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2023 का महिला आरक्षण कानून लागू: अधिसूचना जारी होने के बाद बोले पीएम मोदी- नारी शक्ति मजबूत भारत की पहचान
Fri, 17 Apr 2026 08:41 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 17 Apr 2026 08:41 AM IST
सार
देश में महिला आरक्षण कानून लागू हो गया है। इसके तहत लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति की सराहना करते हुए इसे महिलाओं का अधिकार बताया। हालांकि इसका सीधा लाभ 2029 के चुनाव से मिलेगा।
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पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में महिला आरक्षण कानून 2023 लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है। इसको लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की नारी शक्ति की जमकर सराहना की और मातृशक्ति को एक मजबूत भारत की पहचान बताया।
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर अपने पोस्ट की श्रृंखला, सुभाषितम में लिखा- हमारी नारी शक्ति सशक्त भारत की पहचान है। देश की माताएं-बहनें और बेटियां अपनी अटूट संकल्पशक्ति, निष्ठा और सेवाभाव से आज हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने संस्कृत के दो श्लोक भी लिखे हैं।
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या ।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ।।
अब यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। संसद ने सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को मंजूरी दी थी। इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें: Bengal: अधीर की चौधराहट, हुमायूं की बाबरी और मुसलमानों की ममता; मुर्शिदाबाद की 22 सीटों पर बदले समीकरण
हालांकि, 2023 के इस कानून के अनुसार आरक्षण का फायदा 2029 से पहले नहीं मिल सकेगा, क्योंकि इसे 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। वर्तमान में लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, उनका उद्देश्य महिला आरक्षण को 2029 से लागू करना है। अधिकारियों के मुताबिक, कानून लागू हो जाने के बावजूद मौजूदा लोकसभा में यह आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
संसद में अभी इससे जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा चल रही है। इनमें लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में भरोसा दिया कि परिसीमन के दौरान किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने इसे 'मोदी की गारंटी' बताया और कहा कि यह नारी शक्ति का हक है। गृहमंत्री अमित शाह ने भी साफ किया कि दक्षिण के राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी। उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि दक्षिण भारत की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। अकेले तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होने की उम्मीद है।
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वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर अपने पोस्ट की श्रृंखला, सुभाषितम में लिखा- हमारी नारी शक्ति सशक्त भारत की पहचान है। देश की माताएं-बहनें और बेटियां अपनी अटूट संकल्पशक्ति, निष्ठा और सेवाभाव से आज हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं। इसके साथ ही पीएम मोदी ने संस्कृत के दो श्लोक भी लिखे हैं।
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देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या ।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म विदधातु शुभानि सा नः ।।
हमारी नारी शक्ति सशक्त भारत की पहचान है। देश की माताएं-बहनें और बेटियां अपनी अटूट संकल्पशक्ति, निष्ठा और सेवाभाव से आज हर क्षेत्र में भारतवर्ष का गौरव बढ़ा रही हैं।
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देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूर्त्या ।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भक्त्या नताः स्म… pic.twitter.com/QaWDfseIAN — Narendra Modi (@narendramodi) April 17, 2026
अब यह कानून 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गया है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। संसद ने सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को मंजूरी दी थी। इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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हालांकि, 2023 के इस कानून के अनुसार आरक्षण का फायदा 2029 से पहले नहीं मिल सकेगा, क्योंकि इसे 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। वर्तमान में लोकसभा में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा चल रही है, उनका उद्देश्य महिला आरक्षण को 2029 से लागू करना है। अधिकारियों के मुताबिक, कानून लागू हो जाने के बावजूद मौजूदा लोकसभा में यह आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
संसद में अभी इससे जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा चल रही है। इनमें लोकसभा की कुल सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव भी शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में भरोसा दिया कि परिसीमन के दौरान किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने इसे 'मोदी की गारंटी' बताया और कहा कि यह नारी शक्ति का हक है। गृहमंत्री अमित शाह ने भी साफ किया कि दक्षिण के राज्यों की सीटें कम नहीं होंगी। उन्होंने आंकड़े देते हुए बताया कि दक्षिण भारत की सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। अकेले तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 होने की उम्मीद है।
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