फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Worrying: Researchers claim - babies are being born prematurely, death figures have also increased rapidly

चिंताजनक: शोधकर्ताओं का दावा-समय से पहले शिशुओं का हो रहा जन्म, मौतों के आंकड़े भी तेजी से बढ़े

Sat, 06 Jul 2024 06:25 AM IST
मेघा झा अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: मेघा झा Updated Sat, 06 Jul 2024 06:25 AM IST
सार

वैश्विक स्तर पर हर दो सेकंड में एक नवजात का वक्त से पहले जन्म हो रहा है और हर 40 सेकंड में इनमें से एक की मौत हो जाती है। ये खुलासा फ्लिंडर्स विवि से जुड़े शोधकर्ताओं ने किया है।

विज्ञापन
Worrying: Researchers claim - babies are being born prematurely, death figures have also increased rapidly
शिशु प्रतीकात्मक - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत में हर घंटे औसतन 345 नवजातों का जन्म वक्त (प्रीटर्म बर्थ) से पहले हो रहा है। वैश्विक स्तर पर हर दो सेकंड में एक नवजात का वक्त से पहले जन्म हो रहा है और हर 40 सेकंड में इनमें से एक की मौत हो जाती है। ये खुलासा फ्लिंडर्स विवि से जुड़े शोधकर्ताओं ने किया है। शोध के नतीजे साइंस ऑफ द टोटल एनवायरमेंट में प्रकाशित हुए हैं। इसके मुताबिक जलवायु परिवर्तन इसकी अहम वजह है।  
विज्ञापन


जलवायु में आता बदलाव सीधे तौर पर बच्चों की सेहत से जुड़ा है। तापमान में बढ़ोतरी होने से न केवल प्रीटर्म बर्थ, बल्कि मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। वहीं, जर्मनी के पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इंपैक्ट रिसर्च के शोधकर्ताओं ने 29 निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर किए गए एक शोध के मुताबिक, चार प्रतिशत से अधिक नवजातों की मौत जलवायु परिवर्तन की वजह से होने वाले अधिकतम और न्यूनतम तापमान से जुड़ी हैं। शोध के निष्कर्ष नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित हुए है।  
विज्ञापन


18 साल में 1.75 लाख नवजातों की मौत
शोधकर्ताओं के मुताबिक, 29 निम्न और मध्यम आय वाले देशों में चार फीसदी में से औसतन 1.5 फीसदी सालाना नवजात मौतें अत्यधिक तापमान से जुड़ी थीं। वहीं, करीब तीन फीसदी अत्यधिक ठंड से हुई थीं। इसके अलावा, 18 साल की इस अवधि में नवजात शिशुओं में गर्मी से जुड़ी 32 फीसदी मौतों के लिए जलवायु परिवर्तन जवाबदेह था। इसका मतलब है कि इस दौरान नवजात शिशुओं की गर्मी से जुड़ी कुल मौतों में से 1.75 लाख से अधिक मौतें जलवायु परिवर्तन के असर से जुड़ी थीं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह कहते हैं शोध के आंकड़े 
- जलवायु परिवर्तन की वजह से 2001-2019 के दौरान औसत सालाना तापमान में 0.9 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
- नवजात शिशुओं की शरीर तापमान नियंत्रण की क्षमता अधूरी होती है। उनका शरीर गर्मी पर काबू पाने के लिए पूरी तरह से विकसित नहीं होता। उच्च चयापचय और पसीने की दर कम होने से उन्हें शरीर से अतिरिक्त गर्मी को निकालना मुश्किल हो जाता है। 
- शोधकर्ताओं ने बताया कि उप-सहारा अफ्रीकी देशों में अत्यधिक तापमान की वजह से नवजात शिशुओं की मौतों  पर ग्लोबल वार्मिंग के सबसे अधिक असर देखा गया।
- पाकिस्तान,माली, सिएरा लियोन व नाइजीरिया में तापमान से जुड़ी नवजात शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक थी। इनमें प्रति एक लाख जीवित जन्मों में 160 से अधिक मौतें बढ़े हुए तापमान से हुईं।

- 2019 में दुनिया में 24 लाख नवजात शिशु मौतें हुईं। इनमें  90 फीसदी से अधिक नवजात मृत्यु निम्न और मध्यम आय वाले देशों खासकर उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में हुईं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed