दया नहीं, सम्मान से मिले महिलाओं को संसद में आरक्षण: लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन
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लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि संसद और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण पूरे सम्मान के साथ मिलना चाहिए। यह उनका हक है, जिसे पाने के लिए उन्हें किसी की दया की जरूरत नहीं है। वह रविवार को अमरावती में भारतीय महिला संसद के अंतिम दिन उमड़ी करीब 10 हजार छात्राओं को संबोधित कर रही थीं।
गीता का उदाहरण देते हुए सुमित्रा महाजन ने कहा कि महिलाओं को भगवान कृष्ण की तरह सारथी बनकर परिवार और समाज को दिशा दिखानी चाहिए। इससे पहले पहली महिला संसद के सफल आयोजन से गदगद मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश के स्कूलों में प्रतिवर्ष एक दिन मातृ पूजन दिवस (तल्लि कि वंदनम) मनाने का एलान किया।
उन्होंने आयोजन से जुड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र का आभार जताया। इस बीच मशहूर नृत्यांगना डॉ सोनल मान सिंह ने ‘आधे से अधिक, अधिकार से रहित’ कविता सुनाकर छात्राओं का दिल जीत लिया। दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी और आंध्र प्रदेश विधानसभा के स्पीकर डॉ कोडेला प्रसाद राव समेत कई राज्यों की महिला सांसदों और विधायकों ने दो सत्रों में आधी आबादी की समस्याओं पर चर्चा की।
महिलाओं पर स्पीकर का विवादित बयान चर्चा में
भारतीय महिला संसद के मुख्य आयोजक और आंध्र प्रदेश विधानसभा के स्पीकर डॉ कोडेला शिवा प्रसाद राव का महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिया गया एक पूर्व विवादित बयान हंगामे का कारण बन गया। तेलगू मीडिया के मुताबिक उन्होंने पहले कभी कथित रूप से कहा था कि महिलाओं को उसी तरह सुरक्षा देनी चाहिए जैसे कार को गैरेज में रखकर दी जाती है।
ये बात चर्चा में आने के बाद कोडेला खुद मीडिया के सामने आए और कहा कि बड़े एवं सफल आयोजन में किसी ने दही डालने का काम किया है। पिछले छह माह से वह पहली भारतीय महिला संसद के आयोजन के लिए दिन-रात एक किए थे। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए हमेशा काम किया। इससे पहले महिला सशक्तीकरण के लिए दौड़ का आयोजन किया गया। इसे ओलंपिक में सिल्वर मेडल विजेता पीवी सिंधू और मशहूर शतरंज खिलाड़ी कोनेरू हंपी ने झंडी दिखाकर रवाना किया।