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WTO: विश्व व्यापार संगठन की बैठक में बड़े मुद्दों पर नहीं बनी सहमति; कृषि समेत कई मुद्दों पर जारी रहेगा मंथन
Sun, 29 Mar 2026 09:27 PM IST
Himanshu Singh Chandel
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Sun, 29 Mar 2026 09:27 PM IST
सार
डब्ल्यूटीओ की मंत्री स्तरीय बैठक में मछली सब्सिडी, ई-कॉमर्स, निवेश और कृषि जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन पूरी सहमति नहीं बन पाई। भारत ने मछुआरों और किसानों के हितों की रक्षा पर जोर दिया। ई-कॉमर्स और निवेश पर अलग-अलग राय सामने आई।
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विश्व व्यापार संगठन की बैठक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
विश्व व्यापार संगठन यानी वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन की मंत्री स्तरीय बैठक में कई बड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि पूरी सहमति नहीं बन पाई। अफ्रीका के कैमरून में हुई इस बैठक में सदस्य देशों ने आगे भी बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। इस बैठक को एमसी14 कहा जा रहा है। इसमें वैश्विक व्यापार से जुड़े अहम फैसलों की दिशा तय की गई।
इस बैठक में मछली सब्सिडी, ई-कॉमर्स, कृषि और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। सभी देशों ने माना कि इन मुद्दों पर अभी और बातचीत की जरूरत है। बैठक के दौरान विवाद समाधान प्रणाली में सुधार पर भी चर्चा हुई, जिसे सदस्य देशों ने प्राथमिकता बताया, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इस पर आगे काम बाद में करने की बात कही गई।
क्या मछली सब्सिडी पर बनी सहमति?
मछली सब्सिडी को लेकर कुछ प्रगति जरूर हुई है। कई देशों ने इस समझौते को लागू करने का स्वागत किया। अब तक 119 देश इस समझौते को स्वीकार कर चुके हैं। भारत ने साफ कहा कि वह ऐसा समझौता चाहता है जो गरीब मछुआरों के हितों की रक्षा करे और उनके भविष्य को सुरक्षित रखे। इस मुद्दे पर अभी भी कुछ बातें बाकी हैं, जिन पर आगे बातचीत होगी।
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ये भी पढ़ें- Kerosene Rules: ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, केरोसिन नियमों में दी ढील; सप्लाई बढ़ाने का रास्ता खोला
ई-कॉमर्स पर क्या रहा रुख?
ई-कॉमर्स को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय सामने आई। कुछ देशों ने डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही, जबकि कुछ देशों ने सावधानी बरतने को कहा। कस्टम ड्यूटी पर रोक को जारी रखने पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया। सभी देशों ने माना कि यह भविष्य के विकास के लिए अहम मुद्दा है और इस पर और बातचीत जरूरी है।
निवेश समझौते पर भारत ने क्या कहा?
निवेश सुविधा समझौते को लेकर भारत ने साफ कहा कि निवेश को व्यापार का हिस्सा नहीं माना जा सकता। भारत ने चेतावनी दी कि ऐसे समझौते बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। वहीं बांग्लादेश ने इस समझौते में शामिल होने का फैसला किया, जिससे इसके समर्थक देशों की संख्या बढ़ गई है।
कृषि मुद्दों पर क्यों बनी रही दूरी?
कृषि को लेकर बैठक में लंबी चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं हो सका। भारत ने कहा कि कृषि करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा है। भारत ने खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक भंडारण और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। विकासशील देशों ने भी इन मुद्दों पर जल्द समाधान की जरूरत बताई।
बैठक के अंत में यह तय हुआ कि सभी मुद्दों पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी। सदस्य देश जिनेवा में बैठकर इन पर आगे बातचीत करेंगे। हालांकि कुछ मामलों में नजदीकी आई है, लेकिन पूरी सहमति अभी दूर है। डब्ल्यू ने साफ किया कि वैश्विक व्यापार के भविष्य के लिए इन मुद्दों पर समाधान जरूरी है।
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इस बैठक में मछली सब्सिडी, ई-कॉमर्स, कृषि और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। सभी देशों ने माना कि इन मुद्दों पर अभी और बातचीत की जरूरत है। बैठक के दौरान विवाद समाधान प्रणाली में सुधार पर भी चर्चा हुई, जिसे सदस्य देशों ने प्राथमिकता बताया, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इस पर आगे काम बाद में करने की बात कही गई।
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क्या मछली सब्सिडी पर बनी सहमति?
मछली सब्सिडी को लेकर कुछ प्रगति जरूर हुई है। कई देशों ने इस समझौते को लागू करने का स्वागत किया। अब तक 119 देश इस समझौते को स्वीकार कर चुके हैं। भारत ने साफ कहा कि वह ऐसा समझौता चाहता है जो गरीब मछुआरों के हितों की रक्षा करे और उनके भविष्य को सुरक्षित रखे। इस मुद्दे पर अभी भी कुछ बातें बाकी हैं, जिन पर आगे बातचीत होगी।
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ई-कॉमर्स पर क्या रहा रुख?
ई-कॉमर्स को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय सामने आई। कुछ देशों ने डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही, जबकि कुछ देशों ने सावधानी बरतने को कहा। कस्टम ड्यूटी पर रोक को जारी रखने पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया। सभी देशों ने माना कि यह भविष्य के विकास के लिए अहम मुद्दा है और इस पर और बातचीत जरूरी है।
निवेश समझौते पर भारत ने क्या कहा?
निवेश सुविधा समझौते को लेकर भारत ने साफ कहा कि निवेश को व्यापार का हिस्सा नहीं माना जा सकता। भारत ने चेतावनी दी कि ऐसे समझौते बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर कर सकते हैं। वहीं बांग्लादेश ने इस समझौते में शामिल होने का फैसला किया, जिससे इसके समर्थक देशों की संख्या बढ़ गई है।
कृषि मुद्दों पर क्यों बनी रही दूरी?
कृषि को लेकर बैठक में लंबी चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं हो सका। भारत ने कहा कि कृषि करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा मुद्दा है। भारत ने खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक भंडारण और किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग की। विकासशील देशों ने भी इन मुद्दों पर जल्द समाधान की जरूरत बताई।
बैठक के अंत में यह तय हुआ कि सभी मुद्दों पर आगे भी चर्चा जारी रहेगी। सदस्य देश जिनेवा में बैठकर इन पर आगे बातचीत करेंगे। हालांकि कुछ मामलों में नजदीकी आई है, लेकिन पूरी सहमति अभी दूर है। डब्ल्यू ने साफ किया कि वैश्विक व्यापार के भविष्य के लिए इन मुद्दों पर समाधान जरूरी है।
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