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Supreme Court: 'आपने अदालत का माहौल खराब किया', सुप्रीम कोर्ट की वकील को फटकार, पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया

Tue, 22 Apr 2025 01:55 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 22 Apr 2025 01:55 PM IST
सार

पारिवारिक विवाद के एक मामले में वकील ने दायर याचिका को वापस लेने की कोर्ट से अनुमति मांगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने संविधान अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके अदालत का माहौल खराब किया है। कोर्ट ने वकील पर पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।

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'You spoiled the atmosphere of the court', Supreme Court reprimanded the lawyer, imposed a fine of Rs 5 lakh
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक विवाद से जुड़े एक मामले में विपक्षी को दी गई राहत पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका को वापस लेने के अनुरोध पर वकील को कड़ी फटकार लगाई। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील से कहा कि आपने संविधान अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करके अदालत का माहौल खराब किया है। कोर्ट ने वकील पर पांच लाख रुपये जुर्माना भी लगाया।

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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अधिवक्ता संदीप तोदी को चार सप्ताह के भीतर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के खाते में राशि जमा करने के लिए कहा। कोर्ट ने याचिका को छह सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या धनराशि जमा की गई है?
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जस्टिस विक्रम नाथ ने वकील से कहा कि आपने इस अदालत का माहौल खराब कर दिया है, क्योंकि कोई भी विवेकशील वकील संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी तुच्छ याचिका दायर नहीं करेगा। संविधान का अनुच्छेद 32 सांविधानिक उपचारों के अधिकार की गारंटी देता है। इसके तहत यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है तो वह अपने मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।


पीठ ने कहा कि यदि हम याचिका को सरलता से वापस लेने की अनुमति देते हैं तो इससे गलत संदेश जाएगा। इसके बाद पीठ ने वकील पर पांच लाख रुपये जुर्माना लगाते हुए उसे याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।

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वकील ने याचिका में पारिवारिक विवाद में एक आरोपी को दी गई राहत पर रोक लगाने की मांग की थी। 25 मार्च को दायर याचिका में फैमिली कोर्ट मुंबई के 25 सितंबर, 2019 के आदेश के मद्देनजर वर्तमान प्रतिवादी संख्या 4 नेहा तोदी उर्फ नेहा सीताराम अग्रवाल के पक्ष में दी गई सभी राहतों पर एकतरफा रोक लगाने की मांग की गई। याचिका में केंद्र, मुंबई की एक पारिवारिक अदालत और बॉम्बे उच्च न्यायालय को प्रतिवादी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान वकील ने याचिका को वापस लेने की अपील की थी। 

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