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ZSI: वैज्ञानिकों ने खोजी खून चूसने वाली मक्खियों की 23 प्रजातियां, मवेशियों में फैलाती हैं ब्लू टंग पशुधन
Thu, 23 Jan 2025 06:45 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
एजेंसी, कोलकाता
एजेंसी, कोलकाता
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Thu, 23 Jan 2025 06:45 AM IST
सार
जेडएसआई की निदेशक धृति बनर्जी से बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक, स्थानीय रूप से भूसी मक्खियां कहलाने वाले ये कीड़े क्यूलिकोइड्स वंश के हैं। इनकी खानपान की आदतें मच्छरों जैसी ही होती हैं।
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विस्तार
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के शोधकर्ताओं ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में खून चूसने वाली मक्खियों की 23 प्रजातियों की खोज की है। इनमें 13 ऐसी प्रजातियां भी शामिल हैं जो भारत में पहले कभी नहीं देखी गईं। हाल ही में पैरासाइट्स एंड वेक्टर्स पत्रिका में प्रकाशित जेडएसआई का यह अध्ययन इस क्षेत्र में इस तरह के कीड़ों का बड़े पैमाने पर किया गया पहला सर्वेक्षण है।
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जेडएसआई की निदेशक धृति बनर्जी से बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक, स्थानीय रूप से भूसी मक्खियां कहलाने वाले ये कीड़े क्यूलिकोइड्स वंश के हैं। इनकी खानपान की आदतें मच्छरों जैसी ही होती हैं। बनर्जी ने खासकर इस क्षेत्र के एक अहम पर्यटन स्थल के महत्व को देखते हुए पशुओं को मक्खियों की इन प्रजातियों से बचाने के लिए नियमित निगरानी और नियंत्रण के तरीके अपनाने पर जोर दिया।
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उन्होंने कहा, इन क्यूलिकोइड्स प्रजातियों की मौजूदगी खास तौर से ब्लू टंग वायरस फैलाने के लिए जिम्मेदार प्रजातियों पर नजर रखने की जरूरत है। ये मुख्य रूप से भेड़, बकरी जैसे मवेशियों के साथ-साथ हिरण जैसे जंगली जानवरों का खून पीती हैं।
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पशुधन, खेती और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा
ब्लू टंग बीमारी पशुओं के लिए खासी घातक हो सकती है। यह पशुपालन में बड़े आर्थिक नुकसान की वजह बन सकती हैं। इन मक्खियों की फैलाए जाने वाली ब्लू टंग बीमारी में पशुओं और जंगली जानवरों की जीभ नीले रंग की हो जाती है। इसके साथ उनको बुखार हो जाता है। चेहरे में सूजन और अत्यधिक लार टपकती है। इससे ग्रस्त जानवरों की मौत तक सकती है। यह बीमारी पशुधन, खेती और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है।
17 प्रजातियां इंसानों को भी बनाती हैं शिकार
2022 और 2023 में किए गए अध्ययन में खुलासा हुआ कि खून चूसने वाली मक्खियों की खोजी गई 23 प्रजातियों में से 17 इंसानों को भी काटती हैं, हालांकि अब तक इनके काटने से इंसानों में कोई बीमारी फैलने की सूचना नहीं है।
वैज्ञानिक मक्खियों की जनसंख्या और आनुवंशिकता पर भी रख रहे नजर
जेडएसआई के डिप्टेरा (मक्खी) अनुभाग के प्रभारी अधिकारी डॉ अतानु नस्कर ने कहा कि रोग फैलाने में इन कीड़ों की भूमिका को समझने के लिए पूरे द्वीपसमूह का व्यवस्थित सर्वेक्षण जरूरी है। वहीं, अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं में से एक वरिष्ठ शोधकर्ता कौस्तव मुखर्जी ने कहा, हमें उम्मीद है कि जैसे-जैसे हम अपना सर्वेक्षण जारी रखेंगे, हमें और क्यूलिकोइड्स प्रजातियां मिलेंगी। इसके अलावा हम इन मक्खियों की जनसंख्या और आनुवंशिकता का भी अध्ययन कर रहे हैं।