछ हजार केस ही दर्ज होते हैं। इतना ही नहीं सांस्कृतिक और सामाजिक कारणों की वजह से अफगान महिला न्याय के लिए आवाज नहीं उठा पाती है। अगर कोई महिला शिकायत दर्ज भी कराती है तो उसके न्याय मिलने की उम्मीद न के बराबर मानी जाती है।

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