World Diabetes Day: दुनिया की मधुमेह राजधानी बनता भारत, साल 2030 तक चीन के बाद होगा दूसरा स्थान
पिछले 25 सालों में भारत में तेज आर्थिक विकास और अमीरी ने जीवनशैली में कई तरह के बदलाव किए हैं, जिनमें सबसे अहम पोषाहार संबंधी बदलाव, आहार का वैश्वीकरण और शारीरिक निष्क्रियता हैं। इन बदलावों के दुष्परिणाम खासकर डायबिटीज और हृदय रोग के तेजी से बढ़ते मामलों के रूप में सामने आया है। इस दौरान डायबिटीज का फैलाव करीब तीन गुना हो गया है, जबकि अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले दो दशकों में डायबिटीज के मामले में 200 फीसदी तक वृद्धि हो सकती है। शहरी, अर्धशहरी और कस्बों में मध्य और निम्न आय वर्ग के लोगों में भी डायबिटीज के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
विस्तार
डायबिटीज यानी मधुमेह ने देश में इतनी तेजी से लोगों को शिकार बनाना शुरू किया है कि भारत को दुनिया की मधुमेह राजधानी कहना गलत नहीं होगा। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के 2023 में किए गए अध्ययन के अनुसार भारत में टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह के कुल 10.1 करोड़ मरीज हैं। यह देश की वयस्क आबादी (18 वर्ष से उपर) का 11.4 फीसदी है। सिर्फ दो साल पहले 2021 तक यह संख्या सात करोड़ से कुछ अधिक थी और वयस्क आबाद का सिर्फ आठ फीसदी हिस्सा इस बीमारी से ग्रस्त था। दो साल में मरीजों की संख्या करीब 36 फीसदी बढ़ गई है।
यही नहीं, करीब 13.6 करोड़ लोग मधुमेह पूर्व यानी प्री डायबेटिक की स्थिति में हैं। दूसरे शब्दों में इतने लोग कभी भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। यह देश की वयस्क आबादी का 15 फीसदी से अधिक है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन्सानी शरीर को अंदर से खोखला कर देने वाली यह बीमारी कितनी तेजी से भारत में पैर पसार रही है।
- भारतीयों में अनुवांशिक है...टाइप 2 डायबिटीज के 75 फीसदी मरीजों में डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास रहा है।
- टाइप 2 डायबिटीज के 90 फीसदी मरीज या तो सामान्य से अधिक वजन या फिर मोटापे के शिकार हैं।
डायबेटिक नैफ्रोपैथी (किडनी खराब होने) के 20 से 30 फीसदी मरीजों को जिंदा रहने के लिए डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। भारत में किडनी फेल होने के पीछे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप सबसे आम वजह हैं।
टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में लक्षण
टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में लक्षण अचानक और गंभीर होते हैं।
- बहुत अधिक प्यास n मुंह सूखना n लगातार पेशाब आना
- बिना कारण के बहुत वजन गिर जाना n भूख ज्यादा लगना
- धुंधला दिखाई देना n पेट में दर्द और उल्टी
- चक्कर, भ्रम और अचेत होना (मौत के खतरे वाली स्थिति, जिसे कीटोएसिडोसिस कहा जाता है)
टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में लक्षण
टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों में भी कीटोएसिडोसिस को छोड़कर ऊपर दिए गए सारे लक्षण होते हैं, मगर इसमें ये लक्षण इतना अचानक और नाटकीय रूप से सामने नहीं आते, जितना टाइप 1 के मरीजों में होते हैं।
सभी तरह के डायबिटीज मरीजों में ये लक्षण
- थकान और लगातार शिथिलता
- कटने या घाव होने पर देर से ठीक होना
- मुंह, निजी अंगों पर यीस्ट का संक्रमण
- पैरों में सिहरन, सुन्नपन या सूजन
टाइप 2 डायबिटीज के 50 फीसदी के करीब मरीजों में कोई भी लक्षण सामने नहीं आ सकता है। अधिकांश मामलों में खून की नियमित जांच से डायबिटीज का पता चलता है।
जांच
- डायबिटीज का पता आमतौर पर भूखे पेट (फास्टिंग) ग्लूकोज के स्तर की जांच के जरिये लगाया जाता है। जांच के लिए मरीज को 8 से 10 घंटे भूखा रहना पड़ता है।
- कई बार ग्लूकोज के स्तर की सही जानकारी के लिए एक बार से ज्यादा जांच करनी पड़ती है।
बचाव
- डायबिटीज को व्यायाम और सही भोजन की मदद से प्रभावी रूप से रोका जा सकता है। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि नियमित रूप से व्यायाम किया जाए, जरूरत भर की कैलोरी वाला सही भोजन किया जाए और बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को कम उम्र से ही नियंत्रण में रखा जाए।
- सही तरीके से देखभाल न होने से प्री-डायबेटिक के आधे से अधिक मरीज पूर्ण रूप से डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं।
- बचपन और किशोरावस्था में वजन बढ़ने से रोकने के लिए पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। जिनके परिवार में डायबिटीज, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज, जेस्टेशनल डायबिटीज और प्री-डायबिटीज की अवस्था का इतिहास रहा हो, उन्हें भोजन और व्यायाम पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
भोजन में शामिल की जाने वाली कुछ चीजें : सही तेल, रेशेदार पदार्थ, नट्स, दालचीनी आदि ब्लड शुगर घटाने में मददगार होती हैं।
डायबिटीज का इलाज
ऐसे मोटे लोग जिनमें डायबिटीज की शुरुआत ही हुई हो, उनमें भोजन, व्यायाम और दवाओं के जरिये डायबिटीज पूर्व की स्थिति लाई जा सकती है। बहुत अधिक मोटापे वाले लोगों में डायबिटीज को पूरी तरह ठीक करने में बेरियेट्रिक सर्जरी सबसे कारगर तरीका है।
- डायबिटीज का इलाज वैयक्तिक होना चाहिए और इसे हर मरीज की जीवनशैली और उसके प्रोफाइल के अनुरूप होना चाहिए।
- डायबिटीज का प्रबंधन डायबिटीज के प्रकार, मरीज की भोजन की आदतों, शारीरिक व्यायाम की क्षमता, उम्र, बीमारी के बारे में समझने की दक्षता, गर्भावस्था की स्थिति, जटिलताओं की मौजूदगी और बीमारी का पता लगने के समय मरीज की मेडिकल कंडीशन पर निर्भर करता है।
किसी भी तरह की जटिलताओं को टालने के लिए ब्लड शुगर के स्तर का लगातार नियंत्रण में बने रहना जरूरी होता है।
- डॉक्टरों को इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में हर रख कर हर मरीज के इलाज की अलग योजना बनानी चाहिए।
- बीमारी का प्रबंधन उचित जानकारी, सही देखभाल, सही उपचार और नियमित फॉलोअप के जरिये संभव है।
- डायबिटीज समय के साथ बढ़ने वाली बीमारी है और मरीज की उम्र बढ़ते जाने के साथ ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए दवा की मात्रा भी बढ़ानी पड़ सकती है।
- समय-समय पर इलाज में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है, खासकर गंभीर स्थिति में (बुखार, डायरिया, उल्टी आदि), हार्ट अटैक, किडनी की समस्या या ऑपरेशन होने पर।