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चिंताजनक : यलो फंगस नहीं फ्यूलिगो सेप्टिका बना रहा मवाद

Tue, 25 May 2021 07:21 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 25 May 2021 07:21 AM IST
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सार
  • प्रोफेसर विजयनाथ मिश्रा बताते हैं, यलो फंगस मानव शरीर से लेकर पूरे वातावरण में मौजूद है। यह एक तरह का फ्यूलिगो सेप्टिका है ये फूटे हुए कच्चे अंडे की तरह दिखता है
  • फ्यूलिगो सेप्टिका सड़े फल, सड़े हुए खाने के साथ जमीन पर पड़ा हुआ मिलता है। इससे भी शरीर से अचानक मवाद निकलने की तकलीफ शुरू हो सकती है
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Worrying: Fueligo Septica is making pus not yellow fungus
मरीज की रिपोर्ट में दिखा यलो फंगस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश कोरोना महामारी के साथ ब्लैक फंगस से जूझ रहा है। पटना में कुछ दिन पहले यलो फंगस की पुष्टि हुई। अब गाजियाबाद में यलो (पीला) फंगस मिला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यलो फंगस ब्लैक और व्हाइट से भी घातक और जानलेवा है। इसके लक्षण भी इन दोनों से पूरी तरह अलग है।



इसलिए कहते हैं यलो फंगस

टूटे हुए कच्चे अंडे की तरह दिखता है फंगस 
वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विजयनाथ मिश्रा बताते हैं - 
फंगस मानव शरीर से लेकर पूरे वातावरण में मौजूद है। हालांकि यलो फंगस असल में फंगस नहीं है। वे बताते हैं कि यह एक तरह का फ्यूलिगो सेप्टिका है। यह फूटे हुए कच्चे अंडे की तरह दिखता है।


इसकी चपेट में आने वाले व्यक्ति की आंख और दांत के साथ बलगम में मवाद (पस) आता है। यह पस कुछ ऐसा ही होता है जैसे कुत्ते की उल्टी होती है। पस का रंग पीला होने के कारण इसे कोराना वायरस के दौर में ब्लैक और व्हाइट फंगस के बाद यलो फंगस कहा जा रहा है।
 

एक कोशिका से जीवन चलाता प्लाज्मोडियम
इसी का एक छोटा भाग प्लाज्मोडियम जो ऐसी ऐसा जीवाणु है जो केवल एक कोशिका से अपना जीवन चलाता है यह आपस में मिलकर एक बहु कोशिका संरचना भी बनाते हैं जो फंगस की तरह दिखता है शरीर में इसका दायरा बढ़ने से अवस्था के अस्थमा के की के साथ नाक में सूजन और नाक बहने की तकलीफ हो सकती है।

ये रखें सावधानी

  • फ्यूलिगो सेप्टिका सड़े फल, सड़े हुए खाने के साथ जमीन पर पड़ा हुआ मिलता है। इससे भी शरीर से अचानक मवाद निकलने की तकलीफ शुरू हो सकती है।
  • शरीर से पस निकलने का मतलब है कि शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान। सीटी स्कैन के जरिए इसे देखा जा सकता है 
  • संक्रमण की स्थिति बढ़ने से रोगी की अचानक मौत भी हो सकती है।

इंजेक्शन-ऑपरेशन ही इलाज
फंगल इंफेक्शन के लिए अम्फोटोरीसीन-बी इंजेक्शन के साथ एंटी फंगल दवाओं का इस्तेमाल होता है। संक्रमण शरीर के भीतर है या जिस हिस्से में पस जमा है उसे ऑपरेशन के जरिए निकाला जाता है।


शरीर में दस ट्रिलियन कोशिकाएं 
मानव शरीर में दस ट्रिलियन कोशिकाएं होती है। इसमें से केवल एक फीसदी कोशिका से शरीर है। बाकी 99 फीसदी कोशिकाएं फंगस, बैक्टीरिया होते हैं। जिनका जीवन में महत्व योगदान है। यह विषाणु को खत्म करती हैं। शरीर को सामान्य बनाने मदद करती हैं।

एंटीबायोटिक कारण तो नहीं? 
डॉक्टर मिश्रा बताते हैं कि महामारी में लोग थोड़ी सी दिक्कत पर एजिथ्रोमाइसिन, डाक्सीसाइक्लीन और सिफेक्जिन जैसी एंटीबायोटिक खा रहे हैं। अस्पतालों में इससे भी हाई डोज की एंटीबायोटिक दी जा रही है। एंटीबायोटिक से हेल्दी बैक्टीरिया को भी नुकसान होता है।


 

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