फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   World Environment Day: Weather changes, temperature rises to record high for 1st time in 124 years; CSE report

विश्व पर्यावरण दिवस: मौसम का बदल रहा मिजाज, 124 साल में पहली बार रिकॉर्ड तोड़ बढ़ा तापमान; पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Fri, 05 Jun 2026 05:35 AM IST
Pavan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 05 Jun 2026 05:35 AM IST
सार

विश्व पर्यावरण दिवस विशेष: कटते जंगल, घटते जलस्तर ने मौसम का संतुलन बिगाड़ दिया है।सीएसई की रिपोर्ट ने आंकड़ों के जरिये देश की चिंताजनक तस्वीर दिखाई है। जिसमें बताया गया कि 2025 भारत का आठवां सबसे गर्म साल रहा और चरम मौसम ने 4421 लोगों की जान ली। जबकि हर आठ में से एक भारतीय बीमार है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

विज्ञापन
World Environment Day: Weather changes, temperature rises to record high for 1st time in 124 years; CSE report
विश्व पर्यावरण दिवस: मौसम का बदल रहा मिजाज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देशभर में कटते जंगल और घटते भूजल स्तर से पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है। प्राकृतिक असंतुलन का ही नतीजा है कि 2025 को भारत ने अपने आठवें सबसे गर्म वर्ष के तौर पर दर्ज किया। इस वर्ष औसत तापमान 1991-2020 के दीर्घकालीन औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। जनवरी-फरवरी और मार्च-मई के मौसम सामान्य से अधिक गर्म रहे। सर्दियों में 1.17 डिग्री सेल्सियस की रिकॉर्ड तोड़ विसंगति देखी गई, जो 1901 यानी 124 वर्ष बाद सबसे अधिक वृद्धि को दर्शाता है।
विज्ञापन


यह चिंताजनक तस्वीर पर्यावरण दिवस से एक दिन पहले सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनेंट (सीएसई) की ओर से जारी रिपोर्ट में सामने आई है। जून से सितंबर का समय सामान्य से थोड़ा अधिक गर्म (0.09 डिग्री) रहा और अक्तूबर से दिसंबर में तापमान सामान्य से थोड़ा कम (0.10 डिग्री) रहा। 2025 में 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 में 24 घंटे के अधिकतम तापमान ने औसत मासिक उच्चतम तापमान ने 124 साल का रिकॉर्ड तोड़ा। वहीं, 21 राज्यों में 124 वर्ष बाद मासिक 24 घंटे की सर्वाधिक वर्षा का रिकॉर्ड भी टूटा। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2025 में भारत 99% दिनों तक किसी न किसी रूप में चरम मौसम की घटनाओं का गवाह बना। इसके कारण न केवल 4,421 लोगों को जान गंवानी पड़ी बल्कि 1.74 करोड़ हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा।
विज्ञापन


आंकड़े बताते हैं कि वायु प्रदूषण भी अधिक जानलेवा हो रहा है। यही नहीं, देश में हर आठ में से एक नागरिक किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है। चरम मौसमी घटनाएं देश में अब अपवाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की वास्तविकता बनती जा रही हैं, जिसका सीधा असर लोगों की जान, आजीविका और कृषि पर पड़ रहा है। फरवरी 2026 में पहली बार देश में एक भी शीतलहर दर्ज नहीं की गई। वहीं, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश को मार्च 2026 की शुरुआत में ही गंभीर हीटवेव का सामना करना पड़ा, जो बदलते जलवायु पैटर्न का स्पष्ट संकेत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च-अप्रैल किसानों के लिए जोखिम वाले महीने बनते जा रहे हैं। इनमें तापमान बढ़ रहा है, नमी और बारिश अधिक हो रही है और ओलावृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का दायरा भी फैल रहा है, जिससे फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ गया है। सीएसई और डाउन टू अर्थ ने सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से तैयार रिपोर्ट में ठोस कदम न उठाने पर भयावह नतीजे की चेतावनी दी है। सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा, आंकड़ों जो तस्वीर सामने लाते हैं, उससे आगे की कार्रवाई की दिशा तय होती है।

World Environment Day: Weather changes, temperature rises to record high for 1st time in 124 years; CSE report
विश्व पर्यावरण दिवस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जन स्वास्थ्य में उत्तर प्रदेश, बिहार फिसड्डी
  • जन स्वास्थ्य में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़ की स्थिति सबसे खस्ताहाल रही। दादरा और नगर हवेली व दमन और दीव का भी यही हाल रहा। गोवा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, केरलम, सिक्किम शीर्ष-5 राज्यों और दिल्ली शीर्ष केंद्रशासित प्रदेश में शामिल है।

वायु प्रदूषण
  • 2014 से 2023 के बीच वैश्विक वायु प्रदूषण संबंधी मौतों में भारत की हिस्सेदारी 23.76 प्रतिशत से बढ़कर 25.34 प्रतिशत हो गई।

मृत्युदर अधिक
  • 2023 में भारत में वायु प्रदूषण से मृत्यु दर प्रति 100,000 व्यक्तियों पर 186 थी, जबकि वैश्विक औसत 114 था। पिछले एक दशक में पीएम 2.5 के कारण होने वाली मौतों में भी 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

राहत की बात
  • 22% की कमी आई घरेलू वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में। जो स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन की ओर बदलाव के लाभों को दर्शाती है।

विकास संकेतकों में पिछड़े पांच सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य
  • विकास संकेतक आधारित रैंकिंग में सबसे ज्यादा आबादी वाले पांच राज्य-यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल-काफी पीछे हैं, जो इनके स्वास्थ्य, अवसंरचना विकास, सामाजिक समानता व पर्यावरणीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में पिछड़ने का संकेत है।

सार्वजनिक अवसंरचना
  • गोवा, नगालैंड, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु शीर्ष-5 और झारखंड, बिहार, यूपी, ओडिशा, अरुणाचल सबसे खराब प्रदर्शन वाले राज्य।
  • 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 32 इस मामले में मानकों में आधे से भी नीचे।

World Environment Day: Weather changes, temperature rises to record high for 1st time in 124 years; CSE report
विश्व पर्यावरण दिवस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

भारत में पर्यावरण की स्थिति

वन और जैव विविधता
  • 2020-21 से 2024-25 के बीच पर्यावरण मंत्रालय ने लगभग 97,000 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोगों के लिए स्थानांतरित करने की मंजूरी दी।
  • 26 राज्यों में वन भूमि घटी, इंसानों पर हाथियों और बाघों के हमलों की घटनाएं बढ़ीं। 2025 के पहले छह महीनों में ही बाघों ने 40 लोगों को मार डाला।

जल संकट
  • पृथ्वी वैश्विक जल कंगाली के दौर में पहुंच रही है। कई क्षेत्रों में तो नदियां, झीलें, जलस्रोत, आर्द्रभूमि, मिट्टी और हिमनद इस कदर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि उनके ठीक होने की भी कोई गुंजाइश नहीं रही है।
  • भारत की बात करें तो 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने भूजल का अत्यधिक दोहन कर रहे हैं-पंजाब, राजस्थान और हरियाणा जितना भूजल निकलते हैं, उसकी मात्रा पुनर्भरण की तुलना में कहीं ज्यादा है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य
  • रिपोर्ट राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से गत अप्रैल में जारी रिपोर्ट के हवाले से बताती है कि 13% भारतीय किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं।
  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में युवा लड़कियां और महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक बीमार पड़ रही हैं। हृदय रोग कम उम्र में ही अपनी चपेट में ले रहा है। कुल हृदय रोग पीड़ितों में से 2% संख्या 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की है।

कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती
  • ज्यादातर राज्यों में कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती बना हुआ है। पर्यावरण के लिहाज से गोवा, असम, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, ओडिशा शीर्ष पांच राज्य रहे, जबकि केंद्रशासित क्षेत्र में चंडीगढ़ ने अव्वल स्थान हासिल किया।
  • सबसे निचले स्थान पर राजस्थान, तमिलनाडु, बिहार, पंजाब, प. बंगाल, पुदुचेरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed