फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Women sacrificing their love to accept parents decision is a common phenomenon in India

मां-बाप के लिए बेटियां करती हैं त्याग, आत्महत्या मामले में SC ने प्रेमी को किया बरी

Sun, 18 Jun 2017 10:37 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Updated Sun, 18 Jun 2017 10:37 PM IST
विज्ञापन
Women sacrificing their love to accept parents decision is a common phenomenon in India
सुप्रीम कोर्ट
असफल प्रेम कहानियों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने एक जीवंत टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि भारत में माता पिता के फैसले को मानने के लिए महिलाओं द्वारा अपने प्रेम का बलिदान करना एक आम घटना है। सर्वोच्च अदालत ने एक मामले में उस व्यक्ति की उम्रकैद की सजा को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसने एक महिला से गुपचुप तौर पर शादी कर ली थी। हालांकि शादी के बाद तुरंत दोनों ने आत्महत्या कर ली, जिसमें आरोपी तो जीवित बच गया था लेकिन 23 वर्षीय महिला नहीं बच सकी थी।
विज्ञापन


साल 1995 की इस घटना में पुलिस ने प्रेमी के खिलाफ पीड़िता की हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संभव है कि महिला पहले ‘अनिच्छा से’ अपने माता बाप की इच्छा को मानने को राजी हो गई हो, लेकिन घटनास्थल के दृश्यों से लगता है कि बाद में उसका मन बदल गया हो। घटनास्थल पर फूलमाला, चूड़ियां और सिंदूर देखे गए जो इस संभावना के संकेत देते हैं। आगे ऐसा देखा गया कि महिला ने अपने प्रेमी से कहा हो कि उसके परिवार के विरोध की वजह से वह उससे शादी नहीं कर पाएगी।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा कि अपने प्यार का बलिदान कर भले ही अनिच्छा से ही अपने माता पिता के फैसले को मानने के लिए लड़की द्वारा जिस तरह की प्रतिक्रिया सामने आई, वह इस देश में एक आम घटना है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि पीड़ित लड़की और आरोपी एक दूसरे से प्यार करते थे। लड़की के पिता ने ही अदालत के समक्ष यह गवाही दी थी कि जाति अलग होने के कारण उनके परिवार ने इस शादी के लिए रजामंदी नहीं दी थी। यही नहीं मामले में प्रेमी ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष कहा था, ‘चूंकि लड़की के परिजन उनकी शादी के लिए राजी नहीं थे इसलिए दोनों ने ही आत्महत्या करने का निश्चय किया और जयपुर स्थित घर में कॉपर सल्फेट की गोलियां निगल ली थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन



परिकल्पना के आधार पर नहीं किए जा सकते फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के अंतर्गत टिप्पणी करते कहा कि आपराधिक मामलों के फैसले परिकल्पना के आधार पर नहीं किए जा सकते हैं। उच्चतम न्यायालय ने प्रेमी को बरी कर दिया जिसे निचली अदालत ने प्रेमिका की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुना दी थी। इस फैसले की राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पर्याप्त संदेह के बावजूद अभियोजन पक्ष प्रेमी का दोष सिद्ध करने में सक्षम नहीं रहा है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed