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श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से जाने में भी तकलीफें उठा रहे मजदूर, गृहराज्य में बन सकते हैं कोरोना के वाहक!

Wed, 20 May 2020 04:05 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 20 May 2020 04:05 PM IST
सार

  • श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से यात्रियों को भेजने के केंद्रों पर दिखी भयंकर लापरवाही,
  • सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों से बेपरवाह लोग दिन भर कर रहे बारी का इंतजार
  • सेंटर से लेकर यात्रा करने तक के दौरान यात्रियों की सुविधा का ध्यान, संतुष्ट दिखे यात्री
  • यात्रियों को भोजन की सुविधा उपलब्ध, बिना पैसे लिए मजदूरों को दिये जा रहे रेलवे टिकट

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Workers are facing difficulty by getting the special trains, could become carriers of Corona in their hometown!
Migrants at railway station - फोटो : PTI (for Reference)

विस्तार

मजदूरों को जितनी तकलीफ कोरोना काल में दिल्ली-मुंबई जैसे शहरों में रहने में हो रही थी, उतनी ही तकलीफ उन्हें घर लौटने में भी हो रही है। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में बारी आने के बाद भी उन्हें भेजने के यात्री सेंटरों पर तेज गर्मी में पूरे-पूरे दिन खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

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इन सेंटरों पर सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। लोग बेहद करीब खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए हैं। भोजन के दौरान भी लोगों के बीच शारीरिक दूरी नहीं रखना संभव हो पा रहा है।

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आशंका है कि इन लोगों के अपने गृह राज्य में पहुंचने के बाद वहां कोरोना के मामलों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है। बिहार में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।

पूरे दिन का इंतजार

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से जाने के लिए जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवा रखा है, उन्हें यात्रा के पहले एक मोबाइल संदेश देकर सूचना दी जा रही है। यूपी के जिले जौनपुर जा रहे एक यात्री अनिल कुमार (45 वर्ष) ने बताया कि संदेश में उन्हें कितने बजे तक किस जगह पर पहुंचना है, इसकी पूरी जानकारी दी जा रही है।

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उन्हें खजूरी खास के एक राजकीय स्कूल में सुबह आठ बजे बुला लिया गया था। लेकिन देर शाम लगभग आठ बजे तक भी यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि उन्हें किस ट्रेन से जाने का अवसर मिलेगा। इस दौरान उन्हें पूरे दिन स्कूल के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।

पूरे दिन के इंतजार के बाद भी लौटने पर मजबूर

कई मामलों में लोगों को पूरे दिन के इंतजार के बाद अगले दिन आने के लिए कहा जा रहा है क्योंकि एक ट्रेन में यात्रियों के जाने की अधिकतम संख्या से अधिक लोगों को बुला लिया जा रहा है।

वाराणसी के निसार अहमद ने बताया कि वे एक दिन पूर्व यहां पूरे दिन खड़े होकर शाम को वापस भेज दिए गए थे। मंगलवार को वे दोबारा पूरे दिन स्कूल के बाहर खड़े रहने के लिए मजबूर हैं।

इससे साफ जाहिर होता है कि यात्रियों की अधिकतम संख्या और बुलाये जा रहे लोगों की संख्या में पर्याप्त तालमेल नहीं है।

इस लापरवाही के कारण लोगों में सरकार के प्रति काफी नाराजगी और निराशा है। लाउड स्पीकर से हो रही घोषणा में किसी ट्रेन में कितने लोगों के लिए जगह है, इसकी जानकारी दी जा रही है। जिन लोगों का नंबर नहीं लग रहा है, उन्हें अगले दिन दोबारा लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।

श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के इन केंद्रों पर पहुंचने के बाद लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। स्वास्थ्य जांच के नाम पर केवल थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। ज्यादातर मामलों में किसी यात्री से उनकी बीमारी संबंधी कोई पूछताछ भी नहीं हो रही है।

जांच के बाद उन्हें एक विशेष टोकन नंबर और रेलवे टिकट दिया जा रहा है। यात्रियों को यह रेल टिकट पूरी तरह मुफ्त दिए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक इसका भुगतान मजदूरों के गृहराज्य करेंगे।

भोजन-पानी की उचित व्यवस्था

यात्रियों के सेंटरों पर पहुंचने के बाद उन्हें दोपहर के समय भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बाद ट्रेन पर पहुंचने के बाद भी पैकेट बंद भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। यात्रियों ने कहा है कि भोजन की क्ववॉलिटी अच्छी है और यात्रा के दौरान बीच में भी उन्हें भोजन दिया जा रहा है।

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