फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Worrying Global figures: 2.30 crore affected by metal mining pollution, study in Science Journal reveals

वैश्विक आंकड़े चिंताजनक: धातु खनन प्रदूषण से 2.30 करोड़ प्रभावित, साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में खुलासा

Tue, 26 Sep 2023 05:00 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 26 Sep 2023 05:00 AM IST
सार

साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया है कि दुनियाभर में नदियों और बाढ़ के मैदानों पर धातु खनन के प्रदूषण से जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है।

विज्ञापन
Worrying Global figures: 2.30 crore affected by metal mining pollution, study in Science Journal reveals
खनन - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

धातु खनन के प्रदूषण से दुनियाभर में करीब 2.30 करोड़ लोग प्रभावित हो रहे हैं। एक अध्ययन में पता चला है कि खनन से निकलने वाला जहरीला कचरा मैदानी क्षेत्रों में फैल रहा है। साइंस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया है कि दुनियाभर में नदियों और बाढ़ के मैदानों पर धातु खनन के प्रदूषण से जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है।

विज्ञापन

 

शोधकर्ताओं ने करीब 1,85,000 धातु खदानों के भू-संदर्भित वैश्विक डाटा का अध्ययन किया है। इसमें सीसा, जस्ता, तांबा और आर्सेनिक जैसे संभावित हानिकारक संदूषकों को देखा गया, जो खनन कार्यों से नीचे की ओर ले जाए जाते हैं और अक्सर लंबे समय तक नदी और बाढ़ के मैदानों में जमा होते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

यूके स्थित लिंकन विश्वविद्यालय के प्रो. मैकलिन ने कहा, नदी और मैदानी भागों में खदान का कचरा बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए बड़ा संकट है। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष बताते हैं कि करीब 2.30 करोड़ लोग उन प्रभावित बाढ़ क्षेत्रों में रहते हैं, जहां खनन का कचरा सबसे ज्यादा है। इनमें 57 लाख से ज्यादा पशु भी शामिल हैं और यह पूरा क्षेत्र करीब 65,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक सिंचित भूमि को कवर करता है। 

विज्ञापन

त्वचा व सांस के लिए हानिकारक
शोधकर्ताओं ने कहा कि मनुष्यों के लिए इन दूषित धातुओं के संपर्क में आने के विभिन्न रास्ते मौजूद हैं। इनमें से एक त्वचा के संपर्क में आना है जिसकी वजह से आकस्मिक अंतर्ग्रहण, दूषित धूल की वजह से सांस लेने में कठिनाई और दूषित पानी की वजह से जहरीले रसायनों का शरीर तक प्रवेश करना है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्थिति भारत जैसे उन तमाम देशों में ज्यादा गंभीर है जो निम्न व मध्यम आय वर्गीय हैं। ऑस्ट्रेलिया में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डीना केम्प ने कहा कि खनन लंबी अवधि में डाउनस्ट्रीम को व्यापक नुकसान पहुंचा सकता है।
 

बहुत से लोग खनन और धातुओं से लाभान्वित होते हैं, लेकिन हमें प्रभावित क्षेत्रों में रहने और काम करने वाले लोगों की रक्षा भी करना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed