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पशुपालक जब चाहेंगे तो घर-घर में पैदा होगी बछिया
ब्यूरो/ अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 14 Apr 2016 03:33 AM IST
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पशुपालक जब चाहेंगे तो उनकी गाय को बछिया ही होगी। एबीएस कंपनी (बंगलूरू) ने अलग-अलग प्रजाति के सांड़ के सीमेन (वीर्य) से एक्स क्रोमोसोम और वाई क्रोमोसोम को अलग करने में सफलता पाई है।
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बछिया के लिए एक्स क्रोमोसोम (गुणसूत्र) को अलग कर विशेष तकनीक से गाय के एक्स क्रोमोसोम से मिलाया जाता है। रिजल्ट से पशु डॉक्टर बेहद उत्साहित हैं। बाराबंकी, लखीमपुर खीरी, इटावा में अगले महीने से पशु विभाग के जरिये यह मिलने लगेगा। फिलहाल इसकी कीमत 16 सौ रुपये रखी गई है। पुणे में सरकारी लैब खोलने पर काम चल रहा है।
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अभी पशुओं के गर्भाधान के लिए सामान्य सीमेन का इस्तेमाल होता है। रायबरेली के एनिमल ब्रीडिंग सेंटर में तैयार इस सीमेन में एक्स व वाई क्रोमोसोम को अलग करने की व्यवस्था नहीं है। पैरा वेट (पशु कार्यकर्ता) विशेष कंटेनर में रखे सीमेन को जरूरत के हिसाब से गाय के क्रोमोसोम से मिलाते हैं।
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यह होता है समय
गाय जब गर्भाधान को तैयार होती है तो आवाज करेगी और बार-बार पेशाब करेगी। इसके 24 घंटे के भीतर ही सीमेन डाला जाता है, क्योंकि उस समय ओवरी से अंडा बाहर होता है।
दो प्रजाति की गायों में प्रयोग शुरू
जर्सी और होलिस्टिक फ्रीजियन प्रजाति की गायों के लिए सीमेन बनाए जा रहे हैं। देसी गाय में दूध देने की क्षमता कम होने के कारण फिलहाल इस प्रजाति पर काम नहीं चल रहा है। एबीएस कंपनी, साहीवाल, हरियाणवी आदि प्रजाति की गायों के सीमेन तैयार करने में लगी है। भैंस के सीमेन के लिए प्रयोग हो रहा है।
दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा
एक्स क्रोमोसोम वाले सीमेन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी पशुधन विकास लखनऊ कार्यालय के साथ जिले के कार्यालयों से संपर्क किया जा सकता है। इसका रिजल्ट 95 फीसदी तक पॉजिटिव रहा है। कानपुर समेत 72 जिलों में जल्द ही काम शुरू होगा। इससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ आवारा जानवरों की संख्या में कमी आएगी क्योंकि ज्यादातर लोग सांड़ों को छोड़ देते हैं।
डॉ. बलभद्र सिंह यादव, सीईओ पशुधन विकास