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World No Tobacco Day 2021: धूम्रपान करने वालों में कोरोना से मौत का खतरा अधिक, डब्ल्यूएचओ ने दी चेतावनी

Sun, 30 May 2021 04:14 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sun, 30 May 2021 04:14 PM IST
सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो धूम्रपान करके अपने फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों में कोविड की गंभीरता और इससे मौत का जोखिम 50 फीसदी ज्यादा होता है।

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world no tobacco day 2021: Smokers at 50 percent higher risk of developing severe diseases, death from Covid-19 WHO
विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2021 - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अगर आप भी अक्सर दोस्तों के साथ, दफ्तर के बाहर या फिर बालकनी में खड़े होकर अक्सर सिगरेट के कश लगाने के शौकीन हैं, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इस चेतावनी को ध्यान से पढ़ लें। कहीं आपका यह शौक आपकी जान पर भारी न पड़ जाए।

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गुजरे एक वर्ष में कोविड महामारी में इतने उतार चढ़ाव आए हैं कि निश्चित रूप से यह कह पाना मुश्किल है कि इसका प्रकोप अभी कितने दिन और रहेगा। इस महामारी की दूसरी लहर और ऑक्सीजन की कमी से टूटती सांसों ने फेफड़ों की सेहत दुरुस्त रखने की जरूरत नए सिरे से बताई है। डब्ल्यूएचओ की मानें तो धूम्रपान करके अपने फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों में कोविड की गंभीरता और इससे मौत का जोखिम 50 फीसदी ज्यादा होता है।
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डब्ल्यूएचओ ने कहा- धूम्रपान छोड़ देने में ही भलाई
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधनोम घेब्रेयेसस 28 मई को जारी एक विज्ञप्ति में कहते हैं कि धूम्रपान करने वालों में कोरोना की गंभीरता और इससे मौत होने का जोखिम 50 फीसदी तक ज्यादा होता है, इसलिए कोरोना वायरस के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ देने में ही भलाई है। धूम्रपान की वजह से कैंसर, दिल की बीमारी और सांस की बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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महामारी में धूम्रपान से कहें ना
इस संबंध में नारायणा अस्पताल गुरुग्राम में कंसल्टेंट एंड सर्जन, हेड एंड नेक ऑन्कोलॉजी डॉक्टर शिल्पी शर्मा बताती हैं, ''आज के दौर में जो लोग धूम्रपान करते हैं, उन्हें कोविड महामारी को इस लत को छोड़ने के एक और कारण के रूप में देखना चाहिए। उन्हें कोविड की गंभीरता से जूझ रहे और फेफड़ों की क्षमता खो रहे मरीजों के बारे में जानकारी लेकर स्वस्थ फेफड़ों के महत्त्व को समझना चाहिए, और अपने फेफड़ों को इस धीमे जहर से बचाने का प्रण लेना चाहिए।''

इन खतरों से खुद को बचाएं
एक्शन कैंसर अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट, हेड एंड नेक, ब्रेस्ट एंड थोरैसिक ऑन्को सर्जरी यूनिट डॉक्टर राजेश जैन के अनुसार ''कोविड या फेफड़ों से संबंधित किसी भी संक्रमण के सन्दर्भ में सबसे पहले यह समझें कि फेफड़े जितने स्वस्थ होंगे, संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने की क्षमता भी उतनी होगी। ऐसे में जाहिर है कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के फेफड़े तुलनामक रूप से कमजोर होंगे तो कोविड संक्रमण के बाद होने वाले गंभीर निमोनिया का अधिक जोखिम होगा।''

खुद को दिमागी तौर पर करें तैयार, फिर धीरे-धीरे छोड़ें लत

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में असिस्टेंट प्रोफेसर डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री डाक्टर सोनाक्षी का कहना है कि कोई भी लत छोड़ने के लिए खुद को दिमागी तौर पर तैयार करना सबसे पहला कदम है। उन्होंने इस बुरी लत को छोड़ने के इच्छुक लोगों को कुछ छोटे छोटे उपाय बताए। उनके अनुसार ''एक समय में एक सिगरेट ही खरीदें, एक बार में पूरी सिगरेट पीने के बजाय आधी पीकर बाकी छोड़ देने की आदत डालें, इसे छोड़ने की कोई तारीख निश्चित कर लें या शुरू में सप्ताह में एक दिन न पीने का प्रण लें और धीरे धीरे एक से दो दिन और फिर दो से तीन दिन पर आएं। इन उपायों के अलावा निकोटिन च्यूइंग-गम चबाना भी तम्बाकू की तलब नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।''

दिल्ली मधुमेह अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. ए के झींगन इस संबंध में बताते हैं कि धूम्रपान करने वाले लोगों के लिए कोविड-19 के अधिक घातक होने की बड़ी वजह यही है कि उनका शरीर वायरस के हमले का प्रतिरोध नहीं कर पाता और फेफड़े कमजोर होने के कारण उन्हें ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की जरूरत अन्य लोगों से ज्यादा होती है।

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशेलिटी अस्पताल में निदेशक सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, डॉक्टर अंशुमन कुमार के मुताबिक, कोविड महामारी के दौर में पोस्ट कोविड सिंड्रोम एक अतिरिक्त समस्या के रूप में उभरा है। संक्रमण से मुक्त होने के बाद धूम्रपान फेफड़ों की हीलिंग पॉवर यानी ठीक होने की शक्ति को कम कर सकता है, कोविड का नसों और मासंपेशियों पर होने वाला असर धूम्रपान के कारण और भी गंभीर हो सकता है क्योंकि तम्बाकू भी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। अगर तीन इंच की तंबाकू भरी सिगरेट इतनी नुकसानदेह हैतो इससे तौबा करने का विश्व तंबाकू निषेध दिवस से बेहतर मौका शायद ही कोई और हो।
 

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