विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस 2019: विश्वसनीय जानकारी के बिना अधूरा है हर देश का लोकतंत्र
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
3 मई को दुनिया भर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को महासम्मेलन की अनुशंसा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की थी। तभी से हर साल 3 मई को ये दिन मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम है 'लोकतंत्र के लिए मीडिया: फर्जी खबरों और सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता एवं चुनाव'।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
3 मई को दुनिया भर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। यूनेस्को महासम्मेलन की अनुशंसा के बाद दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाने की घोषणा की थी। तभी से हर साल 3 मई को ये दिन मनाया जाता है। इस बार इसकी थीम है 'लोकतंत्र के लिए मीडिया: फर्जी खबरों और सूचनाओं के दौर में पत्रकारिता एवं चुनाव'।
हालांकि हर साल इसकी एक अलग थीम होती है। बीते साल फर्जी खबरों का मुद्दा दुनिया के सामने एक चुनौती बनकर उभरा था। जिससे ना केवल भारत बल्कि दुनियाभर के देशों को कई संकटों का सामना करना पड़ा। फर्जी खबरों का असर ना केवल चुनाव पर पड़ता है। बल्कि इससे अपराधों में भी वृद्धि होती है। लेकिन फर्जी खबरों की परेशानी से निपटने के लिए दुनियाभर की मीडिया ने बड़े कदम उठाए हैं।
यह भी पढ़ेंः बम धमाके की कवरेज करने श्रीलंका गया भारतीय पत्रकार गिरफ्तार
आज के दौर में आप किसी भी मीडिया प्लैटफॉर्म पर देख सकते हैं, वहां आपको अलग से एक ऐसा कॉलम मिल जाएगा, जो फर्जी खबरों की पोल खोलता है। सोशल मीडिया के दौर में फर्जी खबरें तेजी से फैलती हैं और बड़ी संख्या में लोग इनपर विश्वास भी कर लेते हैं। लेकिन मीडिया संस्थानों की उस फर्जी खबर पर की गई पड़ताल आने वाली परेशानी को वक्त पर खत्म कर देती है।
क्यों मनाया जाता है ये दिन?
इस दिवस का उद्देश्य प्रेस की आजादी के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है। साथ ही ये दिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने और उसका सम्मान करने की प्रतिबद्धता की बात करता है। बता दें इस दिवस की मेजबानी हर साल अलग-अलग देश करते हैं।
प्रेस की आजादी के महत्व के लिए दुनिया को आगाह करने वाला ये दिन बताता है कि लोकतंत्र के मूल्यों की सुरक्षा और उसे बहाल करने में मीडिया अहम भूमिका निभाता है। इस कारण सरकारों को पत्रकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
पहली बार कब मनाया गया ये दिन?
अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए साल 1991 में पहल की थी। उन पत्रकारों ने 3 मई को प्रेस की आजादी के सिद्धांतों से संबंधित एक बयान जारी किया था, जिसे डिक्लेरेशन ऑफ विंडहोक के नाम से जाना जाता है। जिसके बाद पहली बार 1993 को संयुक्त राष्ट्र ने ये दिवस मनाने की घोषणा की।
इस बार विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का आयोजन इथोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में होगा। इस कार्यक्रम में यूनेस्को और इथोपिया सरकार भी योगदान करेंगे। इस दौरान उन चुनौतियों पर प्रकाश डाला जाएगा, जिनका सामना चुनावों के दौरान मीडिया को करना पड़ता है। साथ ही शांति और समृद्धि को बहाल करने में मीडिया की क्या भूमिका है, इसपर भी चर्चा की जाएगी।
भारत में भी इस मौके पर स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया के महत्व पर सेमिनारों और परिचर्चाओं का आयोजन किया जाएगा।