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दुनिया की पहली फ्री ट्रेन भारत में, 69 सालों से 25 गांव के लोग हर रोज सफर करते हैं
Tue, 22 Jan 2019 04:09 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोपड़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोपड़
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 22 Jan 2019 04:09 PM IST
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नंगल से भाखड़ा डैम तक चलने वाली ट्रेन
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दुनिया की पहली फ्री ट्रेन भारत में है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बॉर्डर पर नंगल से भाखड़ा डैम तक चलने वाली इस ट्रेन में सफर करने के लिए टिकट नहीं लेना पड़ता। यह ट्रेन 69 साल से लोगों को मुफ्त में सफर करा रही है।
दरअसल चट्टानों को काटकर दुर्गम रास्तों पर निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) ने यह ट्रेन चलाई थी। बीबीएमबी का कहना है कि डैम का निर्माण कैसे हुआ, इसमें क्या चुनौतियां आईं, भावी पीढ़ी को यह बताने के लिए ही ट्रेन का लगातार संचालन किया जा रहा है।
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ट्रेन चलाने के लिए बीबीएमबी हर साल बजट निर्धारित करता है। 2017-18 के लिए करीब साढ़े 57 लाख रुपए का बजट रखा गया था।
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क्यों चलाई गई यह ट्रेन
इस ट्रेन को चलाने का मकसद यह है कि आज की भावी पीढ़ी यह जान सके कि देश का सबसे बड़ा भाखड़ा-नंगल डैम कैसे बना। देश के पहले और सबसे बड़े भाखड़ा-नंगल डैम के निर्माण में कौन-कौन सी चुनौतियां पेश आईं। इस बारे में कम ही लोग जानते हैं।
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दरअसल चट्टानों को काटकर दुर्गम रास्तों पर निर्माण सामग्री पहुंचाने के लिए बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) ने यह ट्रेन चलाई थी। बीबीएमबी का कहना है कि डैम का निर्माण कैसे हुआ, इसमें क्या चुनौतियां आईं, भावी पीढ़ी को यह बताने के लिए ही ट्रेन का लगातार संचालन किया जा रहा है।
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क्या खास है इस ट्रेन में
25 गांव के सैकड़ों लोग, स्टूडेंट्स रोजाना सफर करते हैं। 1949 में शुरू की गई यह ट्रेन नंगल से डैम तक का सफर रोज दो बार तय करती है। ट्रेन के सभी कोच लकड़ी के बने हैं। ट्रेन में न तो कोई हॉकर और न ही टीटीई मिलेगा।हर साल दिया जाता है ट्रेन का बजट
बीबीएमबी की ओर से बताया गया कि डैम बनाने में इस ट्रेन का अहम योगदान है। शुरुआत में इसमें 10 बोगियां थीं। डैम के लिए जमीन का अधिग्रहण करते वक्त मैनेजमेंट ने लोगों से वादा किया था कि उनकी सुविधा के लिए यह ट्रेन हमेशा चलती रहेगी।ट्रेन चलाने के लिए बीबीएमबी हर साल बजट निर्धारित करता है। 2017-18 के लिए करीब साढ़े 57 लाख रुपए का बजट रखा गया था।