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धूम्रपान से नहीं, प्रदूषण से बढ़ रहे फेफड़ों के कैंसर के मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Updated Wed, 01 Aug 2018 05:01 PM IST
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Lung Cancer
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प्रदूषण के चलते युवा पीढ़ी खासकर महिलाएं फेफड़ों के कैंसर की मरीज बन रही हैं। धूम्रपान के चलते फेफड़ों को जो नुकसान पहुंचता है, उतना ही प्रदूषण के चलते हो रहा है। यह खुलासा सर गंगा राम अस्पताल और लंग केयर फाउंडेशन की 2012 से 2018 के दौरान मरीजों पर की गई रिसर्च में हुआ है। प्रदूषण का सबसे अधिक असर महिलाओं के फेफड़ों पर हो रहा है, जो कि चिंताजनक है।
सर गंगा राम अस्पताल ने विश्व फेफड़ों का कैंसर दिवस पर 150 मरीजों की विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट जारी की। कार्यक्रम में आम जनता के बीच फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के अभियान की शुरुआत भी की गई, ताकि समय पर बीमारी का पता लगने पर इलाज शुरू हो सके। लंग केयर फाउंडेशन ने क्रिकेटर युवराज सिंह की फाउंडेशन यूवीकैन के साथ साझेदारी की है।
सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी व लंग केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक, अब धूम्रपान नहीं, बल्कि प्रदूषण के चलते फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है। फेफड़ों के कैंसर के मरीज का पांच साल तक जीवित रहना मुश्किल है।
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डॉ. कुमार का कहना है कि इस मरीजों पर की गई रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य आए हैं। पहले धू्म्रपान कारण होता था, लेकिन अब प्रदूषण सबसे बड़ी दिक्कत है। चेस्ट मेडिसिन विभाग के डॉ. नीरज जैन ने कहा कि फेफड़ों का कैंसर एक खतरनाक बीमारी है जो अधिक से अधिक युवा लोगों को प्रभावित कर रहा है। धूम्रपान रोकना और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।
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सर गंगा राम अस्पताल ने विश्व फेफड़ों का कैंसर दिवस पर 150 मरीजों की विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट जारी की। कार्यक्रम में आम जनता के बीच फेफड़ों के कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के अभियान की शुरुआत भी की गई, ताकि समय पर बीमारी का पता लगने पर इलाज शुरू हो सके। लंग केयर फाउंडेशन ने क्रिकेटर युवराज सिंह की फाउंडेशन यूवीकैन के साथ साझेदारी की है।
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सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी व लंग केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक, अब धूम्रपान नहीं, बल्कि प्रदूषण के चलते फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है। फेफड़ों के कैंसर के मरीज का पांच साल तक जीवित रहना मुश्किल है।
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डॉ. कुमार का कहना है कि इस मरीजों पर की गई रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य आए हैं। पहले धू्म्रपान कारण होता था, लेकिन अब प्रदूषण सबसे बड़ी दिक्कत है। चेस्ट मेडिसिन विभाग के डॉ. नीरज जैन ने कहा कि फेफड़ों का कैंसर एक खतरनाक बीमारी है जो अधिक से अधिक युवा लोगों को प्रभावित कर रहा है। धूम्रपान रोकना और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।