फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Worrying: Air pollution is more dangerous than we thought News In Hindi

चिंताजनक: वायु प्रदूषण हमारी समझ से कहीं ज्यादा खतरनाक, शोध में खुलासा अनुमान से काफी अधिक हैं हानिकारक कण

Fri, 25 Apr 2025 07:56 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 25 Apr 2025 07:56 AM IST
सार

शोधकर्ताओं के अनुसार लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से लोगों को सांस संबंधी बीमारियों, हृदय रोगों, मधुमेह, यहां तक कि मस्तिष्क संबंधी समस्याओं जैसे डिमेंशिया तक का खतरा बढ़ जाता है। अब तक वैज्ञानिक इन कणों को फिल्टर पर इकट्ठा कर विश्लेषण करते थे, जिसमें कई दिन या हफ्तों का समय लगता था।

विज्ञापन
Worrying: Air pollution is more dangerous than we thought News In Hindi
वायु प्रदूषण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एआई

विस्तार

हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में अत्यधिक हानिकारक और प्रतिक्रियाशील कणों की मात्रा पहले के अनुमानों से काफी अधिक है।  यह चौंकाने वाला खुलासा स्विट्जरलैंड के बेसल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक महत्वपूर्ण शोध में हुआ है। यह शोध न केवल वायु गुणवत्ता मापने की मौजूदा पद्धतियों पर सवाल उठाती है बल्कि इससे स्वास्थ्य नीतियों और प्रदूषण नियंत्रण रणनीतियों में आमूलचूल बदलाव की आवश्यकता भी उजागर होती है।
विज्ञापन


शोधकर्ताओं के अनुसार लंबे समय तक प्रदूषित हवा में सांस लेने से लोगों को सांस संबंधी बीमारियों, हृदय रोगों, मधुमेह, यहां तक कि मस्तिष्क संबंधी समस्याओं जैसे डिमेंशिया तक का खतरा बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार पार्टिकुलेट मैटर के अत्यधिक संपर्क से हर साल विश्वभर में करीब 60 लाख लोगों की समय से पहले मौत हो जाती है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- ED: जेनसोल के परिसरों को ईडी ने खंगाला, जग्गी भाइयों पर भ्रष्टाचार और धन के डायवर्जन का है आरोप
विज्ञापन
विज्ञापन


पारंपरिक मापन विधियों से नहीं हो पता सटीक आकलन
अब तक वैज्ञानिक इन कणों को फिल्टर पर इकट्ठा कर विश्लेषण करते थे, जिसमें कई दिन या हफ्तों का समय लगता था। लेकिन नई स्टडी ने दिखाया है कि यह तरीका प्रभावी नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरओएस जैसे अति-प्रतिक्रियाशील यौगिक कुछ ही मिनटों या घंटों में नष्ट हो जाते हैं। इस कारण पारंपरिक मापन विधियों से इन हानिकारक तत्वों की वास्तविक उपस्थिति का सटीक आकलन नहीं हो पाता था।

ये भी पढ़ें:- राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस: पीएआई सूचकांक में गुजरात शीर्ष पर, दूसरे स्थान पर तेलंगाना; महाराष्ट्र भी आगे

नई तकनीक से मिली सच्चाई की झलक
बेसल विश्वविद्यालय की टीम ने एक अभिनव और संवेदनशील मापन प्रणाली विकसित की है, जो हवा से सीधे कणों को तरल माध्यम में एकत्र करती है और रासायनिक प्रतिक्रियाओं के माध्यम से उनकी सक्रियता को तुरंत मापती है। इस प्रक्रिया में उत्पन्न प्रतिदीप्ति(फ्लुओरेसेंस) संकेतों के माध्यम से यह निर्धारित किया गया कि 60 से 99 फीसदी प्रतिक्रियाशील कण पारंपरिक मापन के पहले ही खत्म हो जाते हैं। शोध के निष्कर्षों से पता चला कि पहले किए गए विश्लेषणों में हानिकारक कणों की संख्या काफी कम आंकी गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed