विश्व तंबाकू निषेध दिवस: हमें भोजन की जरूरत, तंबाकू की नहीं, भारत की 28 फीसदी से ज्यादा आबादी को लत
तंबाकू सेवन में भारत दुनिया की राजधानी कहा जाने लगा है। देश में सालाना 13.50 लाख लोगों की मौत तंबाकू उत्पादों की वजह से हो रही है। यह आंकड़ा कोरोना महामारी सेे बीते तीन साल में हुई मौतों के लगभग तीन गुना है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों को बढ़ावा देने में तंबाकू सबसे आगे है। इन भयावह आंकड़ों के बावजूद लोगों का शौक खत्म होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। परीक्षित निर्भय की रिपोर्ट...
विस्तार
तंबाकू कैपिटल बनना दुर्भाग्य
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पल्मोनरी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जीसी खिल्लानी कहते हैं, यह हमारा दुर्भाग्य है कि हम दुनिया में तंबाकू कैपिटल की पहचान बनते जा रहे हैं। देश की 28.6 फीसदी आबादी धूम्रपान के अलावा गुटखा, खैनी, पान मसाला का शौक रखती है। तंबाकू का उपयोग आमतौर पर किशोरावस्था में शुरू होता है, लेकिन कुछ वर्ष बाद इसके दुष्प्रभाव सेवन करने वाले का जीवन पूरी तरह से बर्बाद करने लगते हैं। तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह नामुमकिन कतई नहीं है। इसके लिए जरूरी है बस आत्मविश्वास और कुछ दवाओं का सहारा।
देर से आती है समझ फिर भी सबक नहीं
अक्सर तंबाकू का सेवन करने वाले इसके दुष्प्रभावों के बारे में देर से समझ पाते हैं। इन्हें तब अहसास होता है, जब इसका बुरा असर उनकी जिंदगी या फिर शरीर पर पड़ता है। धूम्रपान छोड़ने से मृत्यु दर के जोखिम में कमी आती है। जिन लोगों ने समय रहते सबक लिया है, उनमें जान का जोखिम 2.8 फीसदी से कम होकर 1.15 फीसदी रह गया। - डॉ. अंबुज, दिल्ली एम्स
जान नहीं लेगा तो बना देगा विकृत
नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के दंतरोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवेश वर्मा बताते हैं कि तंबाकू का सेवन जानलेवा हो सकता है। अगर किसी की जान बच भी जाती है तो यह उसे विकृत बना देता है। उदाहरण के तौर पर देश में सबसे ज्यादा मामले मुंह के कैंसर से जुड़े हैं, जिसमें तंबाकू एक मुख्य कारण है। मुंह का कैंसर जिन्हें होता है उन्हें एक लंबी सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी से गुजरना होता है। इसकी वजह से वह विकृत दिखने लगते हैं।
- तंबाकू से दुनिया में सालाना 80 लाख लोगों की मौत, 80 फीसदी मामले भारत जैसे निम्न व मध्यम आय वर्गीय देशों में।
भोजन का सेवन करो, तंबाकू नहीं
हर साल 31 मई को 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' के रूप में मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष के लिए थीम रखी है, हमें भोजन की जरूरत है, तंबाकू की नहीं। इंसानों के अलावा पर्यावरण पर भी तंबाकू उद्योग का हानिकारक प्रभाव बढ़ रहा है, जिससे हमारे ग्रह पर दुर्लभ संसाधन और नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र पर पहले से ही मौजूद दबाव में अनावश्यक वृद्धि हो रही है।
- देश के चार राज्यों में ही कुल उत्पादन का 93 प्रतिशत तंबाकू पैदा किया जाता है। इसमें गुजरात से 47.75 फीसदी तंबाकू आता है। आंध्र प्रदेश में 23.08 फीसदी , उत्तर प्रदेश में 12.23 फीसदी और कर्नाटक में 10.38 फीसदी तंबाकू का उत्पादन होता है।
इतने सख्त नियम, फिर भी कारोबार कम नहीं
- 2017 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के तहत 2025 तक तंबाकू के सेवन में 30 फीसदी की कमी का लक्ष्य है।
- सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (कोटपा), 2003 के जरिये प्रचार, बिक्री और उत्पादन पर निगरानी रखी जा रही है।
- सरकार ने कर में भी वृद्धि की है।
- भारत में 80 फीसदी से अधिक तंबाकू की खपत सुपारी के साथ या उसके बिना चबाने वाले तंबाकू के रूप में होती है, जिसका प्रचार माउथ फ्रेशनर के रूप में किया जाता है।
किसान भी बीमारी की चपेट में
करीब एक चौथाई तंबाकू किसानों को ग्रीन टोबैको सिकनेस नाम की बीमारी भी हो जाती है। इसमें त्वचा से सोखे गए निकोटिन से शरीर में विष फैल जाता है। दिन भर तंबाकू के बीच काम करने वाले किसान एक दिन में 50 सिगरेट के बराबर निकोटीन ले लेते हैं।
भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता एवं उत्पादक देश भी है
29 राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ व पुद्दुचेरी में हुए वैश्विक व्यस्क तंबाकू सर्वे ने पुरुषों के बीच इन उत्पादों के सेवन में कमी आने की प्रवृत्ति पता चली है, लेकिन महिलाओं में धूम्रपान के बढ़ने की प्रवृत्ति पाई गई।
तंबाकू के सेवन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव
- कैंसर, दिल का दौरा, ब्रेन स्ट्रोक, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज (पीवीडी) जैसी जानलेवा बीमारियों का दायरा तंबाकू उत्पादों की वजह से भी बढ़ रहा है।
- धूम्रपान करने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ रही है। महिलाओं को अतिरिक्त खतरों का सामना करना पड़ता है जैसे- प्रतिकूल गर्भावस्था के परिणाम, महिला विशिष्ट कैंसर जैसे- स्तन, गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर और हृदय संबंधी जोखिम में वृद्धि आदि।
- देश में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले मुंह के कैंसर के हैं। तंबाकू की भूमिका सभी तरह के कैंसरों में लगभग 50 फीसदी है।